बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हमले की साजिश से जुड़े मामले में तीन आरोपियों को मुंबई की एस्प्लेनेड कोर्ट में पेश किया गया. अदालत ने तीनों आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है. पुलिस ने मामले की गहराई से जांच करने के लिए आरोपियों की कस्टडी मांगी थी. अभियोजन पक्ष का कहना है कि इस मामले में हथियारों की बरामदगी, इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच और दूसरे आरोपियों की भूमिका का पता लगाना जरूरी है.
सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष ने बताया कि आरोपियों को राजस्थान के कोटा से पीछा करके गिरफ्तार किया गया था. पुलिस का कहना है कि मामले में अंतरराज्यीय स्तर पर जांच की जरूरत है. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाना चाहती हैं कि वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियारों के अलावा कोई अन्य हथियार भी मौजूद हैं या नहीं. अभियोजन पक्ष ने अदालत से आरोपियों की 14 दिन की पुलिस हिरासत मांगी थी.
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मामले की जांच के दौरान लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कुछ गुर्गों के नाम सामने आए हैं. पुलिस अब इन नामों और आरोपियों के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल करना चाहती है. जांच का एक अहम पहलू यह पता लगाना है कि कथित साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं. हालांकि, गैंग के कथित सदस्यों की भूमिका और पूरे नेटवर्क के बारे में अभी जांच की जानकारी सामने आनी बाकी है.
सरकारी वकील ने अदालत में दलील दी कि आरोपियों से पूछताछ के जरिए मामले से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटानी है. पुलिस यह भी पता करना चाहती है कि हथियार कहां से आए और क्या इस मामले में दूसरे लोगों की भी भूमिका है. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपियों की कस्टडी के बिना जांच के कुछ अहम पहलुओं को स्पष्ट करना मुश्किल हो सकता है.
सुनवाई के दौरान आरोपियों के बचाव पक्ष के वकीलों ने पुलिस हिरासत की मांग का विरोध किया. वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के Bhushan Singh बनाम State फैसले का हवाला देते हुए दलील दी कि केवल मामले में इस्तेमाल हुई वस्तुओं की बरामदगी के आधार पर पुलिस कस्टडी की मांग नहीं की जा सकती. बचाव पक्ष का कहना था कि इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच आरोपियों को पुलिस हिरासत में रखे बिना भी की जा सकती है.
वकीलों ने यह भी कहा कि केवल सह-आरोपियों के बारे में ज्यादा जानकारी जुटाने के उद्देश्य से आरोपियों को पुलिस कस्टडी में भेजना जरूरी नहीं है. उनके मुताबिक, हथियार, मोबाइल फोन या अन्य सामान की बरामदगी का दावा अपने आप में पुलिस हिरासत की पर्याप्त वजह नहीं हो सकता. बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि जांच के लिए पुलिस जिन आधारों का हवाला दे रही है, वे आरोपियों की अतिरिक्त हिरासत को उचित नहीं ठहराते.
बचाव पक्ष ने दलील दी कि घटनास्थल के ज्यादातर हिस्से की रिकॉर्डिंग पहले से CCTV कैमरों में मौजूद है. वकीलों के मुताबिक, इस वजह से घटनास्थल से जुड़े कई पहलुओं की जांच पहले ही की जा सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और इस लिहाज से जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पूरा हो चुका है.
आरोपियों के वकीलों ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल पिछले दो से तीन दिनों से पुलिस के नियंत्रण में थे. ऐसे में बचाव पक्ष ने सवाल उठाया कि उन्हें और समय तक पुलिस हिरासत में रखने की जरूरत क्यों है. वकीलों ने गिरफ्तारी के आधार और कारणों की जानकारी नहीं दिए जाने का मुद्दा भी उठाया. हालांकि, अदालत ने सुनवाई के बाद तीनों आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया.
अभियोजन पक्ष ने अदालत में आरोप लगाया कि आरोपियों ने सबूत मिटाने के उद्देश्य से अपने मोबाइल फोन नष्ट कर दिए. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मोबाइल फोन में मौजूद डेटा, संपर्कों और अन्य डिजिटल जानकारियों से मामले में क्या सुराग मिल सकते हैं. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाना चाहती हैं कि आरोपियों ने कथित तौर पर सबूत मिटाने के लिए क्या कदम उठाए थे.
सरकारी पक्ष ने कहा कि मामले में हथियारों की बरामदगी और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच करना जरूरी है. अभियोजन पक्ष ने यह भी दलील दी कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए प्रावधान गैर-जमानती हैं. पुलिस के मुताबिक, मामले में अंतरराज्यीय कड़ियों की जांच के साथ-साथ यह भी पता लगाना है कि वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियार कहां हैं और क्या इस साजिश में अन्य लोग भी शामिल थे.
आरोपियों के वकील अजिंक्य मिरगर ने ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने दलील दी कि पुलिस पहले कोटा से रवाना हुई और फिर दोबारा कोटा लौट आई. बचाव पक्ष के मुताबिक, ट्रांजिट रिमांड का उद्देश्य आरोपी को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की अनुमति देना होता है, न कि उस दौरान नियमित जांच करना.
इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और ट्रांजिट रिमांड के दौरान की गई कथित जांच को लेकर बचाव पक्ष ने आपत्ति दर्ज कराई. हालांकि, इस दलील पर अदालत की विस्तृत टिप्पणी की जानकारी उपलब्ध नहीं है. मामले में पुलिस की जांच जारी है और अब हिरासत के दौरान आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
अदालत में सुनवाई के दौरान घटना में दो लोगों के घायल होने की जानकारी भी दी गई. अभियोजन पक्ष ने बताया कि आरोपियों को राजस्थान के कोटा से पीछा करने के बाद गिरफ्तार किया गया. सुनवाई से जुड़ी जानकारी में चार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी का भी जिक्र आया है. हालांकि, उपलब्ध विवरण से यह स्पष्ट नहीं है कि इन चार आरोपियों की गिरफ्तारी की स्थिति और तीन आरोपियों की मौजूदा पुलिस कस्टडी के बीच सटीक संबंध क्या है.
पुलिस अब मामले में सभी आरोपियों की भूमिका, कथित साजिश के नेटवर्क और संभावित हथियारों की बरामदगी पर ध्यान दे रही है. जांच एजेंसियों को यह भी पता लगाना है कि क्या इस मामले में और लोग शामिल हैं. तीन आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजे जाने के बाद पूछताछ के जरिए मामले की बाकी कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जाएगी.
मुंबई क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजतिलक रोशन ने बताया कि टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में कोटा से पकड़े गए तीन कथित शूटरों के अलावा पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक, इस मामले में दो आरोपी हथियार लेने के लिए अमृतसर गए थे. इसके बाद दो अन्य महिलाएं उन हथियारों को लेकर मुंबई पहुंचीं और कथित तौर पर शूटरों को सौंप दिया. पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और हथियारों की सप्लाई से जुड़ी कड़ियों की जांच कर रही है.
डीसीपी राजतिलक रोशन के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए पांच अन्य आरोपियों में एक व्यक्ति पर साजिश में शामिल होने और आरोपियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देने का आरोप है. पुलिस इन सभी आरोपियों को मुंबई लाने की तैयारी कर रही है. मुंबई पहुंचने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा. पुलिस की जांच का फोकस अब कथित साजिश में शामिल लोगों की भूमिका, हथियारों की व्यवस्था और शूटरों तक उन्हें पहुंचाने के पूरे नेटवर्क का पता लगाने पर है.