शेयर बाजार के निवेशकों के बीच दक्षिण कोरिया की खूब चर्चा हो रही है, हो भी क्यों नहीं? जहां भारतीय बाजार ने एक साल में करीब 9 फीसदी निगेटिव रिटर्न दिया है, वहीं दक्षिण कोरिया की मार्केट कोस्पी ने महज एक साल में 160 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है. यानी भारतीय बाजार ने जितना रिटर्न 10 साल में दिया है, उससे ज्यादा दक्षिण कोरिया के बाजार ने महज एक साल में दे दिया है.
ऐसे में एक आम निवेशक जानना चाहता है कि क्या भारत में रहकर दक्षिण कोरियाई मार्केट में निवेश किया जा सकता है, कैसे कर सकते हैं? इसके क्या-क्या विकल्प हैं? आज हम आपको वे भी रास्ते बताएंगे, जिसके जरिये आप घर बैठे दक्षिण कोरियाई बाजार में निवेश कर सकते हैं.
दरअसल, दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे मजबूत और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन इकोनॉमी में से एक है. सैमसंग, हुंडई और एसके हाइनिक्स जैसी दिग्गज कंपनियां यहीं की हैं. दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार का नाम यानी KRX (Korea Exchange) और इसके मुख्य इंडेक्स KOSPI (Korea Composite Stock Price Index) है.
निवेश करने के मुख्य विकल्प-
1. सबसे आसान तरीका- ETF
दक्षिण कोरिया के बाजार में सीधे शेयर खरीदने की बजाय ETF के जरिए निवेश करना सबसे सुरक्षित और आसान माना जाता है. आप अंतरराष्ट्रीय ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म्स जैसे कि Vested, INDmoney, Interactive Brokers के जरिए अमेरिकी शेयर बाजार में लिस्टेड दक्षिण कोरियाई फोक्स्ड ETFs में निवेश कर सकते हैं.
उदाहरण के लिए iShares MSCI South Korea ETF (EWY) सीधे दक्षिण कोरिया की शीर्ष कंपनियों में निवेश करता है. यह दुनिया का सबसे लोकप्रिय और बड़ा कोरियाई केंद्रित ETF है. यह फंड सीधे दक्षिण कोरिया की लगभग सभी दिग्गज कंपनियों Samsung Electronics, SK Hynix, Hyundai Motor, POSCO को ट्रैक करता है. इसमें निवेश करने का मतलब है कि आपका पैसा सीधे कोरिया की टॉप 80+ कंपनियों में लग रहा है.
Franklin FTSE South Korea ETF (Ticker: FLKR): यह फ्रैंकलिन टेम्पलटन का एक और बेहतरीन कोरिया-फोकस्ड ETF है. इसका एक्सपेंस रेशियो आमतौर पर काफी कम होता है, जिससे यह लंबी अवधि के निवेशकों के लिए एक किफायती विकल्प बनता है.
Direxion Daily South Korea Bull 3X Shares (Ticker: KORU): यह एक लेवरेज्ड ETF है जो कोरियाई बाजार के दैनिक उतार-चढ़ाव को 3 गुना रिर्टन या लॉस के साथ ट्रैक करता है. यह फंड केवल आक्रामक ट्रेडर्स के लिए है.
2. म्यूचुअल फंड्स (फंड ऑफ फंड्स)
भारतीय म्यूचुअल फंड हाउस कई ऐसी स्कीम्स ऑफर करते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश करती हैं. आप ऐसी 'फंड ऑफ फंड्स' (FoF) या लार्ज-कैप इमर्जिंग मार्केट फंड्स में निवेश कर सकते हैं, जिनका एलोकेशन दक्षिण कोरियाई स्टॉक मार्केट (KOSPI 200 की कंपनियों) में हो. इसके लिए आपको किसी विदेशी ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत नहीं होती. यानी Groww, Zerodha, Coin की मदद से आप कोरियाई म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं.
हालांकि फिलहाल भारत में कोई ऐसा प्योर साउथ कोरिया सेंट्रिक म्यूचुअल फंड नहीं है, जो सिर्फ और सिर्फ कोरिया में पैसा लगाता हो, लेकिन कई ऐसे ग्लोबल और एशियाई फंड्स हैं, जिनके पोर्टफोलियो में दक्षिण कोरियाई कंपनी खासकर सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स का बहुत बड़ा आवंटन होता है.
Mirae Asset Great Consumer Fund/ Mirae Asset Global Funds: मिरे एसेट मूल रूप से दक्षिण कोरिया का ही सबसे बड़ा वित्तीय ग्रुप है, इसलिए इनके कई ग्लोबल और इमर्जिंग फंड्स का एक बड़ा हिस्सा कोरियाई मार्केट की दिग्गज कंपनियों में निवेशित रहता है. इनके फंड ऑफ फंड्स (FoF) पर नजर रख सकते हैं.
Edelweiss Emerging Markets Opportunities Equity Fund: यह फंड दक्षिण कोरिया, ताइवान और ब्राजील जैसे उभरते बाजारों की बड़ी कंपनियों में पैसा लगाता है. इसके पोर्टफोलियो का एक अच्छा-खासा फीसदी कोरियाई इंडेक्स KOSPI की टॉप-नॉच कंपनियों में जाता है.
Schroder International Selection Fund- Emerging Asia: यह एशिया के उभरते बाजारों को टारगेट करता है, जिसमें दक्षिण कोरियाई टेक और ऑटोमोबाइल सेक्टर्स को अच्छा वेटेज दिया जाता है.
3. अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स (ADRs)
अगर आप दक्षिण कोरिया की किसी खास कंपनी उदाहरण के लिए सैमसंग या Hyundai के शेयर सीधे खरीदना चाहते हैं, तो अमेरिकी बाजारों (NYSE या NASDAQ) पर लिस्टेड उनके ADR के जरिए ऐसा कर सकते हैं. इसके लिए आपके पास एक चालू अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग अकाउंट होना जरूरी है.
निवेश की प्रक्रिया और जरूरी नियम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत, एक भारतीय नागरिक कानूनी रूप से एक वित्तीय वर्ष में $2,50,000 तक की राशि विदेश में निवेश कर सकता है.
अगर आप सीधे इक्विटी मार्केट में लगाना चाहते हैं तो फिर किसी वैश्विक ब्रोकर के साथ खाता खोलें जो भारतीय नागरिकों को विदेशी बाजारों, खासकर अमेरिकी या एशियाई बाजारों में निवेश की अनुमति देता हो.
केवाईसी (KYC) और फंड ट्रांसफर
इसके लिए पैन कार्ड, बैंक स्टेटमेंट और पहचान पत्र देकर अकाउंट एक्टिवेट कराना होता है. फिर भारतीय बैंक खाते से LRS नियमों के तहत विदेशी ब्रोकर खाते में पैसे ट्रांसफर करना होगा. विदेशी निवेश पर टीसीएस और विदेशी मुद्रा विनिमय शुल्क देना होता है. इसके अलावा मुनाफे पर लागू होने वाले कैपिटल गेंस टैक्स को भी ध्यान में रखना जरूरी है.
बता दें, दक्षिण कोरिया का बाजार मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर निर्भर है, इसलिए तकनीकी समझ रखने वाले और पोर्टफोलियो को वैश्विक स्तर पर डायवर्सिफाई करने की इच्छा रखने वाले निवेशकों के लिए यह एक शानदार विकल्प है.
सीधे दक्षिण कोरिया के बाजार में पैसे लगाने के तरीके
दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में सीधे पैसे लगाने की प्रक्रिया भारतीय या अमेरिकी बाजार की तुलना में थोड़ी अलग है. हालांकि, दक्षिण कोरियाई सरकार ने विदेशी निवेशकों के लिए नियमों को काफी सरल बनाया है. अगर आप वहां सीधे इक्विटी मार्केट में पैसे लगाना चाहते हैं तो स्टेप-बाय-स्टेप ये प्रक्रिया है.
1. वैश्विक या दक्षिण कोरियाई स्थानीय ब्रोकर का चयन
सबसे पहले आपको एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय ब्रोकर या दक्षिण कोरिया के ब्रोकर Samsung Securities, Mirae Asset, Interactive Brokers के साथ खाता खोलना होगा, जो विदेशी निवेशकों को KRX में सीधे ट्रेडिंग की सुविधा देते हैं.
2. LEI (Legal Entity Identifier) या IRC प्राप्त करना
दक्षिण कोरियाई नियामक (FSS - Financial Supervisory Service) के नियमों के अनुसार, किसी भी विदेशी निवेशक को वहां सीधे इक्विटी बाजार में निवेश करने के लिए अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करनी होती है.
नए नियमों के तहत विदेशी निवेशकों के लिए LEI अनिवार्य किया गया है. यह खाता खोलने के लिए एक मुख्य पहचान संख्या के रूप में काम करता है. विदेशी निवेशकों के लिए पहले दक्षिण कोरिया के मार्केट में निवेश के लिए IRC जरूरी था. अगर आपके पास पहले से IRC है, तो आप उसी का उपयोग जारी रख सकते हैं. आपका ब्रोकर इस रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में आपकी मदद करता है.
3. स्टैंडिंग प्रॉक्सी और कस्टोडियन बैंक की नियुक्ति
अगर भारत में रहकर निवेश करते हैं तो आपको एक स्टैंडिंग प्रॉक्सी यानी एक ब्रोकर या वैश्विक बैंक नियुक्त करना होता है. यह प्रॉक्सी आपकी ओर से कागजी कार्रवाई और स्थानीय नियमों का पालन सुनिश्चित करता है. साथ ही, एक लोकल कस्टोडियन बैंक की आवश्यकता होती है, जो आपके फंड और खरीदे गए शेयर्स को सुरक्षित रखने और सेटलमेंट का काम संभालता है.
दक्षिण कोरिया के कस्टोडियन बैंक में दो प्रकार के खाते खुलते हैं.
एक विदेशी मुद्रा (जैसे- USD) के लिए, और दूसरा स्थानीय मुद्रा यानी कोरियन वॉन (KRW) के लिए, क्योंकि KRX पर ट्रेडिंग केवल कोरियन वॉन में ही होती है. खाता सेटअप होने के बाद, आपको भारत से पैसे भेजने होंगे. आप RBI की LRS के तहत अपने भारतीय बैंक खाते से विदेशी ब्रोकर/कस्टोडियन खाते में पैसे भेजेंगे. यह पैसा आप अमेरिकी डॉलर (USD) में ट्रांसफर कर सकते हैं, जिसे वहां पहुंचने पर स्थानीय करेंसी कोरियन वॉन (KRW) में बदल दिया जाता है.