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त्रिपुरा में फर्जी सरकारी टेंडर के नाम पर 44 करोड़ की ठगी, ED ने 3 राज्यों में 13 ठिकानों पर मारे छापे

त्रिपुरा के फर्जी सरकारी टेंडर घोटाले में ED ने तीन राज्यों के 13 ठिकानों पर छापेमारी की. सस्पेंड IAS अधिकारी से जुड़े मामले में 44 करोड़ से ज्यादा की ठगी का आरोप है. जानें क्या है पूरा मामला.

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ED ने 3 राज्यों में 13 ठिकानों पर छापेमारी की (फाइल फोटो-ITG)
ED ने 3 राज्यों में 13 ठिकानों पर छापेमारी की (फाइल फोटो-ITG)

त्रिपुरा में फर्जी सरकारी टेंडर के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. ED के अगरतला सब-जोनल ऑफिस की टीम ने बुधवार को त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में कुल 13 ठिकानों पर सर्च और जब्ती अभियान चलाया. यह मामला त्रिपुरा कैडर के एक सस्पेंड IAS अधिकारी और उसके कथित सहयोगियों से जुड़ा है.

जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों पर फर्जी सरकारी टेंडर का झांसा देकर कई लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोप है. इस मामले में कुल धोखाधड़ी की रकम 44 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है.

ED ने गुरुवार को जारी बयान में बताया कि यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत की गई है. इस मामले में पश्चिम त्रिपुरा जिले के कैपिटल कॉम्प्लेक्स पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR को आधार बनाया गया है. यह FIR नागपुर की कंपनी मेसर्स एस.के. सेल्स कॉर्पोरेशन की शिकायत पर दर्ज हुई थी.

शिकायत में त्रिपुरा कैडर के एक निलंबित IAS अधिकारी और उसके कथित सहयोगियों को आरोपी बनाया गया है. ED अब इस मामले में पैसों के लेनदेन और उससे जुड़े नेटवर्क की जांच कर रही है.

शिकायतकर्ता कंपनी एसके सेल्स कॉर्पोरेशन ने आरोप लगाया कि उसे सरकारी टेंडर दिलाने के नाम पर धोखे से पैसे जमा करने के लिए प्रेरित किया गया. आरोप है कि सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच कंपनी से करीब 14.55 करोड़ रुपये बतौर बयाना राशि (EMD) जमा कराए गए. ये रकम कथित तौर पर मिड-डे मील और बिजली क्षेत्र से जुड़े सरकारी टेंडर के नाम पर ली गई थी.

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हालांकि, जांच एजेंसी के मुताबिक, जिन टेंडरों के लिए रकम जमा कराई गई, वे वास्तव में कभी जारी ही नहीं किए गए थे. इसी आरोप के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की.

ED की टीम ने बुधवार को सस्पेंड IAS अधिकारी के आवास पर भी तलाशी ली. इसके अलावा उत्तर त्रिपुरा के धर्मनगर सब-डिवीजन में कथित हवाला ऑपरेटरों से जुड़े ठिकानों को भी खंगाला गया. एजेंसी के अनुसार, इन लोगों को कथित तौर पर ऐसे आधिकारिक व्यक्तियों के रूप में पेश किया गया था, जो भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए जिम्मेदार थे.

जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फर्जी टेंडर के नाम पर वसूली गई रकम किन लोगों तक पहुंची. इसके साथ ही इस पूरे नेटवर्क में कथित हवाला ऑपरेटरों और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है.

जांच एजेंसी ने बताया कि छापेमारी के दौरान कई कंपनियों और संस्थाओं के कार्यालयों की भी तलाशी ली गई. ये कंपनियां कथित तौर पर पैसों के लेनदेन से जुड़ी हुई थीं. तलाशी के दौरान ED को हवाला लेनदेन से संबंधित बड़ी मात्रा में दस्तावेज मिले. इसके अलावा कई महंगी संपत्तियों की जानकारी और कुछ कॉरपोरेट संस्थाओं पर संदिग्ध नियंत्रण से जुड़े रिकॉर्ड भी बरामद किए गए.

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एजेंसी इन दस्तावेजों के जरिए कथित तौर पर ठगी की रकम के इस्तेमाल और उसके निवेश से जुड़ी जानकारी जुटा रही है. ED ने तलाशी अभियान के दौरान आरोपियों से जुड़े डिजिटल डिवाइस और रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं. एजेंसी के मुताबिक, ये इलेक्ट्रॉनिक सबूत चल रही जांच के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं.

इन डिवाइस और रिकॉर्ड की जांच से पैसों के लेनदेन, आरोपियों के बीच संपर्क और कथित फर्जी टेंडर नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की जानकारी मिल सकती है. जांच एजेंसी अब जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों का विश्लेषण करेगी. ED के अनुसार, इस पूरे मामले में अलग-अलग पीड़ितों से कुल 44 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी किए जाने का आरोप है.

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