28 और 29 सितंबर 2016 की रात भारतीय सेना के कमांडो ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जाकर उरी हमले का बदला लिया. उन्होंने सात आतंकी शिविरों को निशाना बनाया. वहां मौजूद आतंकियों को मार गिराया. 18 सितंबर 2016 को जैश-ए-मोहम्मद के चार फिदाईन आतंकियों ने उरी में भारतीय सेना की 12वीं ब्रिगेड के प्रशासनिक शिविर पर हमला किया. इस हमले में 19 भारतीय जवान शहीद हो गए.
मौके पर मौजूद सैनिकों ने आतंकियों का मुकाबला किया और उन्हें मार गिराया. आतंकियों के पास से मिले हथियारों और जीपीएस सेट से उनके पाकिस्तान से संबंध का पता चला. बाद में दो स्थानीय गाइड पकड़े गए जिन्होंने बताया कि आतंकियों की घुसपैठ और मदद में पाकिस्तानी सेना शामिल थी. पूरे देश में गुस्सा फैल गया.
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21 सितंबर 2016 को तत्कालीन विदेश सचिव एस. जयशंकर ने पाकिस्तान के हाई कमिश्नर को तलब किया और उरी हमले में पाकिस्तान के शामिल होने के सबूत दिए. पाकिस्तान ने इन सबूतों को खारिज कर दिया. अगले दिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भड़काऊ भाषण दिया और हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी को हीरो बताया. इससे भारत और नाराज हो गया.
फिर हुआ जवाबी कार्रवाई का फैसला
इसके बाद भारत में उच्च स्तरीय बैठकें हुईं. तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह सुहाग और डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, एनएसए अजीत डोभाल और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को विकल्प बताए. फैसला लिया गया कि जवाबी कार्रवाई की जाए.

भारतीय सेना की पैरा स्पेशल फोर्स (पैरा एसएफ) को यह मिशन सौंपा गया. करीब 150 कमांडो तैयार किए गए. इनमें से 25 कमांडो ने मुख्य कार्रवाई की जबकि बाकी बैकअप के लिए नियंत्रण रेखा के पास तैनात रहे. 28-29 सितंबर की रात कमांडो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में करीब तीन किलोमीटर अंदर तक गए. उन्होंने आतंकी शिविरों पर हमला किया.
कमांडो ने पहले ग्रेनेड फेंके. फिर रात के अंधेरे में स्मोक ग्रेनेड और नाइट विजन की मदद से आतंकियों को निशाना बनाया. इस कार्रवाई में 38 आतंकी मारे गए. साथ ही पाकिस्तानी सेना के दो जवान भी मारे गए. बारूदी सुरंग से दो भारतीय जवान घायल हुए लेकिन किसी भारतीय जवान की मौत नहीं हुई. पूरा मिशन करीब चार घंटे में पूरा हुआ.
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सुबह प्रधानमंत्री समेत वरिष्ठ अधिकारियों को मिशन की सफलता की जानकारी दी गई. यह भारत की ओर से पहली बार इस तरह की सर्जिकल स्ट्राइक थी. पाकिस्तान इस कार्रवाई को लेकर कुछ कह या कर नहीं पाया. दुनियाभर में भारत के इस कदम पर चर्चा हुई.
यह घटना उरी हमले में शहीद हुए 19 जवानों के बलिदान का जवाब थी. भारतीय सेना ने सीमा पार जाकर आतंकी ठिकानों को नष्ट किया और साफ संदेश दिया कि आतंक के खिलाफ कड़ा जवाब दिया जाएगा.