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पेट्रोल-डीजल की कीमतें कब होंगी कम? मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिया ये जवाब

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि संकट के चरम पर भी भारत के पास 60 दिनों का कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का भंडार तथा 45 दिनों का एलपीजी का भंडार मौजूद था. उन्होंने कहा कि नाकाबंदी के कारण 30 से अधिक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को पार नहीं कर सके.

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कब होंगे पेट्रोल-डीजल के दाम कम. (Photo: File/ITG)
कब होंगे पेट्रोल-डीजल के दाम कम. (Photo: File/ITG)

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को कहा कि कई रिफाइनरी परियोजनाओं के शुरू होने के साथ ही भारत अगले छह महीने से दो वर्षों में अपनी तेल रिफाइनिंग क्षमता को लगभग 270 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) से बढ़ाकर 300 MTPA कर देगा. इस बीच, उन्‍होंने पेट्रोल-डीजल के दाम को लेकर भी बड़ा खुलासा किया. 

मंत्री ने कहा कि भारत निश्चित रूप से विश्व का तीसरा सबसे बड़ा रिफाइनिंग हब बनकर उभर रहा है, और शायद पहले से ही बन चुका है. इसलिए, मुझे लगता है कि छोटी, कम प्रतिस्पर्धी रिफाइनरियां बंद हो जाएंगी. हाइड्रोकार्बन का वैश्विक व्यापार उन देशों द्वारा निर्धारित और काफी हद तक प्रभावित होगा जिनके पास महत्वपूर्ण रिफाइनिंग क्षमता है.  

ईंधन की कीमतों पर पुरी ने कहा कि कंज्‍यूमर्स के लिए कीमतों में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है. ऊर्जा की कीमतों में और गिरावट कब आ सकती है, इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में बिकने वाला पेट्रोल और डीजल उस कच्चे तेल से रिफाइन किया जाता है जिसे तब खरीदा गया था जब वैश्विक कच्चे तेल और माल ढुलाई की दरें अधिक थीं. 

उन्होंने कहा कि वर्तमान में रिफाइन किए जा रहे पेट्रोल और डीजल की कीमतें कच्चे तेल और माल ढुलाई की ऊंची कीमतों पर आधारित हैं, जिन्हें ऊंची कीमतों पर खरीदा गया है. तेल और डीजल कंपनियां भारी नुकसान और बढ़ी हुई लागतों से जूझ रही हैं. 

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1 लाख करोड़ का नुकसान
मंत्री ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने पर केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं पर बोझ कम करने के लिए उत्पाद शुल्क में कटौती करने का फैसला किया है. उन्होंने आगे कहा कि पेट्रोल और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की उत्पाद शुल्क कटौती से लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है. 

अभी तेल कीमतें नहीं होंगी कम 
उन्होंने कहा कि मैंने यह समझाने की कोशिश की कि निजी क्षेत्र की कंपनियों और तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपनियों के पास जो शेयर हैं, वे दो से ढाई महीने पहले खरीदे गए थे, जब कच्चे तेल की कीमतें अधिक थीं. कीमतों में और गिरावट कब आ सकती है, इस बारे में आपके सवाल का जवाब यह है कि अगर कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी. इस बारे में अटकलें लगाना मेरे लिए उचित नहीं होगा. 

मंत्री ने कहा कि आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने के बाद पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारत के पास ईंधन का पर्याप्त भंडार बना रहा. उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान हमारे पास कच्चे तेल, डीजल और LPG का पर्याप्त भंडार था. 

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