विदेश में नौकरी करने का सपना बहुत से लोग देखते हैं. अच्छी सैलरी के साथ-साथ वहां के वर्क कल्चर को भी लोग काफी पसंद करते हैं. अब जर्मनी में रहने वाली एक भारतीय महिला ने स्विट्जरलैंड के ऑफिसों की कुछ ऐसी आदतों के बारे में बताया है, जिन्हें सुनकर भारत के कई लोगों को हैरानी हो सकती है. उनकी पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और लोग अलग-अलग देशों के वर्क कल्चर की तुलना कर रहे हैं. जर्मनी में रहने वाली प्रोडक्ट मैनेजर सिमरन खोखा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर की. उन्होंने बताया कि उनकी एक दोस्त स्विट्जरलैंड की एक कंपनी में काम करती है. उसी दोस्त से मिली जानकारी के आधार पर उन्होंने वहां के ऑफिस कल्चर की 12 खास बातें लोगों के साथ साझा कीं.
सिमरन ने कहा कि यह सिर्फ अच्छी सैलरी का मामला नहीं है, बल्कि वहां काम करने का तरीका पूरी तरह अलग है. वहां कर्मचारियों की इज्जत, समय की कीमत और वर्क- लाइफ बैलेंस को बहुत महत्व दिया जाता है. उन्होंने बताया कि स्विस ऑफिस में सबसे पहले समय की पाबंदी पर खास ध्यान दिया जाता है. अगर किसी मीटिंग का समय सुबह 10 बजे है तो वह ठीक 10 बजे शुरू हो जाती है. कुछ मिनट की देरी को भी प्रोफेशनल व्यवहार नहीं माना जाता. दूसरी बड़ी बात यह है कि वहां कर्मचारियों को इस बात से नहीं आंका जाता कि उन्होंने ऑफिस में कितने घंटे बिताए. उनकी असली पहचान उनके काम के नतीजों से होती है. अगर कोई व्यक्ति रोज देर रात तक ऑफिस में बैठा रहता है, तो इसे मेहनत की निशानी नहीं मानी जाती. कई बार इसे खराब टाइम मैनेजमेंट या जरूरत से ज्यादा काम का संकेत समझा जाता है.
पर्सनल लाइफ के लिए मिलता है काफी समय
सिमरन ने छुट्टियों को लेकर भी एक दिलचस्प बात बताई. उन्होंने कहा कि स्विट्जरलैंड में कर्मचारियों को अपनी छुट्टियां जरूर लेने के लिए कहा जाता है. कई बार मैनेजर खुद कर्मचारियों को याद दिलाते हैं कि वे कुछ दिन आराम करें. वहां छुट्टी लेना काम के प्रति लापरवाही नहीं माना जाता, बल्कि यह माना जाता है कि आराम करने से कर्मचारी बेहतर तरीके से काम कर पाएंगे. उन्होंने यह भी बताया कि ऑफिस खत्म होने के बाद कर्मचारियों की निजी जिंदगी का सम्मान किया जाता है. अगर कोई बड़ी इमरजेंसी न हो तो ऑफिस के बाद कॉल, मैसेज या काम से जुड़ी बातचीत नहीं की जाती. इससे लोगों को परिवार और अपनी पर्सनल लाइफ के लिए पूरा समय मिल जाता है.
एक और खास बात यह है कि वहां कर्मचारी अपने मैनेजर से खुलकर अपनी राय रख सकते हैं. अगर किसी कर्मचारी के पास सही तथ्य और मजबूत तर्क हैं तो वह अपने बॉस से भी असहमति जता सकता है. इसे गलत नहीं माना जाता, बल्कि अच्छे विचार-विमर्श का हिस्सा समझा जाता है. स्विस ऑफिस में कर्मचारियों को बिना रुकावट काम करने का समय भी दिया जाता है. अगर किसी को किसी जरूरी प्रोजेक्ट पर ध्यान देना है तो वह अपने कैलेंडर में वह समय ब्लॉक कर सकता है. उस दौरान उससे बार-बार मीटिंग या दूसरे काम की उम्मीद नहीं की जाती. अगर किसी कर्मचारी पर जरूरत से ज्यादा काम है तो वह अपने मैनेजर को खुलकर बता सकता है. इसे शिकायत नहीं बल्कि जिम्मेदार व्यवहार माना जाता है. इससे समय रहते काम बांटा जा सकता है और कर्मचारी पर बेवजह दबाव नहीं पड़ता.
हर कर्मचारी को मिलता है सम्मान
सिमरन ने यह भी बताया कि वहां बड़े अधिकारियों और बाकी कर्मचारियों के बीच बहुत ज्यादा दूरी नहीं होती. अगर किसी कंपनी का सीईओ कैफेटेरिया में कर्मचारियों के साथ लाइन में खड़ा दिखाई दे, तो इसे बिल्कुल सामान्य बात माना जाता है. वहां पद से ज्यादा इंसान को महत्व दिया जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि इंटर्न या जूनियर कर्मचारियों से कभी भी सीनियर अधिकारियों के निजी काम नहीं कराए जाते. उनसे चाय या कॉफी बनवाने या निजी सामान लाने जैसी उम्मीद नहीं की जाती. सभी लोग अपनी-अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं और हर कर्मचारी का सम्मान किया जाता है.
सिमरन की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई. कई लोगों ने कहा कि भारत में लंबे समय तक काम करने के बाद ऐसा वर्क कल्चर किसी सपने जैसा लगता है. वहीं कुछ लोगों का मानना था कि हर देश का अपना वर्क कल्चर होता है, लेकिन कर्मचारियों की निजी जिंदगी, समय और सम्मान का ध्यान रखना हर कंपनी की प्राथमिकता होनी चाहिए. इस पोस्ट ने एक बार फिर यह चर्चा शुरू कर दी है कि अच्छा वर्क कल्चर सिर्फ ज्यादा सैलरी से नहीं बनता, बल्कि कर्मचारियों को सम्मान देने, उनके समय की कद्र करने और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस देने से बनता है.