सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X एक टेक प्रोफेशनल की चैट का स्क्रीनशॉट खूब वायरल हो रहा है, जिसने इंटरनेट पर बढ़ती महंगाई को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है. ₹40 लाख का भारी-भरकम सालाना पैकेज होने के बावजूद इस इंजीनियर का मानना है कि उसकी सैलरी उसके साथियों के मुकाबले काफी कम है और आज के रहन-सहन के हिसाब से नाकाफी है.
इस दावे ने सोशल मीडिया यूजर्स को दो गुटों में बांट दिया है, जहां एक तरफ लोग इसे 'लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन' और जमीनी हकीकत से दूर होना बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग बेंगलुरु या मुंबई जैसे बड़े टेक हब्स में आसमान छूते किराए, टैक्स और हाई कॉस्ट ऑफ लिविंग का हवाला देकर उसकी बात से सहमति भी जता रहे हैं. यह पूरी चर्चा दिखाती है कि कॉर्पोरेट जगत में बढ़ते पियर प्रेशर और बड़े शहरों के खर्चों के बीच अब मोटी सैलरी भी लोगों को कम महसूस होने लगी है.
इस स्क्रीनशॉट में अपनी सैलरी का रोना रोने वाला यह टेक प्रोफेशनल देश के प्रतिष्ठित संस्थान NIT (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) का ग्रेजुएट है. चैट में उसने इस बात पर गहरा दुख जताया कि उससे कम टैलेंटेड लोग भी आज ₹70 लाख सालाना का पैकेज उठा रहे हैं, जबकि वह खुद ₹40 लाख पर अटका हुआ है. उसने निराशा जाहिर करते हुए यहां तक कह दिया कि इस सैलरी में वह "एक घर तक नहीं ले पा रहा है."
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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
चैट के दौरान जब उसके दोस्त ने उसे ढांढस बंधाते हुए कहा कि ₹40 लाख सालाना एक बेहतरीन सैलरी होती है, तो इस NIT ग्रेजुएट ने उसकी बात काटने में देर नहीं लगाई. उसने हताश होकर लिखा, "बेकार-बेकार लोगों का ज्यादा है मेरे से. 70 में सब बैठे हैं." उसका साफ तौर पर मानना था कि जिन लोगों में उससे कम काबिलियत है, वे आज ₹70 लाख के पैकेज पर आराम से बैठे हैं, जबकि उसे पिछले दो साल से कोई इंक्रीमेंट भी नहीं मिला है.
इस पूरी बातचीत का स्क्रीनशॉट X पर शेयर करते हुए उसके ही एक कॉलेज फ्रेंड ने कैप्शन में लिखा "अपने इंजीनियरिंग कॉलेज (NIT) के एक दोस्त से बात कर रहा था. देखो इन लोगों को, ₹40 लाख सालाना कमाने के बाद भी इतना रोते हैं. बेशक, ये आईटी (IT) सेक्टर वाले ही हैं." इस पोस्ट के सामने आने के बाद से ही टेक इंडस्ट्री में पैकेज और संतुष्टि के पैमाने को लेकर इंटरनेट पर एक लंबी बहस छिड़ गई है.
एक यूजर ने आज की पीढ़ी की सबसे बड़ी मुश्किल की ओर इशारा करते हुए लिखा, "यार, हमारी जनरेशन में हाउसिंग का बड़ा इश्यू है, कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, फिर चाहे कोई कितने ही लाख का पैकेज क्यों न ले रहा हो." इन सब के बीच, टेक सेक्टर की इन मोटी सैलरीज पर सवाल उठाते हुए एक यूजर ने पूछा, "मैं वाकई यह जानना चाहता हूं कि क्या इस तरह के भारी-भरकम पे-पैकेज सच में उनकी काबिलियत के हिसाब से सही हैं, या फिर आज के मार्केट को देखते हुए इन्हें जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है?
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