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गंगा के बढ़ते जलस्तर से बिहार में बढ़ी चिंता, पटना समेत 6 जिलों में बाढ़ और जलभराव का बढ़ा खतरा

बिहार में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ का खतरा गहरा गया है. पटना के गांधीघाट और पंडारक में अत्यंत गंभीर बाढ़ की स्थिति (Extreme Flood Situation) बनी हुई है. गांधीघाट पर गंगा पिछला उच्चतम बाढ़ स्तर (Highest Flood Level) पार कर चुकी है. 6 सितंबर की सुबह तक जलस्तर 50.62 मीटर पहुंचने का अनुमान है.

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निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ा.(Photo:ITG)
निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ा.(Photo:ITG)

बिहार में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर लोगों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. 5 से 8 सितंबर के बीच गंगा के जलस्तर में और बढ़ोतरी होने का अनुमान जताया गया है. पटना में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर बनी हुई है, जहां गांधीघाट और पंडारक में गंगा का पानी अत्यंत गंभीर बाढ़ की स्थिति (Extreme Flood Situation) तक पहुंच गया है.

गांधीघाट पर गंगा ने पिछला उच्चतम बाढ़ स्तर (Highest Flood Level) पार कर लिया है. अनुमान है कि 6 सितंबर की सुबह 8 बजे तक यहां नदी का जलस्तर 50.62 मीटर तक पहुंच सकता है. इसे देखते हुए पटना में 5 और 6 सितंबर तक अत्यंत गंभीर बाढ़ की स्थिति बने रहने की संभावना है.

यह भी पढ़ें: पटना में बाढ़ पीड़ितों से मिलने पहुंचे पप्पू यादव, लोगों को बांटे 500-500 रुपये, VIDEO

गंगा का बढ़ता पानी केवल नदी के किनारे बसे इलाकों के लिए ही चिंता का कारण नहीं है. जलस्तर बढ़ने से आसपास की दूसरी नदियों पर भी पानी का दबाव बढ़ रहा है. इसका असर जल निकासी व्यवस्था पर पड़ सकता है और निचले इलाकों में बाढ़ के साथ जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है.

छह जिलों में गंभीर बाढ़ का खतरा

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गंगा में लगातार बढ़ रहे पानी के चलते बक्सर, सारण, वैशाली, खगड़िया, मुंगेर और भागलपुर में गंभीर बाढ़ की स्थिति (Severe Flood Situation) का खतरा बताया गया है. इन जिलों में नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने की जरूरत है. पानी बढ़ने पर नदी के आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैल सकता है.

पटना समेत गंगा के किनारे बसे इलाकों में जलभराव की आशंका भी बढ़ गई है. खासकर निचले क्षेत्रों में नदी का पानी पहुंचने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हो सकता है. अगर जलस्तर अनुमान के मुताबिक बढ़ता है तो पहले से जमा पानी की निकासी भी मुश्किल हो सकती है.

गंगा में बढ़ते दबाव का असर सोन, पुनपुन, गंडक और कोसी नदियों पर भी दिखाई दे रहा है. इन नदियों में पीछे की ओर पानी के दबाव की स्थिति (Backwater Effect) बन रही है. इसका मतलब है कि गंगा का जलस्तर ज्यादा होने के कारण इन नदियों का पानी आसानी से गंगा में नहीं जा पा रहा है.

पीछे की ओर पानी के दबाव ने बढ़ाई मुश्किल

नदियों का पानी गंगा में नहीं निकल पाने से कई क्षेत्रों में जल निकासी प्रभावित होने की आशंका है. इससे नदियों और आसपास के जलस्रोतों में पानी का दबाव बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैलने के साथ जलभराव की समस्या भी गंभीर हो सकती है.

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पटना के गांधीघाट पर पानी के लगातार बढ़ने से स्थिति पर विशेष नजर रखी जा रही है. 6 सितंबर की सुबह तक 50.62 मीटर के अनुमानित जलस्तर को देखते हुए अगले कुछ दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं. फिलहाल 5 और 6 सितंबर तक अत्यंत गंभीर बाढ़ की स्थिति (Extreme Flood Situation) बने रहने की संभावना है.

वहीं, 5 से 8 सितंबर के दौरान गंगा का जलस्तर बढ़ने के अनुमान ने बक्सर से भागलपुर तक चिंता बढ़ा दी है. प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती निचले इलाकों में पानी की पहुंच और जल निकासी को नियंत्रित करना होगी. गंगा के साथ सोन, पुनपुन, गंडक और कोसी में पीछे की ओर पानी के दबाव (Backwater Effect) ने बाढ़ की चुनौती को और गंभीर बना दिया है.

निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बढ़ा

गंगा के जलस्तर में संभावित वृद्धि का सीधा असर नदी किनारे और निचले इलाकों पर पड़ सकता है. पानी फैलने के साथ खेतों, सड़कों और आबादी वाले क्षेत्रों में जलभराव का खतरा बढ़ गया है. खासतौर पर उन क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जहां पहले से पानी जमा है और गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण उसकी निकासी बाधित हो रही है.

अगले कुछ दिनों में गंगा के साथ उससे जुड़ी नदियों के जलस्तर पर भी नजर रखना जरूरी होगा. अगर पीछे की ओर पानी का दबाव (Backwater Effect) बढ़ता है तो सोन, पुनपुन, गंडक और कोसी का पानी गंगा में जाने की रफ्तार प्रभावित हो सकती है. इससे कई इलाकों में पानी लंबे समय तक जमा रहने की स्थिति बन सकती है.

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फिलहाल, बिहार में गंगा के रौद्र रूप को देखते हुए 5 से 8 सितंबर का समय बेहद महत्वपूर्ण है. पटना में अत्यंत गंभीर बाढ़ की स्थिति (Extreme Flood Situation) और छह जिलों में गंभीर बाढ़ की स्थिति (Severe Flood Situation) के खतरे के बीच निचले इलाकों में बाढ़ और जलभराव की आशंका बनी हुई है.

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