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किराया भरें या अपनी EMI? 2026 में घर खरीदने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

अगर आप इस साल किराए और EMI के बीच उलझे हुए हैं और यह तय नहीं कर पा रहे कि 2026 में घर खरीदना सही फैसला होगा या नहीं, तो सिर्फ भावनाओं में बहकर फैसला लेना भारी पड़ सकता है. इस खबर में विस्तार से समझें कि आपकी फाइनेंशियल कंडीशन के हिसाब से कब अपना घर लेना फायदे का सौदा बनता है और किन हालातों में सिर्फ किराए पर रहना ही असली समझदारी कहलाता है.

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होम लोन और टैक्स बचत का पूरा गणित (Photo: Pexels)
होम लोन और टैक्स बचत का पूरा गणित (Photo: Pexels)

साल का आगाज होते ही किराएदारों के बीच अक्सर यह कशमकश शुरू हो जाती है कि क्या अब किराये के चक्कर से मुक्ति पाकर अपने आशियाने का सपना पूरा करने का वक्त आ गया है? साल 2026 में रियल एस्टेट मार्केट और होम लोन की बदलती चाल ने इस सवाल को और भी बड़ा बना दिया है. एक तरफ अपना घर होने का सुकून और सुरक्षा है तो दूसरी तरफ रेंट पर रहने की आजादी और कम वित्तीय बोझ. अगर आप भी इसी उलझन में फंसे हैं तो आइए जानते हैं कि इस साल आपके भविष्य और जेब के लिए क्या बेहतर साबित होगा.

बचत और भविष्य का भरोसा है अपना आशियाना

जब आप खुद का घर खरीदने का फैसला करते हैं तो यह सिर्फ एक सिर छुपाने की जगह नहीं बल्कि आपकी अपनी एक पूंजी बन जाती है. घर खरीदने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप हर महीने जो EMI भरते हैं, वह आपको धीरे-धीरे उस घर का मालिक बनाती है. इतना ही नहीं, होम लोन के साथ आपको टैक्स में भी भारी बचत मिलती है. आयकर की धारा 24(b) और 80C के तहत मिलने वाली छूट आपकी जेब पर पड़ने वाले बोझ को काफी कम कर देती है. इसके अलावा, घर खरीदने का एक सुकून यह भी है कि आपको हर साल मकान मालिक की ओर से बढ़ाए जाने वाले किराए की टेंशन नहीं होती. जहां वक्त के साथ किराया बढ़ता जाता है. वहीं आपकी EMI स्थिर रहती है और लोन कम होने पर आपकी आर्थिक सुरक्षा मजबूत होती जाती है. अगर आपकी इनकम स्थिर है, तो साल 2026 में अपना घर लेना भविष्य के लिए एक मजबूत नींव रखने जैसा है.

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आजादी और कम सिरदर्दी है किराए का मकान

हालांकि, हर किसी के लिए घर खरीदना ही सही हो, ऐसा जरूरी नहीं है. ठीक इसी तरह, रेंट पर रहने के भी अपने बड़े फायदे हैं. खासकर उन युवाओं के लिए जो करियर के शुरुआती दौर में हैं. रेंट पर रहने से आपको फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है, यानी अगर कल को बेहतर नौकरी के लिए शहर बदलना पड़े तो आप पर कोई बंधन नहीं होता. इसके साथ ही, घर खरीदने के लिए लगने वाला मोटा डाउन पेमेंट और रजिस्ट्रेशन का भारी-भरकम खर्च भी बच जाता है. यही नहीं, घर की मरम्मत, पेंटिंग या किसी टूट-फूट की जिम्मेदारी भी आपकी नहीं, बल्कि मकान मालिक की होती है. इससे न केवल आपके पैसे बचते हैं, बल्कि आप मानसिक रूप से भी फ्री रहते हैं. जो पैसा आप EMI में फंसाते, उसे आप कहीं और निवेश करके अपनी लिक्विडिटी (नकदी) बनाए रख सकते हैं.

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ऐसे में सवाल यह उठता है कि साल 2026 में आखिर आपकी जेब के लिए सबसे सही फैसला क्या होगा? अगर हम मौजूदा हालातों पर नजर डालें, तो बाजार के जानकारों का मानना है कि इस साल होम लोन की ब्याज दरों में स्थिरता आ सकती है, जो घर खरीदारों के लिए एक राहत भरी खबर है. अगर आप अगले 5-7 साल तक एक ही शहर में टिकने का मन बना चुके हैं, तो लंबे समय के हिसाब से घर खरीदना ही आपके लिए फायदे का सौदा साबित होगा, भले ही शुरुआत में EMI का बोझ थोड़ा भारी लगे. वहीं दूसरी ओर अगर आपकी नौकरी ऐसी है जिसमें बार-बार शहर बदलना पड़ता है या करियर को लेकर थोड़ी भी अनिश्चितता है तो रेंट पर रहना और अपनी जमापूंजी को दूसरी जगह निवेश करना ही आपके लिए सबसे स्मार्ट मूव होगा.

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फैसला आपकी जेब और आपकी जरूरत पर निर्भर करता है. रेंट और EMI के बीच का चुनाव करते समय सिर्फ आज का खर्च न देखें, बल्कि आने वाले 10 सालों का लक्ष्य भी सामने रखें. याद रखें, सही समय पर लिया गया सही फैसला ही आपकी असली संपत्ति है.

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