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FD, गोल्ड, प्रॉपर्टी का खत्म हो रहा क्रेज? जानें भारतीय अब कहां लगा रहे पैसे

भारतीय निवेशकों का पारंपरिक वेल्थ फॉर्मूला अब तेजी से बदल रहा है. इक्विटी, FD, गोल्ड और रियल एस्टेट के साथ क्रिप्टो, प्राइवेट क्रेडिट, स्ट्रक्चर्ड डेट और इंटरनेशनल एसेट्स जैसे विकल्प भी पोर्टफोलियो में जगह बना रहे हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, खासकर युवा और हाई-नेट-वर्थ निवेशक डाइवर्सिफिकेशन पर जोर दे रहे हैं.

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भारतीय निवेशक वेल्थ बनाने का अपना फॉर्मूला बदल रहे हैं; क्रिप्टो, प्राइवेट क्रेडिट और ग्लोबल एसेट्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. (सांकेतिक तस्वीर)
भारतीय निवेशक वेल्थ बनाने का अपना फॉर्मूला बदल रहे हैं; क्रिप्टो, प्राइवेट क्रेडिट और ग्लोबल एसेट्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

भारतीय निवेशकों के लिए वेल्थ बनाने का पारंपरिक फॉर्मूला अब धीरे-धीरे बदल रहा है. इक्विटी, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), गोल्ड और रियल एस्टेट आज भी ज्यादातर पोर्टफोलियो की बुनियाद हैं, लेकिन इनके साथ प्राइवेट क्रेडिट, स्ट्रक्चर्ड डेट, रियल एसेट्स, इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट्स और क्रिप्टो जैसे नए एसेट क्लास भी जगह बना रहे हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निवेश के पुराने विकल्प खत्म नहीं हो रहे, बल्कि निवेशकों के पोर्टफोलियो पहले के मुकाबले ज्यादा विविध हो रहे हैं.

इस बदलाव की एक बड़ी वजह निवेशकों की बदलती प्रोफाइल है. आज निवेशक पहले की तुलना में कम उम्र में निवेश शुरू कर रहे हैं और उनके पास फाइनेंस से जुड़ी जानकारी पाने के स्रोत भी ज्यादा हैं. डिजिटल फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के बढ़ते इस्तेमाल ने भी निवेश के नए विकल्पों तक पहुंच आसान की है. CoinDCX की मीनल ठुकराल के मुताबिक, पारंपरिक एसेट्स आगे भी निवेश पोर्टफोलियो की नींव बने रहेंगे. हालांकि, 35 साल से कम उम्र के निवेशकों में ग्लोबल और हाई-ग्रोथ एसेट क्लास में एक्सपोजर लेने की इच्छा बढ़ी है. उनके अनुसार, क्रिप्टो इसी बदलती मांग की एक प्रमुख अभिव्यक्ति बनकर सामने आया है.

क्रिप्टो की बदलती भूमिका

मीनल ठुकराल का कहना है कि क्रिप्टो निवेशक अब पहले की तुलना में ज्यादा परिपक्व हो रहे हैं और उनका फोकस बिटकॉइन और एथेरियम जैसे स्थापित टोकन्स पर बढ़ रहा है. उनके मुताबिक, 2021 तक कई भारतीय निवेशकों के लिए क्रिप्टो का मतलब मीम कॉइन्स तक सीमित था, लेकिन अब यह धारणा बदल रही है. उनका मानना है कि क्रिप्टो भी उसी तरह विकसित हो रहा है, जैसे भारत में इक्विटी निवेश का बाजार धीरे-धीरे परिपक्व हुआ. छोटे निवेश के जरिए अनुशासित तरीके से क्रिप्टो में पैसा लगाने का चलन बढ़ रहा है, जो म्यूचुअल फंड में SIP के बढ़ते इस्तेमाल जैसा नजर आता है.

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एक ही एसेट क्लास पर निर्भरता कम

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में वेल्थ क्रिएशन किसी एक एसेट क्लास पर निर्भर नहीं रहेगा. निवेशकों के पास अब इंटरनेशनल एसेट्स और कई तरह के अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट्स के विकल्प हैं, जो पहले मुख्य रूप से संस्थागत निवेशकों तक सीमित थे. मीनल ठुकराल के मुताबिक, पोर्टफोलियो का संतुलन अब ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है. निवेश का बंटवारा व्यक्ति की रिस्क एपेटाइट, वित्तीय लक्ष्य और टाइम होराइजन के आधार पर होना चाहिए. क्रिप्टो को किसी अलग या सट्टेबाजी वाले दांव के तौर पर देखने के बजाय बड़े फाइनेंशियल प्लान के एक हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए.

निवेश से पहले एसेट को समझना जरूरी

ठुकराल के मुताबिक, किसी भी एसेट में पैसा लगाने से पहले उसके काम करने के तरीके को समझना जरूरी है. बिटकॉइन की खासियत इसकी सीमित सप्लाई और कमी पर आधारित संरचना है, जबकि एथेरियम स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स और डिसेंट्रलाइज्ड एप्लिकेशंस को सपोर्ट करता है. उनका कहना है कि निवेशकों को सिर्फ इसलिए किसी एसेट में पैसा नहीं लगाना चाहिए क्योंकि वह ट्रेंड में है. जिस निवेश को वे समझते नहीं हैं, उसमें सिर्फ बाजार की तेजी देखकर पैसा लगाना जोखिम बढ़ा सकता है.

अमीर निवेशकों में अल्टरनेटिव्स का रुझान

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अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट्स की ओर बढ़ता रुझान सिर्फ युवा निवेशकों तक सीमित नहीं है. क्वांटम एसेट मैनेजमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड में चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर चिराग मेहता के मुताबिक, हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) और फैमिली ऑफिस भी प्राइवेट क्रेडिट, स्ट्रक्चर्ड डेट और रियल एसेट्स की ओर बढ़ रहे हैं. उनके अनुसार, AIF कमिटमेंट्स पिछले एक दशक में कई गुना बढ़कर ₹12 लाख करोड़ से अधिक हो चुके हैं. Category II AIFs, जिनमें प्राइवेट क्रेडिट और रियल एस्टेट जैसी रणनीतियां शामिल हैं, इस वृद्धि का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं. मेहता के मुताबिक, इस बदलाव के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं- पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन की जरूरत, निवेशकों की बेहतर जानकारी और बेहतर निवेश संरचनाओं तक बढ़ती पहुंच.

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प्राइवेट क्रेडिट और सिक्योर्ड डेट पर फोकस

चिराग मेहता के अनुसार, हर अल्टरनेटिव निवेश में पैसा कई वर्षों के लिए लॉक होना जरूरी नहीं है. अरबोर फिलहाल नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) के जरिए डेट सिंडिकेशन पर फोकस कर रहा है. उनके मुताबिक, स्ट्रक्चर्ड रियल एस्टेट-बैक्ड इंस्ट्रूमेंट्स निवेशकों को तय अवधि, कूपन और एसेट-लेवल सिक्योरिटी जैसी विशेषताएं दे सकते हैं. वह सिक्योर्ड डेट को रियल एस्टेट में निवेश का एक ऐसा विकल्प मानते हैं, जो जोखिम और रिटर्न के लिहाज से FD और इक्विटी फंड के बीच की जगह भर सकता है. हालांकि, ऐसे निवेशों में भी जोखिम मौजूद रहता है और रिटर्न की गारंटी नहीं होती.

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रियल एस्टेट में बदल रहा निवेश का तरीका

रियल एस्टेट निवेश अब सीधे किसी प्रॉपर्टी का मालिक बनने तक सीमित नहीं रह गया है. चिराग मेहता के मुताबिक, अरबोर SEBI-रेग्युलेटेड Category II AIF लॉन्च करने की प्रक्रिया में है. प्रस्तावित फंड हाई-ग्रोथ मार्केट्स में डेवलपमेंट-लेड और प्राइवेट-इक्विटी रियल एस्टेट के अवसरों पर फोकस करेगा. फर्म मिड-टू-हाई टीन्स IRR का लक्ष्य रख रही है, लेकिन यह गारंटीड रिटर्न नहीं है. कंपनी का फोकस कड़े और पैरामीटर-आधारित अंडरराइटिंग, डेवलपमेंट लाइफसाइकल में सक्रिय भागीदारी और वैल्यू क्रिएशन पर है.

नए विकल्पों का मतलब ज्यादा जोखिम नहीं

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निवेशकों को यह नहीं समझना चाहिए कि नए एसेट क्लास की बढ़ती लोकप्रियता के कारण पारंपरिक निवेश विकल्प अप्रासंगिक हो गए हैं. ज्यादा विकल्प मिलने का मतलब यह भी नहीं है कि निवेशक को ज्यादा जोखिम लेना चाहिए. मीनल ठुकराल के मुताबिक, अल्टरनेटिव एसेट्स के लिए हर रिटेल निवेशक पर लागू होने वाला कोई तय प्रतिशत नहीं है. निवेश से पहले वित्तीय लक्ष्य, रिस्क एपेटाइट, निवेश की अवधि, लिक्विडिटी की जरूरत और पूरे पोर्टफोलियो को ध्यान में रखना चाहिए. ऐसे एसेट्स में पैसा लगाने से बचना चाहिए, जिनमें नुकसान होने पर वित्तीय स्थिति पर बड़ा असर पड़ सकता है. सोशल मीडिया के ट्रेंड या छोटी अवधि की तेजी देखकर निवेश का फैसला करना भी जोखिम बढ़ा सकता है.

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चिराग मेहता के मुताबिक, निवेशकों को सिर्फ संभावित रिटर्न पर ध्यान नहीं देना चाहिए. उन्हें यह भी देखना चाहिए कि पैसा कौन मैनेज कर रहा है, पूंजी कितनी सुरक्षित है और निवेश के खराब प्रदर्शन की स्थिति में क्या होगा. आने वाले समय में भारत की वेल्थ क्रिएशन स्टोरी किसी एक एसेट क्लास तक सीमित रहने के बजाय डेट और इक्विटी, इनकम और ग्रोथ तथा पब्लिक और प्राइवेट मार्केट्स के मिश्रण से आगे बढ़ सकती है. वहीं, टोकनाइज्ड रियल-वर्ल्ड एसेट्स जैसे नए सेगमेंट की रफ्तार पर रेग्युलेटरी स्पष्टता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

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