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वर्दी, फेक ID कार्ड और 8 मोबाइल फोन... दिल्ली के प्रशांत विहार में फर्जी CBI रेड का खुलासा, 7 गिरफ्तार

दिल्ली के प्रशांत विहार में फर्जी CBI रेड डालने के मामले में पुलिस ने 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के पास से CBI लोगो वाले कपड़े, फर्जी ID कार्ड के स्क्रीनशॉट और 8 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं. पढ़ें फेक सीबीआई टीम की असली कहानी.

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पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फेक ID कार्ड भी बरामद किए है (फोटो-ITG)
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फेक ID कार्ड भी बरामद किए है (फोटो-ITG)

दिल्ली पुलिस ने प्रशांत विहार इलाके में फर्जी CBI रेड डालने के मामले का खुलासा करते हुए 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि आरोपियों का एक समूह खुद को CBI अधिकारी बताकर एक घर में छापा मारने पहुंचा था. उनके पास कथित तौर पर फर्जी CBI पहचान पत्र थे और उन्होंने घर में दाखिल होने की कोशिश की. इस दौरान आरोपियों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए परिवार पर दबाव बनाने का प्रयास किया.

मामला 11 अगस्त 2026 की रात करीब 10 बजे का है. पुलिस के मुताबिक करीब 8 लोग, जिनमें 6 पुरुष और 2 महिलाएं शामिल थीं, शिकायतकर्ता के प्रशांत विहार स्थित घर पहुंचे. कथित फर्जी CBI टीम करीब डेढ़ घंटे तक घर के बाहर मौजूद रही और परिवार के बीच डर का माहौल बना दिया. जब शिकायतकर्ता और उसकी मां ने उनसे सर्च वारंट या अधिकृत दस्तावेज दिखाने को कहा तो आरोपियों ने कथित तौर पर उन्हें धमकाने और डराने की कोशिश की.

मामले में उस वक्त नया मोड़ आया जब पड़ोसी भी मौके पर पहुंच गए. पुलिस के मुताबिक, इसके बाद आरोपियों ने दावा किया कि शिकायतकर्ता के पिता के नाम पर कोई नोटिस जारी हुआ है. उन्होंने कहा कि वह नोटिस उनकी गाड़ी में रखा है और उसे लेकर वापस आते हैं. इसके बाद कथित फर्जी टीम वहां से चली गई. इस दौरान शिकायतकर्ता के पिता के मोबाइल फोन पर एक कथित CBI नोटिस भी भेजा गया था, हालांकि उसका मूल संदेश बाद में डिलीट कर दिया गया और उसका स्क्रीनशॉट सुरक्षित रह गया.

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इस मामले में प्रशांत विहार थाने में 19 अगस्त 2026 को FIR नंबर 238/2026 दर्ज की गई. पुलिस ने BNS की धारा 308(2), 351(2) और 61(2) के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की. जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के एक संगठित समूह के तौर पर काम करने का शक हुआ. पुलिस के मुताबिक, यह समूह पहले भी इसी तरह के फर्जी रेड के मामलों को अंजाम दे चुका था.

पुलिस ने मामले में पूजा अग्रवाल, आसिफा (29), कुलदीप शर्मा (63), चंदर प्रकाश शर्मा (38), शुभम उर्फ गोलू (25), राजवीर सिंह (21) और नितिन शर्मा (30) को गिरफ्तार किया है. जांच में कथित तौर पर सामने आया कि सभी आरोपियों की भूमिका अलग-अलग थी. पुलिस के अनुसार, आसिफा ने पूजा के साथ मिलकर कथित फर्जी CBI कार्रवाई को कोऑर्डिनेट किया और खुद को CBI से जुड़ा हुआ बताया. उस पर शिकायतकर्ता और उसके घर से जुड़ी जानकारी जुटाने का भी आरोप है.

पूजा अग्रवाल पहले बार और रेस्टोरेंट में सिंगर के तौर पर काम कर चुकी है. पुलिस के मुताबिक, उसने कथित तौर पर फर्जी CBI रेड की योजना में समन्वय किया और अपने जीजा चंदर प्रकाश से संपर्क कर लोगों को रेड के लिए जुटाने को कहा. वहीं 63 वर्षीय कुलदीप शर्मा पहले एक बैंक में काम कर चुका है. आरोप है कि उसने शिकायतकर्ता, उसके पते और घर में संभावित कैश या कीमती सामान से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई.

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पुलिस के अनुसार, चंदर प्रकाश शर्मा का काम कथित तौर पर ऐसे लोगों को जुटाना था, जो CBI अधिकारी बनकर फर्जी रेड में शामिल हो सकें. जांच के दौरान उसके पास से CBI मार्क वाले कपड़े और कथित फर्जी पहचान पत्रों की तस्वीरें बरामद होने की बात सामने आई है. पुलिस का आरोप है कि चंदर ने फर्जी CBI अधिकारियों की टीम तैयार करने में अहम भूमिका निभाई.

शुभम उर्फ गोलू, राजवीर सिंह और नितिन शर्मा पर कथित फर्जी रेड में सीधे तौर पर शामिल होने का आरोप है. पूछताछ में शुभम ने पुलिस को कथित तौर पर बताया कि उसे आसिफा और चंदर प्रकाश की ओर से हर रेड के लिए पैसे मिलते थे. राजवीर और नितिन पर भी फर्जी रेड में शामिल होकर पैसे लेने का आरोप है. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे.

पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, आरोपी पिछले करीब 3 से 4 महीने से इसी तरह की गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं. आरोपियों का तरीका कथित तौर पर पहले टारगेट चुनना, उसके बारे में जानकारी जुटाना और फिर सरकारी एजेंसी के अधिकारी बनकर उसके घर पर पहुंचना था. इसके बाद फर्जी ID कार्ड और दस्तावेज दिखाकर परिवार को डराने-धमकाने की कोशिश की जाती थी. पुलिस को शक है कि इस पूरी कवायद का मकसद लोगों से पैसे या कीमती सामान हासिल करना था.

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जांच में पुलिस को आरोपियों के मोबाइल फोन से कई वीडियो मिलने की बात सामने आई है. इन वीडियो के आधार पर पुलिस को दिल्ली और मुंबई में हुई कई कथित फर्जी रेड का सुराग मिला है. पुलिस का दावा है कि आरोपी सिर्फ CBI अधिकारी बनकर ही नहीं, बल्कि प्रवर्तन निदेशालय यानी ED और दूसरी सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बनकर भी लोगों को निशाना बनाते थे. इससे पुलिस को इस गिरोह के नेटवर्क के और बड़ा होने का शक है.

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल 8 मोबाइल फोन बरामद किए हैं. इसके अलावा CBI का मोनोग्राम लगे कपड़े और कथित फर्जी CBI पहचान पत्रों के स्क्रीनशॉट भी जांच में मिले हैं. इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच के जरिए पुलिस कथित फर्जी रेड से जुड़े दूसरे मामलों की जानकारी जुटा रही है. पुलिस डिजिटल बातचीत, कॉल रिकॉर्ड और पैसों के लेन-देन की भी जांच कर रही है.

फिलहाल, पुलिस इस मामले में दूसरे संभावित पीड़ितों की पहचान करने में जुटी है. साथ ही फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोगों और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है. पुलिस डिजिटल और वित्तीय ट्रेल की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया. प्रशांत विहार का मामला सामने आने के बाद अब पुलिस इस कथित गैंग की पूरी गतिविधियों का पता लगाने में जुटी है.

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