
लखनऊ के सआदतगंज में पूर्व मर्चेंट नेवी ऑफिसर ने तीन लोगों को गोलियों से भून डाला. इस खूनी वारदात को अंजाम देने के बाद 'कातिल' ऋषभ शुक्ला एक हाथ में पिस्टल और दूसरे में मैगजीन लेकर घर के बाहर बैठा रहा. उसने तड़पते घायलों की मदद करने वालों को भी दी गोली मारने की धमकी दी थी. दहशत ऐसी कि पूरा मोहल्ला कांप उठा. वहीं, मौके पर पहुंची पुलिस 'कातिल' के घर के अंदर का नजारा देखकर दंग रह गई. उसके पूरे घर में कूड़े और गंदगी का अंबार मिला.
स्थानीय लोगों के मुताबिक, 5 दिसंबर को मृतक सुयश तिवारी की बारात जानी थी. जबकि, पास में ही रहने वाले कुंवारे ऋषभ को शादी न होने के कारण ताने मिलते थे. ऊपर से दोनों पक्षों में पार्किंग और चबूतरा बनवाने को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था. सोमवार को इस विवाद ने खूनी रूप ले लिया. आरोप है कि ऋषभ शुक्ला ने पहले तो गाली-गलौच की फिर पिस्टल से शिवाजी तिवारी, शंभू तिवारी और सुयश तिवारी पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. इसमें तीनों लोगों की मौत हो गई.
सआदतगंज के नौबस्ता में हुए इस खौफनाक कांड से राजधानी दहल उठी. खुद पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा दल-बल के साथ घटनास्थल पहुंचे. उन्होंने पीड़ित परिवार से भी मुलाकात की. कमिश्नर ने बताया कि आरोपी को पकड़ लिया गया है. मामले की जांच-पड़ताल की जा रही है. सख्त एक्शन लिया जाएगा. वहीं, पोस्टमॉर्टम हाउस पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया. उन्होंने 'हत्यारे' को फांसी और घर पर बुलडोजर चलाने की मांग की. आज यानि मंगलवार को तीनों शवों का अंतिम संस्कार किया जाएगा. इसके लिए पुलिस के साथ पीएसी भी लगाई गई है.
ऋषभ के सिर पर सवार था खून
यूपी की राजधानी लखनऊ के सआदतगंज में सोमवार को दिनदहाड़े हुए ट्रिपल मर्डर ने पूरे शहर को दहला दिया है. नौबस्ता इलाके में चबूतरे और पार्किंग के विवाद में मर्चेंट नेवी में नेविगेशन ऑफिसर रहे ऋषभ शुक्ला ने पिस्टल से अंधाधुंध फायरिंग कर एक ही परिवार के तीन लोगों को मौत के घाट उतार दिया. इस खौफनाक वारदात के बाद भी आरोपी के सिर से खून का नशा नहीं उतरा और उसकी बेरुखी व आक्रामकता देखकर पूरा मोहल्ला कांप उठा.

चश्मदीदों के मुताबिक, तीनों को गोली मारने के बाद भी ऋषभ का गुस्सा शांत नहीं हुआ था. वह एक हाथ में पिस्टल और दूसरे हाथ में मैगजीन लेकर अपने घर के बाहर बैठ गया. वह आसपास के लोगों को खूंखार नजरों से घूर रहा था ताकि कोई भी तड़पते हुए घायलों की मदद के लिए आगे न आ सके. लोगों में इस बात की दहशत थी कि अगर कोई घायलों को बचाने पहुंचा, तो ऋषभ उसे भी गोली मार देगा. इसी खौफ के चलते कोई भी तुरंत मदद के लिए आगे नहीं बढ़ सका और समय पर इलाज न मिलने से तीनों की जान चली गई. कुछ देर तक बाहर बैठकर दहशत फैलाने के बाद आरोपी खुद ही उठकर घर के अंदर चला गया.
कमिश्नर, जेसीपी क्राइम, डीसीपी मौके पर पहुंचे
वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा, जेसीपी क्राइम, डीसीपी पश्चिम जितेंद्र श्रीवास्तव और एसीपी समेत कई बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे. घटनास्थल का मुआयना करने के बाद जब जांच टीम आरोपी ऋषभ के घर के अंदर दाखिल हुई, तो वहां का नजारा देखकर पुलिसकर्मी भी दंग रह गए. डीसीपी पश्चिम ने बताया कि पूरे घर में हर तरफ कूड़ा फैला हुआ था और गंदगी का अंबार लगा था, जिससे आरोपी के रहने के तौर-तरीकों पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
ऐसे हुई वारदात
घटना के चश्मदीद जितेंद्र कश्यप ने बताया कि सुबह चबूतरे का काम शुरू हुआ था. इसी दौरान गाड़ी हटाने की बात पर ऋषभ शुक्ला ने गाली-गलौज शुरू कर दी. विरोध करने पर विवाद बढ़ गया. शोर सुनकर मोहल्ले के कई लोग घरों से बाहर आ गए. इसके बाद दोनों पक्ष एक-दूसरे का वीडियो बनाने लगे. जितेंद्र का दावा है कि ऋषभ पहले से ही गन लेकर आया था. जितेंद्र के अनुसार, ऋषभ के पास गन होने की जानकारी उसके पिता राजेश शुक्ला को भी थी. विवाद बढ़ने पर ऋषभ ने अचानक गन निकाल ली. उसे रोकने के लिए शिवा, उनके भाई शंभू और बेटे सुयश ने पकड़ लिया. गन देखकर मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोग बीच-बचाव के लिए आगे बढ़े.
जितेंद्र का आरोप है कि इसी दौरान ऋषभ के पिता राजेश ने सुयश के सिर पर डंडा मार दिया. सुयश को डंडा लगते ही ऋषभ पर उसकी पकड़ ढीली पड़ गई. इसका फायदा उठाकर ऋषभ छूट गया और फायरिंग शुरू कर दी. जितेंद्र के मुताबिक, पहली गोली शिवा को लगी, इसके बाद शंभू और सुयश को गोली लगी. चश्मदीद जितेंद्र कश्यप ने आगे बताया कि वह ऋषभ को रोकने के लिए आगे बढ़ा तो आरोपी ने उस पर भी दो राउंड फायरिंग कर दी. जितेंद्र के अनुसार, वह किसी तरह बच गया और गोली उसके पैर के बीच से निकल गई. इसके बाद वह अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकला. जितेंद्र का दावा है कि फायरिंग के बाद आरोपी गन और मैगजीन लेकर शव के पास ही बैठा रहा, ताकि कोई उसके करीब न आ सके.
दबंगई और निजी कुंठा
स्थानीय लोगों के बीच इस हत्याकांड के पीछे आरोपी की बढ़ती दबंगई और निजी कुंठा की भी खूब चर्चा है. बताया जा रहा है कि ऋषभ के चाचा राजेश शुक्ला पर पहले से आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और पुलिस ने उन्हें छह महीने के लिए जिला बदर किया था. कुछ दिन पहले ही जिला बदर की मियाद पूरी होने पर राजेश वापस लौटा था, जिसके बाद से ऋषभ का व्यवहार बदल गया था. वह आने-जाने वालों से गाली-गलौज करता और देख लेने की धमकी देता था, जिससे लोग उससे उलझने से बचते थे.
इसके अलावा मोहल्ले में ऋषभ के कुंवारे होने और ताने मिलने की भी चर्चा है. मृतक सुयश तिवारी की शादी तय हो चुकी थी और आगामी 5 दिसंबर को उसकी बारात जानी थी. एक तरफ सुयश के परिवार में शादी की तैयारियों और खुशियों का माहौल था, तो दूसरी तरफ शादी न होने की वजह से ऋषभ को ताने सुनने पड़ते थे. हालांकि, पुलिस ने अभी तक इसे हत्या की वजह मानने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
मोहल्ले के लोगों ने क्या बताया?
अचानक हुई इस वारदात से मृतक सुयश तिवारी के दोस्त बृजेश और सागर गौड़ गहरे सदमे में हैं. दोस्तों ने बताया कि सुयश बेहद शांत और मिलनसार स्वभाव का था. वह इलाके के धार्मिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता था और हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहता था. ऐसे मददगार युवक की इस तरह नृशंस हत्या ने सभी को झकझोर कर रख दिया है.
शीतला देवी वार्ड के पार्षद अनूप कुमार सक्सेना के मुताबिक, पिछले महीने नौबस्ता में सड़क निर्माण का काम हुआ था. इस दौरान निर्माण सामग्री कुछ बच गई थी. इसी बीच शिवाजी ने उनसे संपर्क कर चबूतरा बनवाने की मांग की थी. अनूप कुमार सक्सेना ने बताया कि वह मौके पर पहुंचे तो दोनों परिवारों के बीच विवाद की जानकारी हुई. उन्होंने आपसी सुलह कराने की बात कही और वहां से चले गए, लेकिन विवाद नहीं सुलझा. इसके बाद 21 सितंबर को दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई. इस दौरान मौके पर स्थिति जैसी है, वैसी ही बनाए रखने पर सहमति बनी थी.