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3922 टन वजन, 1.3KM लंबी, एक के ऊपर एक कंटेनर... तेज रफ्तार में दौड़ी ट्रेन, रेलमंत्री ने शेयर किया वीडियो

भारत की पहली डबल स्‍टैक ट्रेन का वीडियो रेलमंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने शेयर किया है, जो करीब 4000 टन वजन लेकर चल रही है और यह 1.3 किलोमीटर लंबी है. इसे दो इंजन खींच रहे हैं.

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भारत की लंबी दूरी वाली पहली डबल स्‍टैक मालगाड़ी. (Photo: PTI/@AshwiniVaishnaw)
भारत की लंबी दूरी वाली पहली डबल स्‍टैक मालगाड़ी. (Photo: PTI/@AshwiniVaishnaw)

भारतीय रेलवे की एक मालगाड़ी ट्रेन का वीडियो रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने शेयर किया है. यह ट्रेन 1.3 किलोमीटर लंबी है और इससे भी खास बात है कि यह डबल स्‍टैक कंटेनर (एक के ऊपर एक कंटेनर) लेकर चल रही है. यह भारत की पहली डबल स्‍टैक कंटेनर लेकर चलने वाली ट्रेन है.  

यह ट्रेन मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) से गुजरात के वडोदरा डिवीजन के वर्नामा तक 360 TEU (ट्रांसपोर्टेड ईयू) माल लेकर जा रही है. सोशल मीडिया पर इसका वीडियो शेयर करते हुए अश्‍विनी वैष्णव ने लिखा कि पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे पर पहली लंबी दूरी (1.3 किमी) की डबल स्टैक कंटेनर ट्रेन, जो 21 अगस्त को शाम 7 बजे जेएनपीटी से रवाना हुई और वर्नामा स्थित कॉनकोर के माल कार्गो टर्मिनल (जीसीटी) पहुंचने से पहले लगभग 422 किलोमीटर की दूरी तय की. 

कितना था भार? 
लंबी दूरी की इस रेलगाड़ी में दो डबल-स्टैक रेक शामिल थे, जिनमें से हरेक में 45+1 भार लदा हुआ था. रेलवे द्वारा दी जानकारी के मुताबिक, आगे वाले रेक को लोकोमोटिव नंबर 60311 द्वारा खींचा जा रहा था और इसका भार 1,817 टन था, जबकि पीछे वाले रेक को लोकोमोटिव नंबर 24690 द्वारा खींचा जा रहा था और इसका भार 2,105 टन था. यानी कुल 3,922 टन लेकर ये रेलगाड़ी चली है. 

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एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों रेकों ने मिलकर एक ही बार में 360 टीईयू का परिवहन किया, जिससे लंबी दूरी के संचालन के माध्यम से माल की बड़ी मात्रा को संभालने की रेलवे की क्षमता का प्रदर्शन हुआ. इस अभियान से जेनपीटी से कंटेनरों की निकासी में तेजी आने की उम्‍मीद है, क्‍योंकि इससे एक ही ट्रेन में सबसे ज्‍यादा में माल ढुलाई संभव हो सकेगी. 

डबल स्‍टैक से क्‍या फायदा? 
इससे माल ढुलाई की समान मात्रा के लिए आवश्यक ट्रेन आवागमन की संख्या कम हो सकती है, जिससे टर्मिनलों पर भीड़ कम होगी और रेलवे क्षमता का बेहतर उपयोग होगा. डबल-स्टैक वाली लंबी दूरी की ट्रेनें लोकोमोटिव, कंटेनर फ्लैट वैगन और अन्य रोलिंग स्टॉक की आवश्यकता को भी कम कर सकती हैं.

भारतीय रेलवे के लिए एक बड़ा मुकाम
तेजी से निकासी से बंदरगाहों और टर्मिनलों पर कंटेनरों के रुकने का समय कम हो सकता है. साथ ही कुल माल ढुलाई समय और परिवहन लागत में भी कमी आ सकती है. बिजली से चलने वाली यह ट्रेन भारतीय रेलवे के पर्यावरण-अनुकूल माल परिवहन के प्रयासों का भी समर्थन करती है. ट्रकों की आवश्यकता वाले माल को ले जाने के बजाय, ऐसी ट्रेनें डीजल से चलने वाले सड़क परिवहन पर निर्भरता, सड़क पर भीड़भाड़ और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम कर सकती हैं.

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