रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उत्तर प्रदेश के तीन परिवार अपने बेटों को लेकर बेहद परेशान हैं. मुजफ्फरनगर और शामली से जुड़े इन युवकों के परिवारों का कहना है कि मॉस्को में रहने के दौरान अचानक उनसे संपर्क टूट गया. परिजनों के मुताबिक, संपर्क टूटने से पहले युवकों ने बताया था कि स्थानीय अधिकारियों ने उनके पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिए हैं. इसके बाद उन्हें कथित तौर पर रूसी सेना में शामिल कर दिया गया और अब युद्ध क्षेत्र में भेजे जाने का दबाव है.
लापता बताए जा रहे युवकों की पहचान 24 वर्षीय हिमांशु शर्मा, 23 वर्षीय शक्ति पुंडीर और 25 वर्षीय आशु सैनी के रूप में हुई है. हिमांशु शर्मा और शक्ति पुंडीर मुजफ्फरनगर के रहने वाले हैं, जबकि आशु सैनी शामली जिले का रहने वाला है. तीनों युवक मॉस्को में एक ही कमरे में रह रहे थे और रूसी भाषा का कोर्स कर रहे थे. तीनों पिछले कुछ समय के दौरान स्टडी वीजा पर रूस पहुंचे थे.
परिजनों के मुताबिक, तीनों युवकों से आखिरी बार 30 जुलाई को बातचीत हुई थी. उस दिन कुछ देर के लिए फोन पर संपर्क हुआ, लेकिन इसके बाद उनके फोन बंद हो गए और कोई जवाब नहीं मिला. हिमांशु शर्मा पढ़ाई के साथ रूस में नियमों के तहत पार्ट-टाइम काम करने के लिए भी गया था. परिवार को अब आशंका है कि उसे उसकी इच्छा के खिलाफ रूसी सेना में शामिल किया गया हो सकता है.
हिमांशु के चचेरे भाई प्रियंशु शर्मा ने बताया कि उसका पासपोर्ट इसी साल एक्सपायर होने वाला था. उन्होंने कहा कि 30 जुलाई को आखिरी बातचीत के बाद हिमांशु के नंबर पर कई बार फोन किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. परिवार को शक है कि उसे जबरन रूसी सेना में भेजा गया है. इसी तरह शक्ति पुंडीर के पिता ने भी 30 जुलाई को बेटे से आखिरी बार बात की थी और उसके बाद से उनका संपर्क पूरी तरह टूट गया.
तीसरे युवक आशु सैनी का संबंध शामली जिले के थानाभवन क्षेत्र के हसनपुर लोहारी गांव से है. वह अप्रैल 2026 में रूस गया था. उसकी बहन अंशुल के मुताबिक, परिवार की आशु से आखिरी बातचीत करीब 30 सेकेंड की हुई थी. इस छोटी सी बातचीत में आशु ने सिर्फ इतना बताया कि वह ठीक है और इसके बाद फोन कट गया.
आशु के पिता राकेश कुमार किसान हैं. बेटे से संपर्क टूटने के बाद उन्होंने उसकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से भी गुहार लगाई है. परिवार लगातार यह जानने की कोशिश कर रहा है कि आशु इस समय कहां है और उसकी स्थिति क्या है. परिजनों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध लगातार जारी है और रूसी सेना युद्ध क्षेत्र में सक्रिय है.
तीनों युवकों के परिवारों की अपील के बाद मामले को विदेश मंत्रालय (MEA) तक पहुंचाया गया. MEA ने परिवारों को दिए जवाब में बताया कि मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास ने मामले में हस्तक्षेप किया है. मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय दूतावास ने रूसी अधिकारियों के सामने यह मामला उठाया है और युवकों के बारे में जानकारी मांगी है.
MEA के जवाब के अनुसार, संबंधित अधिकारियों से तीनों युवकों के ठिकाने और स्थिति की जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही है. मंत्रालय ने यह भी कहा कि युवकों के रूसी सेना में शामिल होने की जानकारी सामने आई है और दूतावास उनके मामलों को अलग-अलग स्तर पर उठा रहा है. अब परिवारों को उम्मीद है कि भारत सरकार के हस्तक्षेप से उनके बेटों की सुरक्षित वापसी का रास्ता निकलेगा.
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारतीय नागरिकों के रूसी सेना में पहुंचने का मामला पहले भी सामने आ चुका है. जुलाई में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया था कि करीब 24 भारतीय नागरिक रूसी सेना में फंसे हुए हैं. उनके मुताबिक, इनमें से कई लोगों को कथित तौर पर धोखाधड़ी या गैर-पारदर्शी तरीकों से भर्ती किया गया था.
अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इन तीन युवकों का मामला सामने आने के बाद उनके परिवारों की चिंता और बढ़ गई है. उत्तर प्रदेश में स्थानीय अधिकारियों ने परिवारों को जांच और हरसंभव मदद का भरोसा दिया है. हालांकि, परिवारों का इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है और वे अपने बेटों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं.