भोपाल के ट्विशा शर्मा डेथ केस में CBI की चार्जशीट में कई गंभीर दावे सामने आए हैं. जांच एजेंसी के मुताबिक, शादी के बाद ट्विशा को कई मौकों पर मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा. जिसके पीछे आरोपी समर्थ सिंह था. चार्जशीट में कहा गया है कि आरोपी गिरिबाला सिंह भी कथित तौर पर अपने बेटे को उकसाती थीं और जब ट्विशा शिकायत करती थीं तो उसका पक्ष नहीं लिया जाता था.
मार्च 2026 में पिता को हार्ट अटैक आने के दौरान भी ट्विशा मानसिक दबाव में थी, ऐसा CBI जांच में सामने आने का दावा है. जांच के मुताबिक, 16 अप्रैल को ट्विशा ने प्रेग्नेंसी टेस्ट किया और 17 अप्रैल को हजेला अस्पताल में गर्भावस्था की पुष्टि हुई. वह गर्भावस्था जारी रखने या नहीं रखने को लेकर समय चाहती थीं, क्योंकि CBI के अनुसार वह वैवाहिक तनाव और कथित दुर्व्यवहार से परेशान थीं. इसी मुद्दे पर 17 अप्रैल को पति से विवाद हुआ और इसके बाद ट्विशा ससुराल छोड़कर अपने मायके चली गईं.
CBI के मुताबिक, 19 अप्रैल को नसीराबाद पहुंचने के बाद ट्विशा ने माता-पिता को ससुराल में लगातार मानसिक दबाव की बात बताई. चार्जशीट के अनुसार, सास उनकी प्रेग्नेंसी और पीरियड्स को लेकर लगातार सवाल करती थीं और इस बात को लेकर विवाद भी हुआ. ट्विशा ने अपने पति पर नशे की लत होने की बात भी कही और गर्भावस्था के दौरान बच्चे की सेहत को लेकर चिंता जताई.
जांच में यह भी सामने आया कि ट्विशा के DEMAT अकाउंट में करीब 20 लाख रुपये के इक्विटी निवेश थे और CBI के अनुसार दोनों आरोपियों ने यह रकम संयुक्त खाते में ट्रांसफर करने का दबाव बनाया, लेकिन ट्विशा ने इनकार कर दिया क्योंकि वह रकम अपने पिता की बताती थीं. नौकरी जाने के बाद कथित तौर पर पति की ओर से उनकी नौकरी और अंग्रेजी को लेकर भी ताने दिए जाते थे.
23 अप्रैल को ट्विशा अपनी मां, भाई और कजिन के साथ ससुराल गईं, जहां उन्होंने भोपाल में रहने से इनकार करते हुए नौकरी तलाशने के लिए नोएडा जाने का फैसला किया. 29 अप्रैल को गुरुग्राम में पूर्व नियोक्ता अमित दास से मुलाकात में भी उन्होंने नौकरी की जरूरत और ससुराल में अपने साथ हो रहे व्यवहार को लेकर चिंता जताई.
30 अप्रैल को भोपाल लौटने के बाद ट्विशा ने अपनी मां को मैसेज कर तबीयत खराब होने, एंग्जायटी और जिंदगी नरक जैसी लगने की बात बताई, ऐसा चार्जशीट में दर्ज है. उसी दिन वह पति के साथ बंसल अस्पताल गईं, जहां उन्होंने गर्भावस्था जारी नहीं रखने की इच्छा जताई और डॉक्टर ने सहमति के बाद MTP दवाएं लिखीं.
CBI के मुताबिक, इसके बाद मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी से काउंसलिंग हुई, जहां ट्विशा गर्भावस्था को लेकर तनाव और असमंजस में थीं और उन्हें कुछ दिनों की एंटी-एंग्जायटी दवाएं दी गईं. 6 मई को उन्होंने डॉक्टर से कहा कि उन्होंने शांत मन से गर्भपात का फैसला लिया है और इसी दिन उन्हें DADB German Academy of Digital Education से दोबारा नौकरी का ऑफर भी मिला, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया.
6 मई को उन्होंने MTP की पहली डोज ली और 7 मई को मां को कई मैसेज भेजकर पति के व्यवहार, रिश्ते को लेकर डर और मायके लौटने की इच्छा जताई. 7 मई को वह गिरिबाला सिंह के साथ डॉक्टर के पास गईं, लेकिन डॉक्टर ने गर्भावस्था वापस शुरू करना संभव नहीं बताया और दूसरी MTP डोज लेने की सलाह दी. CBI के अनुसार, उसी दिन डॉ. काकौली रॉय के सामने ट्विशा ने बताया कि परिवार गर्भावस्था जारी रखने के लिए दबाव बना रहा है और वह इस स्थिति से भावनात्मक रूप से बेहद परेशान हैं. 8 मई को उन्होंने MTP की दूसरी डोज ली और इसके बाद दर्द व ब्लीडिंग की शिकायत भी की.
9 से 12 मई के बीच ट्विशा के मैसेज और बातचीत को CBI ने चार्जशीट में अहम साक्ष्य के तौर पर दर्ज किया है. जांच के मुताबिक, ट्विशा ने मां और अपनी ननद रश्मि अबरोल को लगातार मानसिक प्रताड़ना, पति के कथित आक्रामक व्यवहार और ससुराल में घुटन की बात बताई तथा कई बार भोपाल छोड़कर नसीराबाद जाने की इच्छा जताई. 9 मई को उन्होंने पूर्व नियोक्ता अमित दास से भी संपर्क कर दिल्ली/नोएडा में काम करने की इच्छा जताई और बताया कि वह ससुराल में खुद को लगातार निगरानी में महसूस करती थीं.
11 मई को भी उन्होंने मां को लगातार तनाव और घुटन की शिकायत की. 12 मई को वह डॉ. काकौली रॉय के पास समर्थ के साथ कपल काउंसलिंग के लिए गईं, जहां समर्थ ने ट्विशा के व्यवहार और गर्भावस्था के बाद आए बदलावों की बात कही तथा डॉक्टर को अपने और ट्विशा के Marijuana सेवन के बारे में भी बताया.
CBI के अनुसार, डॉक्टर ने समर्थ को पत्नी की बात धैर्य से सुनने, उसे समय देने और Active Listening की सलाह दी, ताकि तनाव कम हो और दोनों Marijuana सेवन छोड़ सकें. उसी शाम ट्विशा ने पति पर अपने निवेश को ट्रांसफर करने का दबाव बनाने का आरोप लगाया और बाद में कथित आक्रामक व्यवहार के बाद रश्मि को मैसेज कर बेहद निराशा जताई.
रात करीब 9:40 बजे CCTV में वह अकेले छत की ओर जाती दिखीं, 9:41 बजे उन्होंने पिता को फोन कर रोते हुए मदद की बात कही और करीब 10:05 बजे मां से भी बात की. इसके बाद CBI के अनुसार गिरिबाला और समर्थ छत की ओर गए और बाद में ट्विशा को नीचे लाया गया. उन्हें AIIMS भोपाल ले जाया गया, जहां रात करीब 10:55 बजे डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया.
13 मई की पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी बताया गया, जबकि परिवार के आरोपों के बाद 24 मई को AIIMS दिल्ली के मेडिकल बोर्ड ने दोबारा पोस्टमार्टम किया और मौत को एंटी-मॉर्टम हैंगिंग से हुई Asphyxia तथा आत्महत्या की प्रकृति का बताया. CBI के अनुसार, फोरेंसिक साइकोलॉजिकल असेसमेंट में ट्विशा के भीतर निराशा, लगातार मानसिक नुकसान और सहयोग की कमी के संकेत मिले.
एजेंसी ने यह भी कहा है कि उनका iPhone, घर के DVR का फोरेंसिक परीक्षण और आरोपियों की आवाज के नमूनों की जांच अभी लंबित है. चार्जशीट में CBI ने निष्कर्ष दिया है कि दोनों आरोपियों की कथित लगातार मानसिक क्रूरता ने ट्विशा को इस हद तक पहुंचा दिया कि उन्होंने 12 मई को छत पर जिम्नास्टिक बेल्ट/स्ट्रैप के सहारे फांसी लगा ली. CBI ने आरोपी गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 85, 108 और 3(5) के तहत अपराध का आरोप लगाया है और आगे की जांच की अनुमति भी मांगी है.