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ऑर्डर कैंसिल... ₹250 रिफंड भी नहीं दिया! कोर्ट पहुंचा शख्स... अब Zomato को चुकाने पड़ेंगे ₹8,250

बर्थडे सेलिब्रेशन के लिए Zomato से किए गए करीब ₹250 के दो फूड ऑर्डर कैंसिल करना कंपनी को भारी पड़ गया. ऑर्डर कैंसिल होने के बाद ग्राहक को रिफंड नहीं मिला, जिसके बाद मामला कंज्यूमर कोर्ट पहुंचा. अब कंपनी को ₹250.61 के रिफंड के साथ 6% सालाना ब्याज, ₹5,000 मुआवजा और ₹3,000 मुकदमे का खर्च देना होगा. कुल भुगतान ब्याज समेत ₹8,250 से ज्यादा होगा.

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जोमैटो को ₹250.61 का रिफंड नहीं देने के बदले अब कस्टमर को 8250 रुपये का मुआवजा देना होगा. (File Photo)
जोमैटो को ₹250.61 का रिफंड नहीं देने के बदले अब कस्टमर को 8250 रुपये का मुआवजा देना होगा. (File Photo)

बर्थडे सेलिब्रेशन के लिए एक कस्टमर ने Zomato से खाने के 5 ऑर्डर किए. तीन ऑर्डर तो समय पर पहुंच गए, लेकिन करीब ₹250 के दो ऑर्डर कैंसिल हो गए. कंपनी ने इसकी वजह कस्टमर का फोन नॉट रिचेबल (कॉल नहीं लगना) होना बताया. बात यहीं खत्म नहीं हुई. कस्टमर ने पैसे रिफंड नहीं मिलने पर कंज्यूमर कमीशन का दरवाजा खटखटाया और अब इस छोटे से ऑर्डर का मामला Zomato के लिए काफी महंगा साबित हुआ है.

मामला अगस्त 2024 का है. मनोज कुमार ने अपनी भांजी के बर्थडे सेलिब्रेशन के लिए Zomato पर एक ही एड्रेस से 5 अलग-अलग फूड ऑर्डर किए थे. इनमें से 3 ऑर्डर सफलतापूर्वक डिलीवर हो गए. लेकिन बाकी दो ऑर्डर, जिनकी कीमत ₹146.73 और ₹103.88 थी, कस्टमर तक नहीं पहुंचे. दोनों की कुल कीमत ₹250.61 थी. Zomato ने इन ऑर्डर को कैंसिल कर दिया. कंपनी की तरफ से बताया गया कि डिलीवरी बॉय ने कस्टमर के फोन नंबर पर कई कॉल किए, लेकिन उसका नंबर नहीं लगा.

ऑर्डर कैंसिल हुआ, पर रिफंड नहीं मिला

मनोज कुमार का कहना था कि ऑर्डर कैंसिल होने के बाद उन्हें पैसे वापस नहीं मिले. उनके मुताबिक, Zomato ने रिफंड देने के बजाय कैंसिलेशन चार्ज का हवाला दिया. कस्टमर ने इस मामले को दिल्ली कंज्यूमर कमीशन के सामने रखा. यहां सबसे अहम सवाल यह था कि अगर कस्टमर का फोन पहुंच से बाहर था, तो उसी दौरान उसी पते पर किए गए तीन दूसरे ऑर्डर कैसे सफलतापूर्वक डिलीवर हो गए. कंज्यूमर कमीशन ने भी Zomato की दलील पर सवाल उठाया.

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Zomato की ओर से कोई पेश नहीं हुआ

मामले की सुनवाई के दौरान Zomato की तरफ से परेशानी और बढ़ गई. कमीशन के मुताबिक, नोटिस मिलने के बावजूद कंपनी न तो सुनवाई में पेश हुई और न ही तय कानूनी समय में अपना लिखित जवाब दाखिल किया. इसके बाद 10 जून 2025 को कंपनी के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई. दूसरी तरफ, मनोज कुमार ने अपने दावे के समर्थन में शपथपत्र, दोनों ऑर्डर की समरी, कस्टमर सपोर्ट चैट की ट्रांसक्रिप्ट और लीगल नोटिस से जुड़े दस्तावेज पेश किए. कंपनी की तरफ से इन दस्तावेजों और ग्राहक के दावों का विरोध नहीं किया गया. इसलिए कमीशन ने इन्हें बिना चुनौती वाला सबूत माना.

Zomato की सर्विस में कमी रही: कमीशन

कंज्यूमर कमीशन ने मामले में Zomato की ओर से सेवा में कमी और अनफेयर बिजनेस बिहेवियर माना. कमीशन ने यह भी नोट किया कि मनोज कुमार Zomato Gold के मेंबर थे और कंपनी को कस्टमर के ₹250.61 वापस करने का आदेश दिया है. इसके अलावा इस रकम पर ऑर्डर की तारीख से भुगतान होने तक 6% सालाना ब्याज भी देने का भी आदेश दिया. इतना ही नहीं, कस्टमर को हुई मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए Zomato को ₹5,000 मुआवजा और मुकदमे के खर्च के तौर पर ₹3,000 भी देने होंगे. यानी ₹250.61 के दो ऑर्डर का विवाद अब कंपनी को हजारों रुपये में पड़ रहा है. ब्याज को जोड़ने पर कुल भुगतान ₹8,250.61 से भी ज्यादा होगा.

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ग्राहकों के लिए भी काम की बात

कमीशन ने Zomato को आदेश मिलने के 45 दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया है. अब कंपनी को तय समयसीमा के अंदर ग्राहक को रिफंड, ब्याज, मुआवजा और मुकदमे का खर्च देना होगा. यह मामला फूड डिलीवरी ऐप इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के लिए भी अहम है. अगर ऑर्डर कैंसिल होने, रिफंड या किसी दूसरी समस्या को लेकर विवाद हो, तो ऑर्डर समरी, कस्टमर सपोर्ट चैट, रिफंड से जुड़े मैसेज और दूसरे जरूरी रिकॉर्ड संभालकर रखना चाहिए. इस मामले में भी ग्राहक की ओर से पेश किए गए दस्तावेज अहम साबित हुए. वहीं, कंपनी की तरफ से दावों का विरोध नहीं किए जाने का भी फैसले पर असर पड़ा.

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