अमेरिकी राष्ट्पति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने कहा है कि ईरान के साथ चल रही जंग में केवल हवाई बमबारी से अमेरिका'हवाई हमले से ईरान युद्ध नहीं जीता जा सकता', ट्रंप के पूर्व रक्षा मंत्री का दावा जीत नहीं हासिल कर सकता. अमेरिका को अब रणनीति बदलनी होगी. ईरान पर पूरी तरह से आर्थिक दबाव बनाकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दोबारा खुलवाना चाहिए. यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की आशंका से पूरी दुनिया चिंतित है.
मार्क एस्पर ट्रंप प्रशासन में पेंटागन के प्रमुख रह चुके हैं. उन्होंने सुरक्षा विशेषज्ञों से बात करते हुए साफ कहा कि केवल बमबारी बढ़ाने से ईरान की रणनीति नहीं बदलेगी. ईरान इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर नियंत्रण रखना चाहता है और हवाई हमलों से वह अपना रुख नहीं बदलेगा.
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एस्पर ने कहा कि अगर हम कुछ महीने पहले की तरह बमबारी तेज कर दें और उसे लंबे समय तक जारी रखें, तब भी इसमें बड़ा बदलाव आने की उम्मीद नहीं है. उनके अनुसार, समस्या का हल या तो पूर्ण सैन्य हमला है या फिर ईरान को आर्थिक रूप से घेरना.
दो रास्ते: सैन्य हमला या आर्थिक घेराबंदी
एस्पर ने वर्तमान अमेरिकी प्रशासन के सामने दो ऑप्शन रखे. पहला - पूर्ण सैन्य हमला, दूसरा है ईरान को आर्थिक रूप से इतना कमजोर करना कि उसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलना पड़े. उन्होंने कहा कि आर्थिक दबाव के लिए समय, धैर्य और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है. केवल प्रतिबंध लगाने से काम नहीं चलेगा, उन्हें सख्ती से लागू करना होगा.
इस विवाद से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है. संघर्ष शुरू होने के बाद यहां से तेल का आना-जाना बहुत कम हो गया है.
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ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत जुलाई की शुरुआत से अब तक 16 प्रतिशत बढ़कर लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है. अगर यह बंदी लंबी चली तो कीमत 100 डॉलर से ऊपर जा सकती है, जिससे नई महंगाई की लहर आ सकती है. अमेरिका में भी कच्चे तेल के भंडार 1984 के बाद सबसे कम स्तर पर पहुंच गए हैं.
अमेरिका की सैन्य और रणनीतिक चुनौतियां
केवल हवाई हमलों से अमेरिका की सैन्य तैयारियां भी प्रभावित हो रही हैं. पेंटागन ने अब तक अरबों डॉलर खर्च कर दिए हैं और हथियारों के स्टॉक काफी कम हो गए हैं. मार्क एस्पर ने चिंता जताते हुए कहा कि इससे अमेरिका की वैश्विक तैयारियों पर असर पड़ रहा है.

उनका सबसे बड़ा डर चीन है. उन्होंने कहा कि हमारे गोला-बारूद, स्टॉक और तैयारियों की स्थिति खराब हो रही है? क्योंकि वैश्विक स्तर पर हमारी सबसे बड़ी चिंता चीन है.
एस्पर के अनुसार, ईरान के खिलाफ सफल रणनीति के दो स्टैंडर्ड होने चाहिए. पहला – स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फ्री ट्रांसपोर्टेशन पूरी तरह बहाल होना चाहिए. दूसरा – ईरान के साथ एक मजबूत परमाणु समझौता होना चाहिए, जो ओबामा काल के समझौते से बेहतर हो.
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कई अन्य पूर्व अधिकारी भी आर्थिक दबाव की रणनीति को बेहतर मानते हैं. पूर्व विदेश मंत्री कोंडेलीजा राइस ने भी कहा कि तुरंत परमाणु समझौते की बजाय ईरान को आर्थिक रूप से अधिक नुकसान पहुंचाना चाहिए.
मार्क एस्पर की चेतावनी साफ संकेत देती है कि ईरान के मामले में केवल सैन्य शक्ति पर्याप्त नहीं है. लंबे समय तक हवाई हमले जारी रखने से न सिर्फ लक्ष्य हासिल नहीं होंगे, बल्कि अमेरिका की अपनी आर्थिक और सैन्य क्षमता भी कमजोर हो सकती है. अब सवाल यह है कि अमेरिका आर्थिक दबाव की राह पर कितना आगे बढ़ता है और कितने देश उसके साथ सहयोग करते हैं.