8वां वेतन आयोग के लागू होने का इंतजार बेसब्री से है, लेकिन अभी तक आयोग सिर्फ प्रतिनिधियों और हितकारों से मिलकर कर्मचारियों की समस्याएं जान रहा है. लेकिन अभी तक ये जानकारी नहीं आई है कि फाइनल रिपोर्ट कबतक तैयार हो सकता है? हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि अगले साल मई के बाद रिपोर्ट पेश हो सकता है और इसके बाद सरकार इसपर फैसला ले सकती है.
लेकिन अगर 8वें वेतन आयोग के लागू होने में देरी होती है तो कर्मचारियों को नुकसान हो सकता है. एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अगर इसके लागू होने में देरी होती है तो लेवल-7 कर्मचारियों को करीब 3 लाख रुपये का नुकसान हो सकता है. आइए समझते हैं कैसे...
देरी से नुकसान कैसे?
दरअसल, चर्चा ये चल रही है कि 8वें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होगा. ऐसे में केंद्रीय कर्मचारी मोटे एरियर के हकदार होंगे. वहीं कुछ जानकारों का यह कहना है कि संशोधित बेसिक पे और पहले मिल चुके बेसिक पे के अंतर से एरियर का कैलकुलेशन हो सकता है.
वहीं HRA जैसे अलाउंस को 8वें वेतन आयोग के तहत एरियर के तौर पर नहीं दिया जाएगा. यहीं से संभावित नुकसान की संभावना बनती हुई दिख रही है. अगर लागू होने में लंबा समय लगता है और उस अवधि के लिए संबंधित एचआरए जैसे भत्तों का एरियर नहीं मिलता, तो कर्मचारियों को भारी नुकसान हो सकता है.
लेवल-7 के कर्मचारियों को संभावित नुकसान
अगर लेवल-7 के कर्मचारियों के नुकसान की बात करें तो अभी उनकी मौजूदा बेसिक सैलरी 44,900 रुपये है. अगर 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.1 लगता है, तो बेसिक सैलरी करीब 94,290 रुपये होती है.
अब मौजूदा बेसिक सैलरी ₹44,900 पर 24 फीसदी की दर से HRA ₹10,776 बनता है. वहीं 2.1 के अनुमानित फिटमेंट फैक्टर के आधार पर बेसिक ₹94,290 होने पर इसी आधार पर HRA करीब ₹22,630 होता है. दोनों में हर महीने करीब ₹11,854 का अंतर होता है.
कैसे देरी पर होगा नुकसान?
अगर सरकार 8वां वेतन आयोग जनवरी 2028 तक लागू करती है, तो कर्मचारियों को बेसिक पे पर बने एरियर का तो भुगतान किया जा सकता है. लेकिन उन्हें HRA में नुकसान हो सकता है, जैसा की ऊपर कैलकुलेशन से समझाया गया है. यानी कि अगर लेवल-7 का कर्मचारी है तो उसे HRA में हर महीने ₹11,854 का नुकसान हो सकता है.
वहीं अगर यह जनवरी 2028 में लागू होता है यानी कि 25 महीने की देरी होती है तो कर्मचारी को 2,96,350 रुपये का नुकसान हो सकता है.