पंजाब के होशियारपुर सेंट्रल जेल में चल रहे एक संगठित ड्रग्स रैकेट का बड़ा खुलासा हुआ है. इस मामले की शुरुआत जेल के एक कैदी द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वायरल वीडियो से हुई, जिसने जेल प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया. पंजाब पुलिस की जांच में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें जेल के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं. अब इस केस की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है.
यह पूरा मामला 14 जून को सामने आया, जब होशियारपुर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई. एफआईआर का आधार एक वायरल वीडियो था, जिसमें होशियारपुर जेल में बंद कैदी मनप्रीत सिंह उर्फ मन्ना ने जेल के अंदर खुलेआम ड्रग्स और मोबाइल फोन की उपलब्धता को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे. वीडियो सामने आने के बाद पंजाब पुलिस ने तत्काल एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर मामले की जांच शुरू की.
जांच के दौरान पुलिस ने होशियारपुर जेल में बंद चार आरोपियों को प्रोडक्शन वारंट पर हिरासत में लेकर पूछताछ की. पूछताछ में खुलासा हुआ कि जेल के भीतर एक संगठित ड्रग्स सप्लाई और वितरण नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था. आरोपियों ने बताया कि जेल परिसर के अंदर नशीले पदार्थों की खरीद-बिक्री का पूरा तंत्र व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा था.
पूछताछ में आरोपी हरविंदर सिंह उर्फ मन्नू ने खुलासा किया कि हेरोइन बाहरी सप्लायरों से मंगाई जाती थी और पहले से स्थापित संपर्कों के जरिए जेल के अंदर पहुंचाई जाती थी. जांच में यह भी सामने आया कि बलजिंदर सिंह और उसके सहयोगी जेल के भीतर हेरोइन की सप्लाई और वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे. पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े बाहरी लोगों की पहचान करने में जुटी हुई है.
इस मामले में पैरोल पर बाहर आए आरोपी राकेश उर्फ पहलवान को भी गिरफ्तार किया गया है. पुलिस पूछताछ में सामने आया कि वह जेल में बंद कैदियों और जेल अधिकारियों के बीच एक बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था. उस पर आरोप है कि वह अवैध लेनदेन कराने और दोनों पक्षों के बीच संपर्क बनाए रखने का काम करता था. उसके खुलासों के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है.
जांच के दौरान इस मामले का वित्तीय पहलू भी सामने आया है. पुलिस को पता चला कि आरोपी गुरप्रीत सिंह उर्फ मोनू की मां के बैंक खाते में पांच महीने के दौरान लगभग 74 लाख रुपये जमा हुए थे. जांच एजेंसियों के मुताबिक, इन संदिग्ध लेनदेन का पैटर्न ड्रग्स तस्करी से होने वाली अवैध कमाई की ओर इशारा करता है. पुलिस अब इन वित्तीय लेनदेन की गहन जांच कर रही है.
एसआईटी की जांच और आरोपियों के बयानों से जेल अधिकारियों की संलिप्तता के भी संकेत मिले हैं. इस मामले में जेल के एडिशनल सुपरिंटेंडेंट हरभजन सिंह और जेल वार्डन रविंदर सिंह को गिरफ्तार किया गया है. जांच में यह भी सामने आया कि हरभजन सिंह की कई बार होशियारपुर जेल में पोस्टिंग हुई थी. सूत्रों के मुताबिक, हरभजन सिंह पर नकद रिश्वत लेने का आरोप है, जबकि रविंदर सिंह पर जेल के बाहर से ड्रग्स मंगवाने और कैदियों की मदद से उन्हें जेल के अंदर पहुंचाने का आरोप है.
पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले का खुलासा मनप्रीत सिंह उर्फ मन्ना के वायरल वीडियो के कारण संभव हो सका. वीडियो में उसने हाई सिक्योरिटी जेल के अंदर ड्रग्स और मोबाइल फोन की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे. फिलहाल, एसआईटी जांच जारी है और पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क और इसके बाहरी संपर्कों का पता लगाने में जुटी हुई हैं.