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600 अरब डॉलर का हुआ भारतीय रियल एस्टेट मार्केट, घरों की बिक्री में प्रीमियम सेगमेंट का दबदबा

CREDAI-Anarock Report 2026: भारतीय रियल एस्टेट बाजार 2025 में अनुमानित 600 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. रिपोर्ट के मुताबिक रेजिडेंशियल सेक्टर सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बना हुआ है. टॉप शहरों में घरों की बिक्री की वैल्यू FY-26 में 6.3 लाख करोड़ रुपये पहुंची, जबकि प्रीमियम और लग्जरी घरों की नई सप्लाई में हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है.

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 रियल एस्टेट में घरों का कारोबार सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बना हुआ है. (Photo- Representational)
रियल एस्टेट में घरों का कारोबार सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बना हुआ है. (Photo- Representational)

भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में घरों की डिमांड लगातार बनी हुई है. हालांकि मार्केट में एक बड़ा बदलाव भी देखने को मिल रहा है. प्रीमियम और लग्जरी घरों की नई सप्लाई में हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है. इसके उलट अफोर्डेबल और लोअर-मिड सेगमेंट की हिस्सेदारी घटी है. दरअसल, भारत का रियल एस्टेट बाजार 2017 में करीब 120 अरब डॉलर का था, जो 2025 में अनुमानित 600 अरब डॉलर तक पहुंच गया. 2030 तक इसके 1 ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक करीब 5.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.

क्रेडाई और एनारॉक की रिपोर्ट के मुताबिक, रियल एस्टेट में घरों का कारोबार सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बना हुआ है. 2025 में निर्माणाधीन रियल एस्टेट की कुल वैल्यू में रेजिडेंशियल सेक्टर की हिस्सेदारी 48 फीसदी से बढ़कर करीब 85 फीसदी रही. वहीं निर्माणाधीन रियल एस्टेट की कुल वैल्यू 2009 में 94 अरब डॉलर थी, जो 2025 में बढ़कर 503 अरब डॉलर हो गई. 

रेजिडेंशियल मार्केट में भी लगातार तेजी देखने को मिली है. रिपोर्ट के मुताबिक, टॉप शहरों में सालाना घरों की बिक्री की वैल्यू FY-22 में 2.35 लाख करोड़ रुपये थी, जो FY-26 में बढ़कर 6.3 लाख करोड़ रुपये हो गई. इस दौरान बिक्री की वैल्यू में 27 फीसदी से ज्यादा की सालाना चक्रवृद्धि वृद्धि दर्ज की गई.

क्रेडाई के नेशनल प्रेसिडेंट शेखर जी. पटेल ने रिपोर्ट में कहा कि रियल एस्टेट अब सिर्फ घर और ऑफिस बनाने वाला सेक्टर नहीं है, बल्कि देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति की नींव का हिस्सा बन चुका है.

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अब महंगे और लग्जरी घरों पर ज्यादा फोकस

रिपोर्ट के अनुसार, रेजिडेंशियल बिक्री की वैल्यू लगातार सात तिमाहियों से 1.3 लाख करोड़ रुपये से ऊपर बनी हुई है. FY-26 में टॉप-9 शहरों की कुल 6.3 लाख करोड़ रुपये की बिक्री वैल्यू में मुंबई महानगर क्षेत्र यानी MMR की हिस्सेदारी 34 फीसदी रही. दिल्ली-NCR 22 फीसदी और बेंगलुरु 15 फीसदी हिस्सेदारी के साथ इसके बाद रहे.

रेजिडेंशियल मार्केट में सबसे बड़ा बदलाव प्रीमियमाइजेशन का है. रिपोर्ट के मुताबिक हाई-एंड, लग्जरी और अल्ट्रा-लग्जरी घरों की कुल हिस्सेदारी FY-22 में नई सप्लाई की सिर्फ 12.6 फीसदी थी. FY-26 में यह बढ़कर 45 फीसदी हो गई. वहीं अफोर्डेबल और लोअर-मिड सेगमेंट की हिस्सेदारी घटी है. अफोर्डेबल कैटेगरी की हिस्सेदारी 24.6 फीसदी से घटकर 13.6 फीसदी और लोअर-मिड सेगमेंट की हिस्सेदारी 36.9 फीसदी से घटकर 18 फीसदी रह गई.

इसका मतलब है कि बिल्डर अब बड़े साइज और ज्यादा कीमत वाले घरों की तरफ ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, FY-27 के लिए शेयर बाजार में लिस्टेड रेजिडेंशियल डेवलपर्स ने करीब 1.85 लाख करोड़ रुपये की कुल प्री-सेल्स का अनुमान दिया है.

CREDAI के प्रेसिडेंट-इलेक्ट जी-राम रेड्डी के मुताबिक भारतीय होमबायर्स की पसंद में बदलाव आया है. अब खरीदारी में सिर्फ घर का मालिक बनना ही अहम नहीं है, बल्कि लाइफस्टाइल, कनेक्टिविटी और प्रोजेक्ट के पूरे इकोसिस्टम को भी महत्व दिया जा रहा है.

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युद्ध और महंगाई से बढ़ी निर्माण लागत

2026 में वेस्ट एशिया में जंग के बाद क्रूड और दूसरी इंपोर्टेड कमोडिटीज की कीमतों में बढ़ोतरी का असर रियल एस्टेट पर भी पड़ा. रिपोर्ट के मुताबिक कुल कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में करीब 8-10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. TMT स्टील की कीमत करीब 20 फीसदी बढ़कर लगभग 72,000 रुपये प्रति टन पहुंची. फ्यूल और साइट लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में 15-20 फीसदी और इंपोर्टेड टाइल्स, ग्लास और हार्डवेयर जैसे फिनिशिंग मटेरियल में 8-12 फीसदी तक बढ़ोतरी का अनुमान है.

रिपोर्ट के मुताबिक इस महंगाई का सबसे ज्यादा असर रेजिडेंशियल डिमांड पर पड़ा है, क्योंकि फ्यूल, महंगाई और EMI की पूरी चेन घर खरीदने की अफोर्डेबिलिटी पर असर डालती है.

चुनौतियों के बावजूद रियल एस्टेट में मजबूती

ANAROCK के चेयरमैन अनुज पुरी के मुताबिक 2026 में ग्लोबल और जियोपॉलिटिकल चुनौतियों के बावजूद भारतीय रियल एस्टेट ने अपनी मजबूती बनाए रखी. रिपोर्ट में उन्होंने रेजिडेंशियल सेल्स के लगातार सात क्वार्टर तक 1.3 लाख करोड़ रुपये से ऊपर बने रहने को सेक्टर की मजबूती के संकेत के तौर पर बताया है.

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में शहरी आबादी का हिस्सा 2036 तक करीब 40 फीसदी पहुंच सकता है. करीब 60 करोड़ लोग शहरों में रह सकते हैं. इससे हाउसिंग की लॉन्ग टर्म डिमांड को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है.

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