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शादी के कार्ड वाली APK फाइल से करते थे बैंक खाता खाली, ऐसे हुआ साइबर गैंग बेनकाब, कोलकाता-बेंगलुरु से 3 गिरफ्तार

गुजरात की राजकोट ग्रामीण साइबर क्राइम पुलिस ने शादी के निमंत्रण वाली APK से ठगी करने वाले अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. कोलकाता और बेंगलुरु से 3 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं. पुलिस ने 18.16 लाख रुपये का सामान जब्त किया और 7 मामले सुलझाए हैं. पढ़ें पूरी कहानी.

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इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)
इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है (फोटो-ITG)

गुजरात की राजकोट ग्रामीण साइबर क्राइम पुलिस को अंतरराज्यीय साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने में सफलता मिली है. यह गिरोह व्हाट्सएप पर शादी के निमंत्रण के नाम से APK फाइल भेजकर लोगों के बैंक खातों से पैसे निकालता था. पुलिस ने मामले की जांच के दौरान पश्चिम बंगाल के कोलकाता और कर्नाटक के बेंगलुरु से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस का दावा है कि इन गिरफ्तारियों के बाद अलग-अलग राज्यों में दर्ज कुल सात मामलों को सुलझाने में मदद मिली है.

मामले की शुरुआत राजकोट ग्रामीण के धोराजी तालुका स्थित सुपेड़ी गांव के एक सेवानिवृत्त कर्मचारी जयंतीभाई के साथ हुई साइबर ठगी से हुई. कुछ दिन पहले उनके मोबाइल पर एक करीबी रिश्तेदार के व्हाट्सएप अकाउंट से शादी के निमंत्रण जैसी दिखने वाली APK फाइल आई थी. फाइल परिचित व्यक्ति के नाम से भेजी गई थी, इसलिए जयंतीभाई ने उसकी पुष्टि किए बिना ही उसे इंस्टॉल कर लिया. इसके बाद उनके बैंक खाते से पैसे निकल गए और वह साइबर धोखाधड़ी के शिकार हो गए. उन्होंने इस घटना की शिकायत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दर्ज कराई, जिसके बाद राजकोट ग्रामीण साइबर क्राइम पुलिस ने जांच शुरू की.

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच और वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण करने के लिए अलग-अलग टीमें बनाईं. जांच में सामने आया कि आरोपी अलग-अलग नामों से APK फाइलें तैयार करवाते और उन्हें सोशल मीडिया व व्हाट्सएप के जरिए लोगों तक पहुंचाते थे. इन फाइलों को शादी का निमंत्रण, वेडिंग कार्ड, वेडिंग वीडियो, कूरियर, बिजली बिल और ई-चालान जैसे नाम दिए जाते थे. इसके अलावा, राजनीतिक दलों से जुड़े संदेशों और अन्य आकर्षक विषयों के नाम पर भी फाइलें भेजी जाती थीं, ताकि लोग उन पर भरोसा कर लें. पुलिस के अनुसार, फाइल इंस्टॉल होने के बाद आरोपियों को पीड़ित के मोबाइल तक पहुंच मिल जाती थी, जिसका इस्तेमाल बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था.

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पुलिस की जांच के मुताबिक, इस नेटवर्क में साइबर ठगी की पूरी प्रक्रिया को अलग-अलग हिस्सों में बांटा गया था. इसमें APK फाइल तैयार करवाना, उसके संचालन के लिए जरूरी तकनीकी ढांचा तैयार करना, सोशल मीडिया पर फाइल फैलाना और पीड़ित के मोबाइल के जरिए पैसे निकालना शामिल था. इसके बाद ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों में भेजकर नकदी में बदलने की व्यवस्था की जाती थी. इस पूरी प्रक्रिया को इस तरह अंजाम दिया जाता था कि पीड़ित को धोखाधड़ी का पता चलने से पहले ही उसके खाते से पैसे दूसरे खातों में ट्रांसफर हो जाएं. पुलिस को जांच में पता चला कि नेटवर्क में शामिल आरोपियों की भूमिकाएं अलग-अलग थीं और वे आपस में समन्वय बनाकर काम करते थे.

जांच में सामने आया कि आरोपी साइबर ठगी से मिले पैसों को सीधे नकद निकालने के बजाय अलग-अलग राज्यों में ज्वैलर्स के बैंक खातों में ट्रांसफर करते थे. इन पैसों से सोने के सिक्के और आभूषण खरीदे जाते थे. बाद में खरीदे गए सोने को दूसरी जगह बेचकर नकदी जुटाई जाती थी. पुलिस के अनुसार, बैंक खातों, एटीएम से नकद निकासी और हवाला के जरिए रकम भेजने जैसी प्रक्रियाओं का भी इस्तेमाल किया जाता था. इस तरीके से ठगी की रकम के मूल स्रोत और उसके लेनदेन की कड़ी को छिपाने की कोशिश की जाती थी.

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राजकोट ग्रामीण साइबर क्राइम पुलिस ने मामले की जांच में बैंक स्टेटमेंट, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और फंड ट्रेल का विश्लेषण किया. इन जानकारियों के आधार पर पुलिस को पश्चिम बंगाल के कोलकाता और कर्नाटक के बेंगलुरु तक आरोपियों के जुड़ाव का पता चला. इसके बाद पुलिस की अलग-अलग टीमें इन शहरों में भेजी गईं. वहां कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद दानिश उर्फ डेनियल, मोहम्मद तौसीफ रजा और ज़ोया खान के रूप में हुई है. पुलिस अब उनके कथित नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है.

पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ के मुताबिक, मोहम्मद दानिश उर्फ डेनियल मूल रूप से पश्चिम बंगाल के कोलकाता का रहने वाला है. जांच में उसकी भूमिका APK फाइल तैयार करने वाले डेवलपर के संपर्क में रहने और साइबर ठगी से हासिल रकम को ठिकाने लगाने की व्यवस्था से जुड़ी बताई गई है. पुलिस के अनुसार, वह सोने की खरीद-बिक्री के जरिए ठगी की रकम को नकदी में बदलने की प्रक्रिया में भी अहम भूमिका निभाता था. जांच में यह जानकारी सामने आई कि सोना बेचने से मिली राशि का एक हिस्सा अपने पास रखने के बाद बाकी रकम अन्य सहयोगियों और APK डेवलपर के बीच बांटी जाती थी. पुलिस इस संबंध में वित्तीय लेनदेन की कड़ियों की जांच कर रही है.

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दूसरे आरोपी मोहम्मद तौसीफ रजा के बारे में पुलिस का कहना है कि वह मूल रूप से कोलकाता का रहने वाला है और वर्तमान में बेंगलुरु में रह रहा था. प्रारंभिक जांच में उसकी भूमिका सोने के सिक्कों और आभूषणों की खरीद, नकदी निकालने और ठगी से हासिल रकम को इधर-उधर करने से जुड़ी सामने आई है. पुलिस के अनुसार, ज्वैलर्स और पेट्रोल पंप जैसे माध्यमों का इस्तेमाल करके भी रकम के लेनदेन की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता था. सोने के सिक्के खरीदने के लिए QR कोड भेजे जाते थे और पीड़ित के मोबाइल से ऑनलाइन भुगतान कराया जाता था. इसके अलावा, एटीएम के जरिए नकदी निकालने का तरीका भी इस्तेमाल किए जाने की जानकारी जांच में सामने आई है.

तीसरी आरोपी ज़ोया खान बेंगलुरु में रह रही थी. पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, वह सोना खरीदने के लिए QR कोड भेजने, भुगतान की व्यवस्था करने और फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल करने में शामिल थी. जांच में खरीदे गए सोने को बेचने की प्रक्रिया में भी उसकी भूमिका सामने आई है. पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क में रकम को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने और सोने की खरीद-बिक्री के जरिए नकदी जुटाने के लिए अलग-अलग लोगों को जिम्मेदारी दी गई थी. ज़ोया खान की भूमिका के संबंध में पुलिस वित्तीय लेनदेन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है.

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जांच में एक और तरीका सामने आया है, जिसका इस्तेमाल आरोपी APK फाइलों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए करते थे. पुलिस के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक प्रोफाइल बनाते थे और इनमें युवतियों की तस्वीरों का इस्तेमाल किया जाता था. इसके बाद लोगों से बातचीत करके उनका भरोसा जीतने की कोशिश की जाती थी. भरोसा कायम होने के बाद उन्हें APK फाइल भेजी जाती थी. इस तरीके का मकसद लोगों के मन में शक कम करना और उन्हें फाइल इंस्टॉल करने के लिए तैयार करना था.

पुलिस के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति फाइल भेजने वाले पर संदेह करता या उसे इंस्टॉल करने में हिचकिचाता था, तो आरोपी दूसरा तरीका अपनाते थे. ऐसे मामलों में तौसीफ रजा की महिला मित्र ज़ोया खान की आवाज में ऑडियो संदेश भेजकर लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश की जाती थी. पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि मोबाइल की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव होने पर आरोपी APK फाइल और उससे जुड़े सॉफ्टवेयर को अपग्रेड करते थे. इस तरह वे अपनी तकनीकी व्यवस्था को बनाए रखते थे. जांच के दौरान पुलिस को अलग-अलग नामों से भेजी जाने वाली 19 प्रकार की APK फाइलों का विवरण मिला है.

पुलिस के अनुसार, इन APK फाइलों के नाम ऐसे रखे जाते थे कि लोग उन्हें सामान्य और भरोसेमंद फाइल समझ लें. शादी के निमंत्रण पत्र, बैंकिंग सेवाओं और परिवहन सेवाओं से जुड़े नामों का इस्तेमाल इसी उद्देश्य से किया जाता था. सोशल मीडिया और व्हाट्सएप के जरिए फाइलों को लोगों तक पहुंचाने के बाद उन्हें इंस्टॉल करने के लिए प्रेरित किया जाता था. पुलिस अब इन 19 प्रकार की फाइलों और उनसे जुड़े तकनीकी नेटवर्क की जांच कर रही है. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस तरीके से कितने अन्य लोगों को निशाना बनाया गया और नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है.

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कोलकाता और बेंगलुरु में आरोपियों की गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन, सोने के सिक्के, सोने की चेन, नकदी और अलग-अलग बैंकों के कार्ड जब्त किए. पुलिस के मुताबिक, जब्त सामान में 4.95 लाख रुपये कीमत के 11 मोबाइल फोन शामिल हैं. इसके अलावा, अलग-अलग वजन के सोने के 13 सिक्के और सोने की चेन सहित कुल 11,92,214 रुपये मूल्य का सोना जब्त किया गया. पुलिस ने 1.29 लाख रुपये नकद, विभिन्न बैंकों के 18 क्रेडिट और डेबिट कार्ड तथा अलग-अलग कंपनियों के सात सिम कार्ड भी बरामद किए हैं. पुलिस के अनुसार, जब्त किए गए सामान की कुल कीमत 18,16,214 रुपये है.

पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों से जुड़े बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई भी की है. इन खातों के जरिए हुए लेनदेन का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि साइबर ठगी से हासिल रकम के स्रोत और उसके इस्तेमाल का पता लगाया जा सके. जांच में बैंक खातों से ज्वैलर्स तक रकम पहुंचाने, सोना खरीदने और फिर उसे बेचकर नकदी जुटाने की प्रक्रिया की जानकारी सामने आई है. पुलिस अलग-अलग खातों और लेनदेन के बीच संबंधों की जांच कर रही है. इसके साथ ही नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और ठगी की रकम के आगे के इस्तेमाल का पता लगाने की कोशिश की जा रही है.

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राजकोट ग्रामीण साइबर क्राइम पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान कुल सात अपराधों का पता लगाया गया है. इनमें राजकोट ग्रामीण साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन और धोराजी तालुका पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले शामिल हैं. इसके अलावा, दादरा और नगर हवेली के सिलवासा, उदयपुर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, मुंबई के भायखला पुलिस स्टेशन और राजकोट शहर के थोराला पुलिस स्टेशन में दर्ज अपराध भी जांच के दायरे में आए हैं. इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) सहित संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है. साथ ही, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66C और 66D भी शामिल हैं, जबकि कुछ मामलों में अन्य धाराएं भी लागू की गई हैं.

पुलिस की जांच में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज 24 शिकायतों का भी विवरण सामने आया है. इन शिकायतों में कुल 21,28,969 रुपये की साइबर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. शिकायतों में राजकोट, जामनगर, वलसाड, सूरत, अहमदाबाद, वडोदरा और जूनागढ़ सहित गुजरात के अलग-अलग शहरों के पीड़ितों का विवरण शामिल है. पुलिस ने ऐसे अन्य संभावित पीड़ितों की जानकारी भी जुटाई है, जिनके साथ धोखाधड़ी हुई थी, लेकिन उनके पास 1930 पर दर्ज शिकायत का एक्नॉलेजमेंट नंबर तत्काल उपलब्ध नहीं था. ऐसे मामलों में भी जानकारी जुटाकर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है.

पुलिस के अनुसार, गुजरात के बाहर के राज्यों में हुई साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं के संबंध में संबंधित पुलिस इकाइयों के साथ समन्वय किया जाएगा. इसके जरिए पीड़ितों की शिकायत दर्ज कराने और जांच को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े नेटवर्क ने किन-किन राज्यों में लोगों को निशाना बनाया. इसके लिए बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है. पुलिस का कहना है कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

पुलिस की अपील

इस मामले में सामने आए तरीकों से स्पष्ट है कि साइबर ठग परिचित लोगों के नाम और भरोसेमंद दिखने वाले संदेशों का इस्तेमाल करके लोगों को निशाना बना सकते हैं. शादी के निमंत्रण, कूरियर, बिजली बिल या ई-चालान के नाम से आई किसी अनजान APK फाइल को इंस्टॉल करने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है. किसी परिचित के व्हाट्सएप अकाउंट से फाइल आने पर भी संबंधित व्यक्ति से अलग माध्यम से इसकी पुष्टि करनी चाहिए. अनजान फाइल इंस्टॉल करने या संदिग्ध लिंक खोलने से मोबाइल और बैंकिंग संबंधी जानकारी जोखिम में पड़ सकती है. साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत बैंक को सूचना दें और हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं.

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