कहते हैं मेहनत और जज्बा हो, तो कोई भी काम मुश्किल नहीं होता. इंसान बड़े से बड़े लक्ष्य को भी पाने में कामयाब हो जाता है. कुछ ऐसी ही दिलचस्प कहानी है जीआरबी डेयरी फूड्स के फाउंडर जीआर बालासुब्रमण्यम की, जिन्होंने आर्थिक तंगी के बीच स्कूल की पढ़ाई तक छोड़ दी थी और नौकरी शुरू की साइकिल से गली-गली घूमकर मक्खन बेचते थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आज उनकी कंपनी GRB Dairy Food's 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा वैल्यू की कंपनी है.
नौकरी छोड़, बेचा मक्खन
जीआरबी डेयरी फूड्स के फाउंडर जीआर बालासुब्रमण्यम की सक्सेस स्टोरी इस बाद का उदाहरण है, कि मेहनत के बल पर कोई भी मुकाम पाया जा सकता है और आम से खास लोगों की कैटेगरी में पहुंचा जा सकता है. उनकी व्यावसायिक यात्रा पर नजर डालें, तो ये GRB की स्थापना से पहले ही शुरू हो गई थी. तमिलनाडु के पलानी में छोटे से गांव चिन्ना कराट्टुपट्टी नामक के रहने वाले बालासुब्रमण्यम छह बच्चों के परिवार में पले-बढ़े और 13 साल की उम्र में स्कूल की पढ़ाई छोड़ काम के लिए बेंगलुरु चले गए.
बालासुब्रमण्यम के पिता एक किसान थे और एग्री प्रोडक्ट्स को साइकिल से गांव-गांव घूमकर खरीदते-बेचते थे. बेंगलुरु में करीब 14 साल तक उन्होंने अपने बहनोई के मक्खन की दुकान पर नौकरी की. इसके बाद उनके मन में कुछ नया करने का आइडिया आया और फिर उन्होंने नौकरी छोड़ दी. रिपोर्ट्स की मानें, तो उस समय उनके पास बचत के सिर्फ 6,000 रुपये ही थी. इन पैसों का इस्तेमाल उन्होंने मक्खन के व्यापार पर किया, बस यहीं से पड़ी GRB Dairy Foods की नींव.
अनुभव के साथ मेहनत का कमाल
बहन-बहनोई के व्यापार में हाथ बंटाते हुए बालासुब्रमण्यम ने मक्खन व्यवसाय की बारीकियों को समझ लिया था और अपना काम शुरू करने में उन्होंने इनका बखूबी इस्तेमाल भी किया. अपने बिजनेस की शुरुआत में उन्होंने छोटे उत्पादकों से मक्खन खरीदकर उसे बेंगलुरु में बेचना शुरू किया. मक्खन को घी में बदलकर पैकेट में पेश किया और अपना प्रोडक्ट बाजार में उतार दिया. शुरुआत में उन्होंने एक छोटे से कमरे से अपने कारोबार की शुरुआत की.
अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए बालासुब्रमण्यम ने एक चिट फंड कंपनी स्थापित की. इसका तरीका भी उन्होंने अपने बहनोई के कारोबार में ही सीखा था. उन्होंने अपने जानने वाले लोगों को इसका मॉडल समझाया और एक अच्छा ग्रुप बना लिया. इससे जुटाए गए पैसों को उन्होंने अपने मक्खन बिजनेस में लगाया. अब उनके सामने मक्खन के जल्द खराब होने की समस्या थी, तो उन्होंने इससे घी बनाकर बाजार में उतार दिया. इसके बाद जैसे-जैसे कारोबार बढ़ा, उनकी इनकम और वर्कफोर्स में भी इजाफा होता गया.
बेंगलुरु में पहली फैक्ट्री, अब 40 देशों में कारोबार
GRB Dairy Foods की पहली फैक्ट्री 1991 में बेंगलुरु में खोली गई और फिर डिंडीगुल, होसुर में प्लांट लगा दिया. उन्होंने पैकेज्ड घी समेत अन्य डेयरी प्रोडक्ट भी अपने बिजनेस में जोड़े और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा. जीआरबी डेयरी फूड्स की वेबसाइट पर मौजूद डिटेल पर नजर डालें, तो अब कंपनी का रेवेन्यू अब 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का है. इसके प्रोडक्ट्स दुनिया के 40 देशों में अपनी मौजूदगी रखते हैं. प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में 70 से ज्यादा डेयरी उत्पाद शामिल हैं.