scorecardresearch
 

8th Pay Commission: पेंशन को लेकर 8वें वेतन आयोग में ये अड़चन, एक्‍सपर्ट्स जता रहे चिंता

आठवें वेतन आयोग की बैठकों के बीच पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) की मांग ने फिर जोर पकड़ लिया है. लेकिन इस मांग के साथ एक बड़ा कानूनी सवाल भी जुड़ गया है. अगर नए वेतन नियमों का असर पहले से रिटायर हो चुके कर्मचारियों की पेंशन पर पड़ता है, तो उनके पहले से बने अधिकारों का क्या होगा?

Advertisement
X
8वें वेतन आयोग के सामने पेंशनर्स ने OPS बहाली के साथ ₹68,000 न्यूनतम वेतन की मांग रखी. (Photo: ITG/@GFX)
8वें वेतन आयोग के सामने पेंशनर्स ने OPS बहाली के साथ ₹68,000 न्यूनतम वेतन की मांग रखी. (Photo: ITG/@GFX)

आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की बैठकों में कर्मचारियों और पेंशनर्स की कई मांगें सामने आ रही हैं. लेकिन इनमें एक मांग ऐसी है, जिस पर सरकार को फैसला लेते समय सिर्फ आर्थिक पहलू ही नहीं, कानूनी पहलू भी देखना होगा. मामला उन कर्मचारियों का है, जो पहले ही रिटायर हो चुके हैं और जिनकी पेंशन से जुड़े अधिकार उनकी वर्षों की नौकरी के बाद बने हैं. ऐसे में नए नियमों का असर पुराने पेंशनर्स पर कितना डाला जा सकता है, इसे लेकर कानूनी सवाल उठ रहे हैं.

चेन्नई में 8वें वेतन आयोग के सामने चेन्नई GPO पेंशनर्स फोरम ने पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) बहाल करने की मांग रखी है. इसके साथ पेंशन और फैमिली पेंशन बढ़ाने, न्यूनतम वेतन ₹68,000 करने और कर्मचारियों-पेंशनर्स को दूसरी राहत देने की मांग भी की गई है.

पुरानी पेंशन व्यवस्था की मांग क्यों अहम?

पेंशनर्स की मांग है कि पुरानी पेंशन व्यवस्था को फिर लागू किया जाए. उनका कहना है कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन आर्थिक सुरक्षा का बड़ा सहारा है. इसलिए इसमें ऐसा बदलाव नहीं होना चाहिए, जिससे पहले से रिटायर कर्मचारियों को नुकसान हो. फोरम ने पेंशन और फैमिली पेंशन बढ़ाने की मांग भी की है. इसका फायदा रिटायर्ड कर्मचारियों के साथ उनके परिवारों को भी मिल सकता है. हालांकि, अभी यह साफ करना जरूरी है कि ये सभी बातें पेंशनर्स की डिमांड्स भर हैं और इस पर वेतन आयोग या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है.

Advertisement

लीगल एक्सपर्ट्स को किस बात की चिंता?

पेंशन और ग्रेच्युटी को लेकर लीगल एक्सपर्ट्स का मानना है कि लंबे समय तक सरकारी सेवा देने के बाद कर्मचारी को मिलने वाले पेंशन संबंधी अधिकारों को अचानक कम करना या रोकना आसान मामला नहीं होगा. कानूनी नजर से देखें तो पेंशन को सिर्फ रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली रकम नहीं माना जाता. यह कर्मचारी की पिछली सेवा से जुड़ा अधिकार भी है. इसलिए अगर भविष्य में 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के जरिए पहले से रिटायर हो चुके कर्मचारियों की पेंशन में कटौती या उनके बने हुए अधिकारों में बदलाव किया जाता है, तो इस पर कानूनी चुनौती की संभावना बन सकती है.

यही वजह है कि लीगल एक्सपर्ट्स की राय में पहले से रिटायर कर्मचारियों के मौजूदा अधिकारों को सुरक्षित रखना ज्यादा आसान और सुरक्षित रास्ता हो सकता है. नए नियमों को आगे रिटायर होने वाले कर्मचारियों पर लागू करने से विवाद की गुंजाइश कम हो सकती है.

'वन रैंक, वन पेंशन' पर भी सवाल

पेंशन के ढांचे में बदलाव को लेकर एक और सवाल 'वन रैंक, वन पेंशन' जैसी व्यवस्था को लेकर है. लीगल एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर अलग-अलग समय पर रिटायर हुए कर्मचारियों को एक ही तरह की पेंशन देने का सिस्टम बनाया जाता है, तो इससे पेंशन व्यवस्था में नया असंतुलन पैदा होने की संभावना हो सकती है. वहीं, सालाना इंक्रीमेंट या मौजूदा पेंशन में तय तरीके से बढ़ोतरी करना अपेक्षाकृत आसान विकल्प माना जा सकता है. सबसे जरूरी बात यह है कि अगर नए नियम बनाए जाते हैं तो यह बिल्कुल साफ होना चाहिए कि वे किन कर्मचारियों पर लागू होंगे, कब से लागू होंगे और पुराने पेंशनर्स के अधिकारों पर उनका क्या असर होगा.

Advertisement

₹68,000 न्यूनतम वेतन की भी मांग

चेन्नई की बैठक में पेंशन से जुड़े मुद्दों के अलावा कर्मचारियों की सैलरी को लेकर भी कई मांगें रखी गईं. इनमें ₹68,000 न्यूनतम वेतन तय करने की मांग प्रमुख है. प्रतिनिधियों ने मौजूदा पे मैट्रिक्स के साथ रनिंग स्केल, बेहतर अलाउंस, लीव नियम और सोशल सिक्योरिटी कवर की मांग की. महिला कर्मचारियों, दिव्यांग कर्मचारियों और करियर प्रोग्रेशन से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए. डाक कर्मचारियों के लिए मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) के फायदे में बदलाव की मांग भी सामने आई है.

कम्यूटेशन रिकवरी पर राहत की मांग

पेंशन के कम्यूटेशन यानी पेंशन के एक हिस्से को एकमुश्त रकम के रूप में लेने के बाद उसकी रिकवरी के नियमों पर भी सवाल उठाए गए हैं. पेंशनर्स का कहना है कि इस व्यवस्था को लेकर ज्यादा स्पष्टता और राहत की जरूरत है. इसके अलावा एक ऐसी स्थायी वेतन-संशोधन व्यवस्था की मांग भी की गई है, जिसमें कर्मचारियों को हर कुछ साल बाद अगले वेतन आयोग का इंतजार न करना पड़े.

अभी सैलरी-पेंशन में कोई बदलाव नहीं

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए फिलहाल सबसे जरूरी बात यही है कि अभी उनकी सैलरी या पेंशन में कोई बदलाव नहीं हुआ है. पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली, पेंशन बढ़ोतरी, ₹68,000 न्यूनतम वेतन, MACP, अलाउंस और दूसरे मुद्दे अभी आयोग के सामने रखी गई मांगों का हिस्सा हैं. इन पर अंतिम फैसला 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद सरकार को करना है.

Advertisement

8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट कब आएगी

जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अगुआई में 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था. आयोग को 18 महीने के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को देनी है. मौजूदा अनुमान के मुताबिक रिपोर्ट मई-जून 2027 के आसपास सरकार के पास जा सकती है. अब आयोग की अगली बैठकें चंडीगढ़ में 16, 17 और 18 सितंबर को होंगी. इन बैठकों में कर्मचारियों और पेंशनर्स की दूसरी मांगों पर भी चर्चा हो सकती है. फिलहाल पुरानी पेंशन की मांग फिर चर्चा में जरूर आ गई है, लेकिन असली तस्वीर आयोग की सिफारिश और उसके बाद सरकार के फैसले से ही साफ होगी. खासकर पुराने पेंशनर्स के मामले में नए नियम और पहले से बने पेंशन अधिकारों के बीच संतुलन सबसे अहम मुद्दों में से एक रहेगा.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement