गुरुग्राम के सेक्टर-109 स्थित चिंटेल्स पैराडिसो आवासीय परिसर के टावर जे को रहने के लिहाज से असुरक्षित घोषित किया गया है. नगर निगम गुरुग्राम (MCG) ने बिल्डर को तीन महीने के भीतर इस टावर को गिराने का आदेश दिया है. यह कार्रवाई डेवलपर को अपने खर्च, जोखिम और जिम्मेदारी पर करनी होगी. परिसर के कुल नौ टावरों में से टावर जे छठा टावर है, जिसे गिराने का आदेश दिया गया है, इससे पहले टावर डी, ई, एफ, जी और एच को ध्वस्त किया जा चुका है.
नगर निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने 30 अक्टूबर को यह आदेश जारी किया. इसमें हरियाणा म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट, 1994 की धारा 265(2) का हवाला दिया गया है. आदेश के मुताबिक, आईआईटी दिल्ली की ओर से कराए गए संरचनात्मक आकलन (स्ट्रक्चरल असेसमेंट) में टावर जे को रहने के लिए पूरी तरह असुरक्षित पाया गया था. इसके बाद जिला स्तरीय समिति ने भी इस टावर को गिराने की सिफारिश की थी.
खतरनाक है टावर
टावर की सुरक्षा को लेकर पहले भी गंभीर सवाल उठ चुके हैं. 12 जनवरी 2024 को टावर जे की एक बालकनी का हिस्सा गिर गया था. इस घटना ने इमारत की संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा पर चिंता बढ़ा दी थी, इससे आसपास रहने वाले लोगों और वहां से गुजरने वालों के लिए भी खतरा पैदा हो गया था.
नगर निगम आयुक्त ने डेवलपर मैसर्स चिंटेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को निर्देश दिया है कि टावर को गिराने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले तकनीकी रूप से सक्षम और योग्य एजेंसी नियुक्त की जाए. साथ ही, विध्वंस के दौरान सभी कानूनी प्रावधानों और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाए.
आदेश में सुप्रीम कोर्ट के 3 सितंबर के निर्देश का भी उल्लेख किया गया है, इसमें प्रभावित असुरक्षित टावरों को खाली कराने और सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही गई थी.
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