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खत्म हो रही है अमेरिका-रूस की न्यूक्लियर ट्रीटी, अब क्या START होगी परमाणु हथियारों की रेस

अमेरिका-रूस की न्यू स्टार्ट संधि समाप्त हो रही है. 2010 में हस्ताक्षरित यह संधि 1550 तैनात वॉरहेड और 700 डिलीवरी व्हीकल्स तक सीमित रखती थी. रूस ने यूक्रेन युद्ध के कारण अपनी भागीदारी निलंबित की. इससे नई हथियार दौड़ शुरू हो सकती है. पारदर्शिता कम होगी और वैश्विक अस्थिरता बढ़ेगी. संयुक्त राष्ट्र ने परमाणु जोखिम की चेतावनी दी है.

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अमेरिका और रूस में हुई न्यू स्टार्ट न्यूक्लियर संधि खत्म हो रही है. (Photo: ITG)
अमेरिका और रूस में हुई न्यू स्टार्ट न्यूक्लियर संधि खत्म हो रही है. (Photo: ITG)

अमेरिका और रूस के बीच 2010 में हुई न्यू स्टार्ट (New START) संधि 5 फरवरी 2026 (भारतीय समयानुसार 6 फरवरी 2026) को खत्म हो रही है. यह संधि दोनों देशों के परमाणु हथियारों को सीमित रखती थी लेकिन अब इसका अंत एक नई हथियार दौड़ (Arms Race) को जन्म दे सकता है.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख और हथियार नियंत्रण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे वैश्विक सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. दुनिया में अस्थिरता बढ़ सकती है. आइए समझते हैं कि यह संधि क्या थी, क्यों खत्म हो रही है और दुनिया पर इसका क्या प्रभाव होगा.

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न्यू स्टार्ट संधि क्या थी?

  • न्यू स्टार्ट संधि 2010 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने हस्ताक्षर किए थे.
  • यह संधि दोनों देशों को 1550 तैनात परमाणु वॉरहेड और 700 डिलीवरी व्हीकल्स (जैसे मिसाइलें, सबमरीन और बॉम्बर्स) तक सीमित रखती थी.
  • इसमें सत्यापन (वेरिफिकेशन) के नियम थे, जैसे एक-दूसरे के ठिकानों का निरीक्षण, ताकि दोनों पक्ष नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं, यह पता चल सके. 
  • संधि का उद्देश्य परमाणु हथियारों की दौड़ को रोकना और विश्व शांति बनाए रखना था.

यह संधि शीत युद्ध के बाद की आखिरी बड़ी परमाणु नियंत्रण संधि थी, जो 2021 में अंतिम बार बढ़ाई गई थी.

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New START expiration

संधि क्यों खत्म हो रही है?

  • कोविड और यूक्रेन युद्ध का असर: महामारी के दौरान सत्यापन प्रक्रिया रुकी. यूक्रेन युद्ध के कारण तनाव बढ़ा.
  • रूस का फैसला: 2023 में रूस ने संधि से भागीदारी निलंबित कर दी, क्योंकि अमेरिका यूक्रेन को समर्थन दे रहा था. रूस ने कहा कि यह संधि अब उसके हितों के खिलाफ है.
  • अमेरिका की राय: ट्रंप प्रशासन ने इसे पुराना बताया क्योंकि चीन का परमाणु जखीरा बढ़ रहा है. अमेरिका चाहता था कि चीन को भी शामिल किया जाए, लेकिन चीन ने मना कर दिया. दोनों देशों ने संधि की मियाद खत्म होने तक नियमों का पालन किया, लेकिन अब कोई नई बातचीत नहीं हुई.

दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?

न्यू स्टार्ट के खत्म होने से परमाणु हथियारों पर कोई अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं रहेगी. विशेषज्ञों के अनुसार, इसके कई गंभीर प्रभाव हो सकते हैं...

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नई हथियार दौड़ का खतरा

अमेरिका और रूस (दुनिया के 90% परमाणु हथियारों के मालिक) अब बिना सीमा के हथियार बढ़ा सकते हैं. रूस के पास पहले से 5889 वॉरहेड हैं. अमेरिका के पास 5244. इससे दोनों देश ज्यादा मिसाइलें, सबमरीन और बॉम्बर्स बना सकते हैं. 

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चीन भी अपनी क्षमता बढ़ा रहा है, जो 2030 तक 1000 वॉरहेड तक पहुंच सकता है. इससे तीनों महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बोझ डालेगी. क्योंकि हथियार बनाने में अरबों डॉलर लगते हैं.

New START expiration

सुरक्षा और पारदर्शिता में कमी

सत्यापन के बिना, दोनों देश एक-दूसरे की गतिविधियों पर नजर नहीं रख सकेंगे. इससे गलतफहमी बढ़ सकती है, जैसे कोई देश दूसरे के हथियारों को गलत समझकर हमला कर दे. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि इससे परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ेगा. दुनिया पहले से ही यूक्रेन, मध्य पूर्व और ताइवान जैसे तनावों से जूझ रही है.

वैश्विक स्थिरता पर असर

  • छोटे देशों (जैसे भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया) के परमाणु कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं. अगर बड़े देश हथियार बढ़ाएंगे, तो अन्य देश भी ऐसा कर सकते हैं.
  • पर्यावरण और स्वास्थ्य जोखिम: ज्यादा हथियारों से परीक्षण बढ़ सकते हैं, जो रेडिएशन फैलाएंगे. परमाणु युद्ध की स्थिति में लाखों लोग मर सकते हैं. जलवायु परिवर्तन तेज हो सकता है.
  • आर्थिक प्रभाव: हथियार दौड़ से व्यापार, निवेश और ऊर्जा कीमतें प्रभावित होंगी. रूस और अमेरिका के बीच तनाव से तेल-गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं.

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अन्य देशों की भूमिका

चीन का न शामिल होना एक बड़ी समस्या है. अमेरिका चाहता है कि नई संधि में चीन शामिल हो, लेकिन चीन कहता है कि उसके हथियार कम हैं, इसलिए जरूरत नहीं. यूरोपीय देश (जैसे ब्रिटेन, फ्रांस) और नाटो चिंतित हैं, क्योंकि रूस का खतरा उनके लिए ज्यादा है. हथियार नियंत्रण समर्थक संगठन (जैसे आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन) कहते हैं कि बिना संधि के दुनिया खतरनाक अनिश्चितता में होगी.

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क्या कोई समाधान है?

विशेषज्ञों का कहना है कि नई वार्ताएं जरूरी हैं. बाइडेन प्रशासन ने रूस से बातचीत की पेशकश की थी, लेकिन यूक्रेन युद्ध के कारण नहीं हुई. अगर ट्रंप दोबारा सत्ता में आए तो वे चीन को शामिल करने पर जोर दे सकते हैं. लेकिन मौजूदा तनाव में नई संधि मुश्किल लगती है.

दुनिया को परमाणु अप्रसार संधि (NPT) जैसे अन्य समझौतों पर निर्भर रहना पड़ेगा. यह संधि का अंत वैश्विक शांति के लिए बड़ा झटका है. इससे साफ है कि परमाणु हथियारों का खतरा कभी भी बढ़ सकता है. दुनिया को मिलकर इसे रोकने की जरूरत है.

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