सर्फ एक्सेल (Surf Excel) और विम (Vim) से जुड़े एक एडवरटाइजिंग कैंपेन को लेकर विवाद दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है. हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) ने बेको (Beco) के कैंपेन पर रोक लगाने की मांग की है. कंपनी का आरोप है कि इस कैंपेन के जरिए उसके प्रोडक्ट्स की सुरक्षा को लेकर भ्रामक और गलत धारणा बनाई जा रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक, HUL ने Beco की पैरेंट कंपनी क्विक लिविंग (आई) प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ याचिका दायर की है. इसमें कमर्शियल डिस्पैरिजमेंट, ट्रेडमार्क उल्लंघन और पासिंग ऑफ के आरोप लगाए गए हैं.
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला बेको के #WarOnWhatsHidden कैंपेन से जुड़ा है. इस कैंपेन के तहत कंपनी ने वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट, इन्फ्लुएंसर प्रमोशन और आउटडोर एड के जरिए अपने प्रोडक्ट्स की तुलना हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के पॉपुलर प्रोडक्ट 'सर्फ एक्सेल मैटिक लिक्विड' और 'विम डिशवॉश जेल' से की है. बेको ने अपने कैंपेन में इन प्रोडक्ट्स में मौजूद कुछ इंग्रीडिएंट्स को लेकर सवाल उठाए हैं और उनकी तुलना अपने प्रोडक्ट्स से की है.
Beco ने लैब टेस्ट का दिया हवाला
बेको का दावा है कि लैब टेस्टिंग में सर्फ एक्सेल में Benzisothiazolinone (BIT) पाया गया. कंपनी ने यह भी दावा किया कि Linear Alkylbenzene Sulfonate (LAS) सर्फ एक्सेल और विम, दोनों में मौजूद है. बेको के विज्ञापनों में इन इंग्रीडिएंट्स को त्वचा में जलन और एलर्जी की संभावित समस्या से जोड़ा गया है. इसी आधार पर कंपनी ने अपने कैंपेन में HUL के प्रोडक्ट्स की सेफ्टी पर सवाल उठाए हैं.
HUL ने लैब टेस्ट पर उठाए सवाल
HUL की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अमित सिबल ने कोर्ट में बेको की टेस्टिंग की प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों पर सवाल उठाए. उनका कहना था कि टेस्टिंग से कुछ इंग्रीडिएंट्स की मौजूदगी और उनकी मात्रा का पता चल सकता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि सामान्य परिस्थितियों में पूरे तैयार प्रोडक्ट के इस्तेमाल से त्वचा में जलन या एलर्जी होगी. HUL ने कोर्ट में कहा कि किसी एक इंग्रीडिएंट की मौजूदगी की जांच और पूरे फॉर्म्युलेशन की सेफ्टी का आकलन अलग-अलग चीजें हैं. कंपनी के मुताबिक, बेको ने वह जरूरी सेफ्टी टेस्ट नहीं किया, जो उसके विज्ञापनों में किए गए दावों को साबित कर सके.
LAS को लेकर भी HUL की आपत्ति
HUL ने कहा कि LAS क्लीनिंग प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होने वाला एक सामान्य सर्फैक्टेंट है, जो ग्रीस और ऑयल हटाने में मदद करता है. कंपनी का आरोप है कि बेको ने LAS को विम से जोड़कर विज्ञापन में ऐसा प्रभाव पैदा किया, जिससे उपभोक्ताओं के बीच गलत धारणा बन सकती है. HUL ने यह भी आरोप लगाया कि बेको ने अपने कैंपेन में उसकी पहचान स्पष्ट करने के लिए उसकी रजिस्टर्ड टैगलाइन का इस्तेमाल किया. इसमें विम की '100 नींबुओं की शक्ति' और सर्फ एक्सेल की 'दाग अच्छे हैं' जैसी टैगलाइन शामिल हैं.
HUL का कैंपेन टाइमिंग पर सवाल
HUL ने दिल्ली हाई कोर्ट के सामने कैंपेन की लॉन्चिंग के समय को लेकर भी आपत्ति जताई. कंपनी का कहना है कि बेको का एड 14 अगस्त की रात शुरू किया गया, जिससे 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस और 16 अगस्त को रविवार की छुट्टी के दौरान तत्काल कानूनी राहत हासिल करना मुश्किल हो गया. कंपनी ने आरोप लगाया कि कैंपेन में उसके ग्राहकों का मजाक उड़ाया गया और HUL को ऐसे ब्रांड के तौर पर पेश करने की कोशिश की गई, जो अपने ग्राहकों को गुमराह करता है.
फिलहाल कैंपेन पर कोई रोक नहीं
फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट ने बेको के कैंपेन पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है. कोर्ट ने कहा है कि किसी तरह का आदेश देने से पहले बेको का पक्ष भी सुना जाएगा. जस्टिस अनुप जयराम भंभानी ने बुधवार को बेको से जवाब मांगा. बेको की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया है. कोर्ट ने 20 अगस्त तक जवाब और संबंधित मटेरियल जमा करने को कहा है. अब इस मामले में अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी. उस सुनवाई में अदालत दोनों पक्षों की दलीलों और विज्ञापन में किए गए सेफ्टी दावों से जुड़े दस्तावेजों पर आगे विचार कर सकती है.