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मुंबई में जुल्फिकार गैंग का पर्दाफाश, ठेकेदार से 25 लाख की रंगदारी लेते सरगना समेत 12 आरोपी गिरफ्तार

मुंबई क्राइम ब्रांच ने पश्चिमी उपनगरों में ठेकेदारों से रंगदारी वसूलने वाले एक कुख्यात गैंग का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने गैंग के सरगना जुल्फिकार बेहलीम समेत 12 आरोपियों को 25 लाख रुपये की रंगदारी लेते हुए गिरफ्तार कर लिया. पढ़ें इस गैंग की करतूत और भंडाफोड़ की पूरी कहानी.

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मुख्य आरोपी जुल्फिकार बेहलीम भी क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गया (फोटो-ITG)
मुख्य आरोपी जुल्फिकार बेहलीम भी क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गया (फोटो-ITG)

मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पश्चिमी उपनगरों में सक्रिय एक ऐसे रंगदारी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो जनप्रतिनिधियों के स्थानीय विकास कार्यों और पुनर्विकास परियोजनाओं से जुड़े ठेकेदारों को निशाना बनाकर उनसे फिरौती वसूलता था. क्राइम ब्रांच की यूनिट-9 ने कार्रवाई करते हुए कुख्यात जुल्फिकार गैंग के सरगना समेत 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने आरोपियों को एक ठेकेदार से 25 लाख रुपये की रंगदारी लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया. इस कार्रवाई को मुंबई पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है.

पुलिस के मुताबिक, जुल्फिकार गैंग लंबे समय से पश्चिमी उपनगरों में चल रहे विकास कार्यों और रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में काम कर रहे ठेकेदारों को धमकाकर मोटी रकम वसूल रहा था. गैंग के सदस्य निर्माण कार्यों में बाधा डालने और जान से मारने की धमकी देकर ठेकेदारों पर दबाव बनाते थे. इस वजह से कई विकास परियोजनाएं भी प्रभावित हो रही थीं. मामले की शिकायतें लगातार पुलिस तक पहुंच रही थीं, जिसके बाद गैंग पर नजर रखी गई और पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया.

इस मामले को लेकर इलाके के कई जनप्रतिनिधियों ने भी पुलिस के सामने शिकायत दर्ज कराई थी. भाजपा विधायक अमित साटम और पराग अलवानी के अलावा शिवसेना विधायक सुनील प्रभु और वरुण सरदेसाई ने भी इस मुद्दे को अलग-अलग मंचों पर उठाया था. जनप्रतिनिधियों का कहना था कि विकास कार्यों में लगे ठेकेदारों को लगातार धमकियां मिल रही हैं. इससे सरकारी और स्थानीय विकास परियोजनाओं पर असर पड़ रहा है. शिकायतों के आधार पर क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की और गैंग की गतिविधियों पर नजर रखी.

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जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गैंग सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी अपने खौफ को बढ़ाने के लिए कर रहा था. आरोपी हथियारों, लग्जरी कारों और आपराधिक छवि दिखाने वाले रील्स और वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते थे. पुलिस का कहना है कि इन पोस्ट के जरिए गैंग इलाके में अपनी दहशत कायम करना चाहता था, ताकि लोग डरकर आसानी से रंगदारी देने को मजबूर हो जाएं. सोशल मीडिया को अपराधियों ने अपनी नई पहचान और दबदबा बनाने का जरिया बना लिया था.

गिरफ्तार आरोपियों में गैंग का सरगना जुल्फिकार बेहलीम और उसका भाई मोहसीन बेहलीम भी शामिल हैं. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, दोनों को पहले भी महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) के तहत गिरफ्तार किया जा चुका है. इतना ही नहीं, दोनों हत्या के दो अलग-अलग मामलों में जमानत पर बाहर आए थे. जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने फिर से गैंग को सक्रिय किया और इलाके में रंगदारी, दहशत का नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश शुरू कर दी थी.

मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट-9 ने इस पूरे ऑपरेशन को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जुल्फिकार गैंग अब तक कितने ठेकेदारों से रंगदारी वसूल चुका है और किन-किन विकास परियोजनाओं को अपना निशाना बनाया गया था. इसके साथ ही गैंग के आर्थिक नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की भी जांच की जा रही है. पुलिस का मानना है कि पूछताछ में कई और अहम खुलासे हो सकते हैं.

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क्राइम ब्रांच के डीसीपी नवनाथ ढवले ने कहा कि विकास कार्यों में बाधा डालकर रंगदारी वसूलने वाले किसी भी गिरोह को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने बताया कि पुलिस ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेगी और इस मामले में जांच अभी भी जारी है. अधिकारियों का कहना है कि शहर में विकास परियोजनाओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना पुलिस की प्राथमिकता है और संगठित अपराध के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा.

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