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क्या ईरान के पिकेक्स पहाड़ पर अमेरिका गिराएगा B61-11 न्यूक्लियर बंकर बस्टर बम, जानिए एक्सपर्ट का दावा

अमेरिकी परमाणु बम B61-11 एक खास बंकर बस्टर बम है, जिसे अंडरग्राउंड सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है. ईरान केपिकेक्स माउंटेन को लेकर इसकी चर्चा तेज है, लेकिन ट्रंप प्रशासन के परमाणु हमले की तैयारी का कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं है.

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ये है अमेरिका B61-11 Nuclear Bomb. जिसके इस्तेमाल की चर्चा हो रही है. (Photo: Getty)
ये है अमेरिका B61-11 Nuclear Bomb. जिसके इस्तेमाल की चर्चा हो रही है. (Photo: Getty)

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच एक बार फिर अमेरिकी परमाणु हथियार B61-11 चर्चा में आ गया है. इसकी वजह है ईरान के नतांज परमाणु केंद्र के पास स्थित , जिसे ईरान का एक बेहद सुरक्षित और अंडरग्राउंड परमाणु ठिकाना माना जाता है. अमेरिकी एनालिस्ट टकर कार्लसन ने दावा किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन ईरान पर परमाणु हमला करने से कुछ ही दिन दूर है. 

हालांकि, उनके इस दावे की किसी अमेरिकी सरकारी अधिकारी ने पुष्टि नहीं की है. इस पूरे विवाद में B61-11 परमाणु बम का नाम इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि इसे खास तौर पर जमीन के नीचे मौजूद मजबूत सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता पिकेक्स माउंटेन के लिए विकसित किया गया था.

क्या वास्तव में अमेरिका इस बम का इस्तेमाल करके ईरान केपिकेक्स माउंटेन को नष्ट कर सकता है? क्या B61-11 इतना शक्तिशाली है कि सैकड़ों मीटर नीचे मौजूद अंडरग्राउंड ठिकानों को तबाह कर सके? इस हथियार की तकनीक, वास्तविक क्षमता, इसकी सीमाएं और परमाणु हमले के संभावित परिणामों को समझना जरूरी है.

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टकर कार्लसन ने क्या दावा किया?

अमेरिकी राजनीतिक एनालिस्ट टकर कार्लसन ने 2 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में दावा किया कि ट्रंप प्रशासन ईरान पर परमाणु हमला करने से कुछ ही दिन दूर हो सकता है. उन्होंने अपने दावे के समर्थन में एक ऐसे व्यक्ति का हवाला दिया, जिसे उन्होंने जानकारी रखने वाला एक्टपर्ट बताया. हालांकि, उन्होंने न तो उस व्यक्ति की पहचान बताई और न ही कोई दस्तावेज या आधिकारिक सबूत पेश किया.

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कार्लसन का दावा था कि ईरान के पिकेक्स माउंटेन में मौजूद अंडरग्राउंड ठिकाने को पारंपरिक हथियारों से नष्ट करना बेहद मुश्किल है. उनके मुताबिक, लगभग 300 फीट ग्रेनाइट चट्टान के नीचे मौजूद ठिकाने तक सामान्य बम नहीं पहुंच सकते और ऐसी स्थिति में परमाणु हमला ही एकमात्र सैन्य विकल्प हो सकता है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ट्रंप 7 नवंबर तक इस संबंध में फैसला ले सकते हैं.

हालांकि, इस दावे को प्रमाणित जानकारी नहीं माना जा सकता. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 15 अक्टूबर को Newsmax के साथ बातचीत में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना को खारिज करते हुए कहा था कि इसकी जरूरत नहीं है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि अमेरिका के पास मौजूद Mother of All Bombs परमाणु बम नहीं है. अभी तक अमेरिकी सरकार या इजरायल की ओर से पिकेक्स माउंटेन पर परमाणु हमले की किसी योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

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क्या है B61-11 परमाणु बम?

B61-11 अमेरिका के B61 परमाणु बम परिवार का एक खास वर्जन है. इसे जमीन के नीचे मौजूद मजबूत सैन्य ठिकानों, अंडरग्राउंड कमांड सेंटर और बंकरों को निशाना बनाने की भूमिका के लिए विकसित किया गया था. इसकी सबसे खास बात इसका मजबूत बाहरी ढांचा और खास फ्यूज प्रणाली है, जिसकी मदद से यह जमीन से टकराने के बाद विस्फोट करने के लिए बनाया गया है.

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B61-11 Nuclear Bomb

B61 परमाणु बम परिवार का इतिहास 1960 के दशक तक जाता है. B61-11 को पुराने B61-7 मॉडल में बदलाव करके तैयार किया गया था. Bulletin of the Atomic Scientists के अनुसार, इसे 1997 में अमेरिकी सैन्य सेवा में शामिल किया गया था. इसने पुराने B53 परमाणु बम की अंडरग्राउंड ठिकानों को नष्ट करने वाली भूमिका संभाली.

नेशनल रिसर्च काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, इस बम का वजन लगभग 549 kg है. इसके कुल उत्पादन की संख्या करीब 50 बताई जाती है. हालांकि, इसकी वास्तविक परमाणु विस्फोट क्षमता सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है. कुछ ओपन सोर्स में इसकी क्षमता लगभग 340 किलोटन तक बताई गई है, जबकि बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स ने 400 किलोटन बताया है.

इस अंतर से स्पष्ट होता है कि परमाणु हथियारों की वास्तविक तकनीकी जानकारी का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक नहीं किया जाता. इसलिए B61-11 की किसी भी क्षमता को लेकर उपलब्ध आंकड़ों को सावधानी से समझना चाहिए.

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जमीन के अंदर विस्फोट करने वाला परमाणु बम कैसे काम करता है?

आमतौर पर परमाणु बम हवा में या जमीन की सतह के आसपास विस्फोट करते हैं. ऐसे विस्फोट में ऊर्जा का बड़ा हिस्सा हवा, गर्मी और सतही दबाव के रूप में फैलता है. लेकिन अंडरग्राउंड बंकरों को निशाना बनाने के लिए विकसित किए गए परमाणु हथियारों की अवधारणा अलग है.

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B61-11 को Earth Penetrating Nuclear Weapon यानी जमीन में प्रवेश करने वाले परमाणु हथियार की श्रेणी में रखा जाता है. इसका मजबूत बाहरी आवरण इसे जमीन से टकराने के दौरान सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है. इसका उद्देश्य विस्फोट से पहले कुछ गहराई तक जमीन में प्रवेश करना है.

जमीन के भीतर होने वाला विस्फोट आसपास की चट्टानों और मिट्टी में शक्तिशाली झटका पैदा कर सकता है. यह झटका अंडरग्राउंड सुरंगों और संरचनाओं को नुकसान पहुंचा सकता है. इसका मतलब यह नहीं है कि बम सीधे किसी अंडरग्राउंड ठिकाने तक पहुंचता है.

नेशनल एकेडेमिक्स की स्टडी के अनुसार, लगभग 3 मीटर की गहराई पर होने वाला परमाणु विस्फोट जमीन के भीतर झटका पैदा करने के लिहाज से काफी प्रभावी हो सकता है. इस तरह की व्यवस्था से किसी गहरे अंडरग्राउंड टारगेट को नष्ट करने के लिए जरूरी परमाणु क्षमता में 15 से 25 गुना तक कमी आ सकती है. यह थ्योरेटिकल एनालिसिस है, किसी वास्तविक टारगेट पर सफलता की गारंटी नहीं.

क्या B61-11 सैकड़ों फीट जमीन में घुस सकता है?

B61-11 को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी इसकी जमीन में प्रवेश करने की क्षमता को लेकर है. कई लोग मानते हैं कि यह बम सैकड़ों फीट नीचे जाकर विस्फोट कर सकता है, लेकिन मौजूद जानकारियां ऐसा नहीं बताती.

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अमेरिकी वायुसेना के अनुसार, इसके खास बाहरी आवरण के कारण यह जमीन में लगभग 15 से 25 फीट तक प्रवेश कर सकता है. अलास्का में किए गए परीक्षणों में इसके परीक्षण मॉडल जमी हुई जमीन में लगभग 6 और 10 फीट तक पहुंचे थे.

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इसका मतलब है कि B61-11 को किसी अंडरग्राउंड परमाणु केंद्र तक सीधे पहुंचने वाला हथियार नहीं समझना चाहिए. इसकी भूमिका जमीन के भीतर विस्फोट के जरिए आसपास की संरचनाओं में शक्तिशाली झटका पैदा करने की है.

इसकी वास्तविक प्रभावशीलता कई बातों पर निर्भर करती है. इनमें जमीन की बनावट, चट्टानों की मजबूती, विस्फोट की स्थिति और अंडरग्राउंड ढांचे की वास्तविक संरचना शामिल हैं. इसलिए केवल बम की घोषित क्षमता के आधार पर किसी खास ठिकाने को नष्ट करने का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा.

पिकेक्स माउंटेन क्यों बना परमाणु हमले की चर्चा का केंद्र?

ईरान का पिकेक्स माउंटेन, जिसे फारसी में Kuh-e Kolang Gaz La कहा जाता है, नतांज परमाणु केंद्र के दक्षिण में स्थित है. इसे ईरान के संवेदनशील परमाणु बुनियादी ढांचे से जुड़ी एक महत्वपूर्ण अंडरग्राउंड जगह माना जाता है.

बीबीसी वेरिफाई और इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी के अनुसार, इस स्थान पर मौजूद अंडरग्राउंड ढांचे का मुख्य हिस्सा जमीन से लगभग 100 मीटर नीचे हो सकता है. वास्तविक गहराई, आंतरिक बनावट और वहां मौजूद सुविधाओं की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं है.

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B61-11 Nuclear Bomb

ईरान ने अपने संवेदनशील परमाणु बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए इस तरह के अंडरग्राउंड ठिकानों का निर्माण किया है. इजरायल को आशंका है कि ईरान ने यहां यूरेनियम संवर्धन से जुड़ी सेंट्रीफ्यूज मशीनें स्थानांतरित की हैं. दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि इस स्थान पर कोई परमाणु गतिविधि नहीं हो रही है.

यही वजह है कि पिकेक्स माउंटेन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है. यदि वहां वास्तव में संवेदनशील परमाणु सुविधाएं मौजूद हैं, तो किसी पारंपरिक सैन्य हमले के लिए उन्हें पूरी तरह नष्ट करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

क्या B61-11 पिकेक्स माउंटेन को नष्ट कर सकता है?

यही इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है. नेशनल एकेडेमिक्स के पुराने तकनीकी विश्लेषण में बताया गया है कि लगभग 300 किलोटन क्षमता वाला जमीन में प्रवेश करने वाला परमाणु हथियार ग्रेनाइट में मौजूद अंडरग्राउंड सुरंगों को लगभग 150 मीटर की गहराई तक गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. 

कुछ परिस्थितियों में कठोर अंडरग्राउंड लक्ष्यों के लिए लगभग 200 मीटर तक की सैद्धांतिक सीमा का भी जिक्र है. लेकिन इन आंकड़ों को पिकेक्स माउंटेन के लिए निश्चित परिणाम नहीं माना जा सकता. यह एक मॉडल आधारित विश्लेषण है, न कि ईरान के इस ठिकाने पर किए गए किसी वास्तविक परीक्षण का नतीजा.

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इसके अलावा, पिकेक्स माउंटेन के अंदर कितनी गहराई पर वास्तविक सुविधाएं हैं, वहां किस तरह की चट्टान मौजूद है और अंडरग्राउंड संरचना कितनी मजबूत है, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं है. B61-11 की वास्तविक विस्फोट क्षमता भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है.

इसलिए यह कहना गलत होगा कि अमेरिका इस बम के इस्तेमाल से पिकेक्स माउंटेन को निश्चित रूप से नष्ट कर सकता है. खासज्ञों के लिए भी किसी वास्तविक सैन्य परिणाम का अनुमान लगाना मुश्किल है.

B61-11 और GBU-57 में क्या अंतर है?

अमेरिका के पास अंडरग्राउंड ठिकानों को निशाना बनाने के लिए एक शक्तिशाली पारंपरिक बम भी है, जिसे GBU-57 Massive Ordnance Penetrator यानी MOP कहा जाता है. यह परमाणु बम नहीं है, बल्कि पारंपरिक विस्फोटक से लैस एक भारी बम है.

GBU-57 का वजन लगभग 30,000 पाउंड है. यह लगभग 18 मीटर कंक्रीट या 61 मीटर मिट्टी तक प्रवेश करने में सक्षम माना जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य बेहद मजबूत अंडरग्राउंड संरचनाओं को निशाना बनाना है.

इसके मुकाबले B61-11 का वजन काफी कम है. इसकी जमीन में प्रवेश करने की क्षमता भी सीमित है. लेकिन दोनों हथियारों के बीच सबसे बड़ा अंतर उनकी विस्फोटक प्रकृति का है. GBU-57 पारंपरिक विस्फोटक इस्तेमाल करता है, जबकि B61-11 परमाणु हथियार है.

GBU-57 जैसे पारंपरिक हथियार भी पिकेक्स माउंटेन के पूरे अंडरग्राउंड ढांचे को नष्ट करने में सक्षम होंगे या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है. हालांकि, किसी सैन्य ठिकाने के प्रवेश मार्ग, वेंटिलेशन सिस्टम और सड़क संपर्क को नुकसान पहुंचाने से उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है.

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B61-12 और B61-13 से कितना अलग है B61-11?

B61-11 के अलावा अमेरिका के पास B61-12 और B61-13 जैसे आधुनिक परमाणु बम भी हैं. इनका विकास अमेरिकी परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है.

B61-12 को पुराने B61-3, B61-4 और B61-7 संस्करणों के स्थान पर लाने के लिए विकसित किया गया है. इसमें आधुनिक गाइडेंस तकनीक और लाइफ एक्सटेंशन सुधार शामिल हैं. हालांकि, इसके बाहरी शेल में B61-11 जैसी खास जमीन में प्रवेश करने वाली मजबूती नहीं है.

वहीं B61-13 को अधिक शक्तिशाली और आधुनिक निर्देशित परमाणु बम के रूप में विकसित किया गया है. अमेरिकी नेशनल न्यूक्लियर सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन के अनुसार, इसकी पहली इकाई मई 2025 में पूरी की गई थी. इसके उत्पादन की संख्या कुछ दर्जन तक सीमित रखने की योजना बताई गई है.

B61-11 Nuclear Bomb
 
B-2 Spirit बॉम्बर से गिराया जाता है B61-11

B61-11 को ले जाने और गिराने के लिए अमेरिका का B-2 Spirit स्टील्थ बॉम्बर है. यह विमान दुश्मन के हवाई सुरक्षा तंत्र से बचते हुए संवेदनशील लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए बनाया गया है. 17 मार्च 1998 को B-2 विमान से B61-11 के दो परीक्षण मॉडल अलास्का में गिराए गए थे.  

इसके बाद भी इस हथियार से जुड़े परीक्षण होते रहे. 2011 में नेशनल न्यूक्लियर सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने B-2 से B61-11 का एक परीक्षण असेंबली उड़ाया था, जिसमें परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी. 2013 में Sandia National Laboratories ने एक टेस्टिंग यूनिट का इस्तेमाल किया.

इन परीक्षणों का उद्देश्य हथियार की तकनीकी विश्वसनीयता का आकलन करना था. इनसे यह साबित नहीं होता कि किसी वास्तविक परमाणु हमले में किसी खास अंडरग्राउंड लक्ष्य को निश्चित रूप से नष्ट किया जा सकता है.

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परमाणु हमले का सबसे बड़ा खतरा, कितना फैलेगा रेडिएशन 

B61-11 जैसे हथियार की चर्चा में केवल सैन्य क्षमता पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है. इसके संभावित मानवीय और पर्यावरणीय परिणाम कहीं अधिक गंभीर हो सकते हैं. एक सामान्य परमाणु विस्फोट की तरह जमीन के भीतर प्रवेश करने वाले परमाणु बम का विस्फोट भी भारी गर्मी, दबाव और रेडियोधर्मी पदार्थ पैदा कर सकता है. चूंकि ऐसे हथियार जमीन में सीमित गहराई तक ही पहुंचते हैं, इसलिए विस्फोट पूरी तरह अंडरग्राउंड नहीं रहता.

इस तरह के हथियारों से होने वाला विस्फोट पूरी तरह जमीन के भीतर सीमित नहीं किया जा सकता. इसके कारण रेडियोधर्मी पदार्थ वातावरण में फैल सकते हैं. हवा की दिशा, विस्फोट की क्षमता और मौसम के आधार पर रेडियोएक्टिविटी  यानी रेडियोधर्मी कण दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच सकते हैं.

इसका असर केवल सैन्य ठिकाने तक सीमित नहीं रहेगा. आसपास रहने वाली आबादी, कृषि भूमि, जल स्रोत और पर्यावरण भी गंभीर खतरे में आ सकते हैं. संभावित मौतों की संख्या सैकड़ों से लेकर लाखों तक हो सकती है, हालांकि यह विस्फोट की क्षमता, स्थान और मौसम जैसी परिस्थितियों पर निर्भर करेगी.

क्या ट्रंप वास्तव में परमाणु हमले का आदेश दे सकते हैं?

अमेरिका के राष्ट्रपति के पास परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से जुड़ा सर्वोच्च सैन्य अधिकार होता है. लेकिन किसी हथियार का सैन्य भंडार में मौजूद होना और उसका वास्तविक इस्तेमाल किए जाने का फैसला होना दो अलग बातें हैं.

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अभी तक सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान केपिकेक्स माउंटेन पर B61-11 के इस्तेमाल का फैसला किया है. न ही अमेरिकी रक्षा विभाग या National Nuclear Security Administration ने ऐसी किसी योजना की पुष्टि की है.

इसके अलावा, परमाणु हथियार का इस्तेमाल केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं होगा. इससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति, अमेरिका के सहयोगियों, ईरान की संभावित प्रतिक्रिया और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था पर दूरगामी असर पड़ सकता है.

1945 के बाद किसी युद्ध में परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं हुआ है. इस वजह से परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर एक वैश्विक राजनीतिक और नैतिक निषेध विकसित हुआ है. यदि अमेरिका ईरान के खिलाफ ऐसा कदम उठाता है, तो इसका प्रभाव मध्य पूर्व से कहीं आगे तक जा सकता है.

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