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मुंबई: लीलावती अस्पताल के पूर्व ट्रस्टियों को बड़ी राहत, काला जादू मामले में समन रद्द

मुंबई सेशन कोर्ट ने लीलावती अस्पताल के पूर्व ट्रस्टियों के खिलाफ कथित काला जादू मामले को रद्द कर दिया. अदालत ने कहा कि आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत नहीं हैं और समन खारिज कर दिए. जानें क्या है पूरा मामला.

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इस मामले में सबूतों की कमी के चलते अदालत ने समन खारिज कर दिया (फोटो-ITG)
इस मामले में सबूतों की कमी के चलते अदालत ने समन खारिज कर दिया (फोटो-ITG)

मुंबई के लीलावती अस्पताल से जुड़े कथित काला जादू और तंत्र-मंत्र के मामले में पूर्व ट्रस्टियों को बड़ी राहत मिली है. मुंबई सेशन कोर्ट ने लीलावती किर्तिलाल मेहता मेडिकल ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टियों और उनसे जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द कर दिया है. 

अदालत ने इस मामले में मजिस्ट्रेट कोर्ट की ओर से जारी समन को भी खारिज कर दिया. इस मामले में चेतन मेहता, निमेश शेठ और आयुष्मान मेहता को आरोपी बनाया गया था. सेशन कोर्ट के इस फैसले से फिलहाल उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर रोक लग गई है.

दरअसल, इस मामले की शुरुआत पिछले साल अस्पताल के एक स्थायी ट्रस्टी की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत से हुई थी. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि लंबे समय तक चले कानूनी विवादों के बाद जब अस्पताल के प्रशासन का हस्तांतरण हो रहा था, तब कर्मचारियों ने उन्हें पूर्व प्रबंधन की ओर से कथित तौर पर काला जादू किए जाने की जानकारी दी थी. 

शिकायत में दावा किया गया था कि अस्पताल के पुराने प्रबंधन से जुड़े लोगों ने कुछ संदिग्ध अनुष्ठान किए थे. इन आरोपों के सामने आने के बाद मामला कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया था.

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शिकायतकर्ता के मुताबिक, उनके कार्यालय के फर्श के नीचे आठ तांबे के कलश दबे हुए मिले थे. इन कलशों में चावल, राख और बाल रखे गए थे. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि इन वस्तुओं का इस्तेमाल कथित तौर पर काली शक्तियों को बुलाने, उन्हें शारीरिक नुकसान पहुंचाने और उनकी सेहत को प्रभावित करने के मकसद से किया गया था. 

उन्होंने इन वस्तुओं को कथित काला जादू और तंत्र-मंत्र से जुड़ी गतिविधियों का हिस्सा बताया था. इसी शिकायत के आधार पर पूर्व ट्रस्टियों के खिलाफ आपराधिक मामला आगे बढ़ा.

इसके बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट ने महाराष्ट्र नरबलि और अन्य अमानवीय, दुष्ट एवं अघोरी प्रथाओं तथा काला जादू उन्मूलन एवं रोकथाम अधिनियम, 2013 के तहत आरोपियों के खिलाफ समन जारी किया था. इस आदेश को चुनौती देते हुए पूर्व ट्रस्टी चेतन मेहता, निमेश शेठ और आयुष्मान मेहता ने मुंबई सेशन कोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन याचिका दाखिल की. 

उनकी ओर से अधिवक्ता सुदीप पासबोला और लक्ष्मी रमन ने अदालत में पक्ष रखा. वकीलों ने दलील दी कि यह मूल रूप से ट्रस्ट के प्रशासन और प्रबंधन को लेकर चल रहा दीवानी विवाद है, जिसे दुर्भावनापूर्ण तरीके से आपराधिक मामले का रूप दिया गया है.

आरोपियों के वकीलों ने अदालत में कहा कि शिकायत में ऐसे कोई प्रथम दृष्टया सबूत नहीं हैं, जिनसे काला जादू किए जाने या किसी को नुकसान पहुंचाने की मंशा साबित हो सके. उन्होंने यह भी दलील दी कि शिकायत में आरोपियों की किसी खास भूमिका या उनके द्वारा किए गए किसी प्रत्यक्ष कृत्य का स्पष्ट उल्लेख नहीं है. 

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केवल कार्यालय के फर्श के नीचे कुछ वस्तुएं मिलने के आधार पर किसी व्यक्ति को आपराधिक मामले में आरोपी नहीं बनाया जा सकता. बचाव पक्ष ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के समन जारी करने के आदेश को रद्द करने की मांग की थी.

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कुणाल धनाजी जाधव ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को गलत ठहराया. अदालत ने कहा कि कथित तौर पर बरामद वस्तुओं को लेकर किसी विशेषज्ञ की रिपोर्ट या ऐसा कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि वे काला जादू या तांत्रिक गतिविधियों से जुड़ी थीं. 

अदालत को ऐसा कोई प्रमाण भी नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि इन वस्तुओं के जरिए किसी को शारीरिक नुकसान पहुंचाने, उसकी जान को खतरे में डालने या उसकी सेहत बिगाड़ने की मंशा थी.

सेशन कोर्ट ने यह भी कहा कि फर्श के नीचे मिली इन वस्तुओं की एक दूसरी व्याख्या भी हो सकती है. इन्हें किसी धार्मिक परंपरा या निर्माण से पहले किए जाने वाले नींव पूजन जैसे अनुष्ठान का हिस्सा माना जा सकता है. 

अदालत ने ऐसे धार्मिक रीति-रिवाजों को संविधान के तहत संरक्षण प्राप्त होने की बात भी कही. न्यायाधीश ने माना कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मामले में उपलब्ध सामग्री और कानूनी पहलुओं पर उचित तरीके से विचार किए बिना ही समन जारी कर दिए थे.

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कुणाल धनाजी जाधव ने मजिस्ट्रेट के आदेश को विकृत और न्यायिक विवेक के उचित इस्तेमाल से रहित बताया. अदालत ने पूर्व ट्रस्टियों की क्रिमिनल रिवीजन याचिका स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ जारी समन को रद्द कर दिया. 

इस तरह लीलावती अस्पताल के पूर्व ट्रस्टियों और उनके सहयोगियों के खिलाफ कथित काला जादू मामले में आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करने का रास्ता साफ हो गया है.

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