उत्तर कोरिया ने एक बार फिर दुनिया को चौंकाते हुए नए हथियार विकसित करने का दावा किया है. बुधवार को उत्तर कोरियाई न्यूज एजेंसी ने बताया कि किम जोंग उन ने मंगलवार को कई नए हथियारों का परीक्षण किया. इनमें न्यूक्लियर (परमाणु) क्षमता वाला क्रूज मिसाइल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से चलने वाली मिसाइल और नई वॉरहेड वाली बैलिस्टिक मिसाइल शामिल हैं.
उत्तर कोरिया की आधिकारिक समाचार एजेंसी KCNA ने बताया कि किम जोंग उन ने खुद मंगलवार के परीक्षण का निरीक्षण किया. परीक्षण में शामिल हथियारों में 240 मिलीमीटर रॉकेट आर्टिलरी भी थी, जिसमें अल्ट्रा-प्रिसीजन नेविगेशन सिस्टम लगाया गया है. किम ने खासतौर पर न्यूक्लियर क्षमता वाले क्रूज मिसाइलों की परफॉर्मेंस से संतुष्टि जताई.
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उन्होंने कहा कि इन मिसाइलों को दक्षिण कोरिया की सीमा के पास तैनात फ्रंटलाइन यूनिट्स में जल्दी से जल्दी लगाया जाना चाहिए. किम का निर्देश है कि आर्टिलरी बल को इतना मजबूत बनाया जाए कि कोई भी उसका मुकाबला न कर सके.

दक्षिण कोरिया का दावा
दक्षिण कोरिया की सेना ने एक दिन पहले ही बताया था कि उत्तर कोरिया ने कई प्रोजेक्टाइल दागे, जिनमें कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल भी शामिल थी. इस मिसाइल ने करीब 80 किलोमीटर की दूरी तय की. हालांकि दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के नए हथियारों के दावों पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की.
2019 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ किम जोंग उन की कूटनीति विफल होने के बाद से उत्तर कोरिया ने अपने न्यूक्लियर और मिसाइल कार्यक्रम को तेज गति से बढ़ाया है. किम ने दक्षिण कोरिया को अपना सबसे बड़ा दुश्मन देश घोषित कर दिया है. दोनों देशों के बीच पुराने संबंधों को लगभग खत्म कर दिया है.
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हाल ही में सैन्य कमांडरों की बैठक में किम ने सीमा को अभेद्य किला बनाने का लक्ष्य रखा है. वे लगातार फ्रंटलाइन यूनिट्स को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं.
उत्तर कोरिया के पास कितने वैज्ञानिक हैं?
उत्तर कोरिया एक छोटा देश है, फिर भी उसके पास परमाणु हथियार, मिसाइल और अब AI वाली टेक्नोलॉजी विकसित करने वाले वैज्ञानिकों की एक बड़ी टीम है. अनुमान है कि उत्तर कोरिया के पास हजारों वैज्ञानिक और इंजीनियर काम कर रहे हैं, जो मुख्य रूप से परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम के लिए हैं.

ये वैज्ञानिक मुख्य रूप से पूर्व सोवियत संघ और चीन से ट्रेनिंग प्राप्त कर चुके हैं. देश में एक खास संस्थान - मुन्सु है जहां परमाणु हथियारों पर काम होता है. हालांकि सटीक संख्या गुप्त है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि उत्तर कोरिया ने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद दुनिया के सबसे उन्नत हथियार कार्यक्रमों में से एक विकसित कर लिया है.
इतना पैसा कहां से आ रहा है?
यह सबसे बड़ा सवाल है. उत्तर कोरिया पर भारी आर्थिक प्रतिबंध लगे हुए हैं, फिर भी वह हथियार कार्यक्रम पर अरबों डॉलर खर्च कर रहा है. मुख्य स्रोत हैं...
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ट्रंप फिर बातचीत चाहते हैं, लेकिन...
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि वे किम जोंग उन के साथ फिर से बातचीत करना चाहते हैं. लेकिन उत्तर कोरिया ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका परमाणु हथियार छोड़ने की शर्त नहीं हटाता, तब तक बातचीत नहीं होगी. किम अब रूस और चीन की तरफ ज्यादा झुके हुए हैं. अमेरिका को दुश्मन मानते हैं.
उत्तर कोरिया के इन परीक्षणों से दक्षिण कोरिया और पूरे पूर्वी एशिया में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. विशेष रूप से न्यूक्लियर क्षमता वाले क्रूज मिसाइल का फ्रंटलाइन यूनिट्स में तैनात होना दक्षिण कोरिया के लिए बड़ा खतरा है. दक्षिण कोरिया और अमेरिका अब संयुक्त सैन्य अभ्यास बढ़ा रहे हैं. उत्तर कोरिया पर नए प्रतिबंध लगाने की बात कर रहे हैं.
उत्तर कोरिया का बार-बार नया हथियार बनाने का दावा दिखाता है कि किम जोंग उन अपने देश को परमाणु शक्ति के रूप में और मजबूत बनाना चाहते हैं. सीमित संसाधनों के बावजूद हजारों वैज्ञानिकों की मेहनत, रूस-चीन से मिली मदद और गुप्त तरीकों से जुटाया पैसा इस कार्यक्रम को चलाए हुए है.