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टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: 3 आरोपियों को 28 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी, आरे कॉलोनी में प्रैक्टिस की जांच

टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में सोनीपत से गिरफ्तार तीन आरोपियों को 28 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी में भेजा गया है. पुलिस आरे कॉलोनी में कथित फायरिंग प्रैक्टिस, CCTV फुटेज और साजिश के एंगल से जांच कर रही है. पढ़ें पूरी कहानी.

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इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)
इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)

मुंबई में अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले में हरियाणा के सोनीपत से गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों को अदालत ने 28 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है. तीनों आरोपियों को आज एस्प्लेनेड कोर्ट में पेश किया गया था. पुलिस ने अदालत में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए आगे की पूछताछ के लिए कस्टडी की मांग की. 

सरकारी पक्ष ने मामले में कथित आपराधिक साजिश और दूसरे आरोपियों के साथ कनेक्शन का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जरूरत बताई. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को 28 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दिया. पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अंकित, समीर और जतिन पांचाल के रूप में हुई है. जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि अंकित कथित तौर पर रेकी करने के लिए मुंबई आया था. 

वहीं, समीर सीधे अनिल पंडित के संपर्क में था। पुलिस का आरोप है कि जतिन पांचाल ने फायरिंग करने वाले आरोपी को हथियार उपलब्ध कराया था. जांच एजेंसी अब तीनों आरोपियों की भूमिका, उनके आपसी संबंधों और मामले में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है.

सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने अदालत में कहा कि तीनों आरोपियों की भूमिका मामले में महत्वपूर्ण है. पुलिस को उनसे पूछताछ कर यह पता लगाना है कि कथित फायरिंग की योजना कैसे बनाई गई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे. सरकारी वकील क्रांति कुंभार ने भी पुलिस की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि मामले से जुड़े कई वांछित आरोपी अभी महाराष्ट्र से बाहर हैं. ऐसे में सभी आरोपियों के बीच संपर्क और कथित साजिश की पूरी कड़ी का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जरूरी है.

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सरकारी वकील ने दलील दी कि यह जांच समय लेने वाली प्रक्रिया है और कम अवधि की पुलिस हिरासत से जांच का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा. उन्होंने अदालत से तीनों आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी में भेजने की मांग की. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, पुलिस को आरोपियों के बीच संबंधों, दूसरे संदिग्धों से उनके संपर्क और फायरिंग की घटना में उनकी कथित भूमिका की पड़ताल करनी है. हालांकि, अदालत ने सुनवाई के बाद तीनों आरोपियों को 28 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया.

सरकारी वकील क्रांति कुंभार ने अदालत को बताया कि पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे कैमरों के अलावा उस होटल के भी कई CCTV फुटेज बरामद किए हैं, जहां कथित तौर पर फायरिंग का अभ्यास किया गया था. पुलिस ने घटना से पहले और बाद के होटल के CCTV फुटेज भी हासिल किए हैं. इसके साथ ही होटल का रजिस्टर भी जब्त किया गया है. अभियोजन पक्ष के अनुसार, इन सभी सबूतों की जांच होना अभी बाकी है.

पुलिस इन फुटेज और होटल के रिकॉर्ड के जरिए आरोपियों की गतिविधियों और उनके संपर्कों की जानकारी जुटाना चाहती है. सरकारी पक्ष का कहना है कि मामले में कथित साजिश की सभी कड़ियों को जोड़ने के लिए इन सबूतों की जांच जरूरी है. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फायरिंग की घटना से पहले क्या तैयारियां की गई थीं और इसमें गिरफ्तार आरोपियों के अलावा किन लोगों की भूमिका हो सकती है.

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तीनों आरोपियों की ओर से पेश हुए वकील अजिंक्य मिरगल ने पुलिस की हिरासत की मांग का विरोध किया. उन्होंने अदालत में दलील दी कि कोर्ट में पेश किए गए तीनों आरोपियों में से कोई भी कथित फायरिंग के समय घटनास्थल पर मौजूद नहीं था. ऐसे में घटना में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका की जांच के नाम पर लंबी पुलिस हिरासत की मांग उचित नहीं है. बचाव पक्ष ने पुलिस की दलीलों पर सवाल उठाते हुए आरोपियों की कस्टडी की अवधि को लेकर भी आपत्ति जताई.

बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि पुलिस का दावा है कि आरोपी महाराष्ट्र से बाहर के रहने वाले हैं और उन्हें पूछताछ के लिए हरियाणा से मुंबई लाना पड़ा. उन्होंने अदालत में सवाल उठाया कि जब पुलिस आरोपियों को महज दो दिनों में हरियाणा से मुंबई ला सकती है, तो फिर इतनी लंबी अवधि की पुलिस हिरासत की जरूरत क्यों है. बचाव पक्ष ने इस आधार पर पुलिस की मांग को अनुचित बताते हुए उसका विरोध किया. सरकारी पक्ष के मुताबिक, पुलिस को यह समझना है कि तीनों आरोपियों के बीच किस तरह का संपर्क था और वे दूसरे वांछित आरोपियों के साथ कैसे जुड़े हुए थे.

अभियोजन पक्ष ने जोर दिया कि जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों की कथित भूमिका के साथ-साथ अन्य संदिग्धों से उनके संपर्कों का भी पता लगाना जरूरी है. पुलिस के अनुसार, मामले में कुछ आरोपी अभी भी महाराष्ट्र से बाहर हैं, इसलिए जांच का दायरा व्यापक है. इसी आधार पर सरकारी वकील ने अधिक समय तक पुलिस हिरासत की मांग को उचित ठहराया. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद तीनों आरोपियों को 28 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी में भेजने का फैसला किया.

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सुनवाई के दौरान अदालत ने तीनों आरोपियों से यह भी पूछा कि क्या उन्हें पुलिस के खिलाफ कोई शिकायत है. इस पर तीनों आरोपियों ने किसी तरह की शिकायत होने से इनकार कर दिया. इसके बाद अदालत ने उन्हें 28 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया. अदालत ने बचाव पक्ष के वकीलों को कोर्ट रूम में ही तीनों आरोपियों से पांच मिनट तक मुलाकात करने की अनुमति भी दी, ताकि वे मामले के संबंध में आरोपियों से जरूरी निर्देश और जानकारी ले सकें.

इस मामले की जांच के दौरान पुलिस को मुंबई की आरे कॉलोनी में कथित फायरिंग प्रैक्टिस किए जाने की जानकारी भी मिली है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, टाइगर श्रॉफ से जुड़े मामले में फायरिंग की घटना से एक दिन पहले, यानी 17 अक्टूबर को, तीनों आरोपियों ने आरे कॉलोनी में फायरिंग की प्रैक्टिस की थी. जांच टीम अब इस पहलू की पड़ताल कर रही है. पुलिस की जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि कथित प्रैक्टिस किस परिस्थिति में की गई और इसका फायरिंग की घटना से क्या संबंध था.

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