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Jio IPO कब आएगा? आप भी करेंगे अप्लाई... जानिए स्टेप-बाय-स्टेप नियम

SEBI Rule on IPO: नियम के मुताबिक जिस दिन सेबी का ऑब्जर्वेशन लेटर जारी होता है, उसी दिन से समय काउंट होने लगता है, और कंपनी को एक साल के भीतर IPO  लॉन्च करना होता है.

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आम जनता में जियो आईपीओ को लेकर चर्चा. (Photo: ITG)
आम जनता में जियो आईपीओ को लेकर चर्चा. (Photo: ITG)

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने शुक्रवार को जियो आईपीओ (Jio Platforms Limited) की घोषणा की. उसके बाद से ही इसकी खूब चर्चा हो रही है. सबसे ज्यादा लोग ये जानना चाह रहे हैं कि कब IPO आएगा? IPO से जुड़ीं तमाम जानकारियां लोग सर्च कर रहे हैं. 

दरअसल, मुकेश अंबानी ने AGM में कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडियरी Jio Platforms के बोर्ड ने IPO को लेकर मंजूरी दे दी है, और 19 जून को ही ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) सेबी में जमा कराए जाएंगे. यानी सेबी के पास अप्रूवल को लेकर अप्लीकेशन लगाए जाएंगे.

अब जानते हैं, इसमें सेबी क्या भूमिका होती है? 
SEBI के अनुसार किसी भी कंपनी को DRHP फाइल करने के तुरंत बाद आईपीओ लॉन्च करने की अनुमति नहीं होती है. DRHP फाइल करने से लेकर IPO लॉन्च करने तक के नियम निर्धारित हैं. जिसमें DRHP फाइलिंग पहला चरण होता है. DRHP फाइल होने के बाद इसे कम से कम 21 दिनों के लिए पब्लिक डोमेन पर रखा जाता है, ताकि जनता या इन्वेस्टर्स इस पर अपनी आपत्तियां या सुझाव दे सकें. 

इस दौरान सेबी और मर्चेंट बैंकर्स ड्राफ्ट की बारीकी से जांच करते हैं. आमतौर पर सेबी 30 दिनों के भीतर कंपनी से स्पष्टीकरण मांगता है. सेबी जब कंपनी के जवाबों और दस्तावेजों से पूरी तरह संतुष्ट हो जाता है, तो वह अपना ऑब्जर्वेशन लेटर जारी करता है. जिसे सेबी अप्रूवल कहते हैं. 

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असली टाइमलाइन का नियम यहीं से शुरू होता है, सेबी का ऑब्जर्वेशन लेटर जारी होने की तारीख से 12 महीने यानी एक साल  के भीतर कंपनी को अपना IPO मार्केट में लॉन्च करना अनिवार्य होता है. अगर कंपनी इस 12 महीने की अवधि के भीतर IPO नहीं ला पाती है, तो सेबी की मंजूरी खत्म हो जाती हैं, ऐसी स्थिति में कंपनी को नए सिरे से दोबारा DRHP फाइल करना पड़ता है. पहले 6 महीने का वक्त दिया जाता था. लेकिन अप्रैल- 2026 में वैश्विक हालात को देखते हुए SEBI द्वारा नियमों में बदलाव करते हुए 1 साल का वक्त कर दिया गया है. 

ऑब्जर्वेशन लेटर से काउंट डाउन शुरू...

नियम के मुताबिक जिस दिन सेबी का ऑब्जर्वेशन लेटर जारी होता है, उसी दिन से समय काउंट होने लगता है, और कंपनी को एक साल के भीतर IPO  लॉन्च करना होता है. इस कड़ी में जब कंपनी सेबी अप्रूवल के बाद IPO लाने की तैयारी कर लेती है, तो फिर लॉन्च से कुछ दिन पहले प्राइस बैंड और इश्यू साइज तय करके रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) और सेबी के पास फाइनल RHP फाइल करती है. 

आईपीओ खुलने से कम से कम 5 वर्किंग डेज पहले कंपनी को अखबारों में विज्ञापन देकर आईपीओ ओपन होने और बंद होने की तारीखों की घोषणा करनी होती है. आईपीओ खुलने से 1 दिन पहले एंकर इन्वेस्टर्स (बड़े संस्थागत निवेशक) के लिए बिडिंग विंडो खोली जाती है. उसके बाद तीन दिन  तक आईपीओ आम जनता और रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए खुलता है. सेबी के नियम के मुताबिक आईपीओ को बिडिंग के लिए कम से कम 3 वर्किंग डेज और अधिकतम 10 वर्किंग डेज तक खुला रखा जा सकता है. 

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कब तक आ सकता है रिलायंस Jio आईपीओ?

DRHP फाइल करने के कितने दिन बाद IPO अक्सर कितने दिन में लॉन्च होता है. DRHP फाइल होने की तारीख से IPO लॉन्च होने में औसतन 4 महीने का समय लग जाता है. अक्सर कंपनियां सेबी की मंजूरी लेकर बैठी रहती हैं और जैसे ही मार्केट में तेजी या अच्छा सेंटिमेंट दिखता है, वे तुरंत अपना RHP फाइल कर आईपीओ लॉन्च कर देती हैं. यानी Jio IPO आने में अभी 3 से 4 महीने का वक्त लग सकता है.

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