भोजपुर के बिलौटी गांव में हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर की गुत्थी अब फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की रिपोर्ट सुलझाएगी. सबसे बड़ा सवाल यही है कि भरत तिवारी को आखिर किसकी गोली लगी थी? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए पुलिस ने एनकाउंटर में इस्तेमाल हुए तीनों हथियारों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अब यह जांच तय करेगी कि भरत के शरीर में लगी गोली किस पिस्टल से चली थी. इस बीच, भरत तिवारी के गांव में दशकर्म संपन्न हुआ, जहां परिवार ने एक बार फिर निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग दोहराई.
अब फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. पुलिस की कार्रवाई पर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं, वहीं परिजन शुरू से ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. इसी बीच जांच का सबसे महत्वपूर्ण चरण शुरू हो गया है. अदालत की अनुमति मिलने के बाद एनकाउंटर से जुड़े तीनों हथियारों और घटनास्थल से बरामद खोखों को पटना स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) भेजा गया है. अब जांच के जरिए यह पता लगाएंगे कि घटनास्थल से मिले खोखे और भरत को लगी गोली का संबंध किस हथियार से है.
किन-किन हथियारों की होगी जांच?
फॉरेंसिक जांच के लिए जिन तीन हथियारों को भेजा गया है, उनमें शाहपुर के निलंबित थानाध्यक्ष राजेश मालाकार की सर्विस पिस्टल, एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की सरकारी सर्विस पिस्टल, एनकाउंटर के बाद भरत भूषण तिवारी के पास से बरामद पिस्टल शामिल हैं. इन तीनों हथियारों की वैज्ञानिक जांच होगी. साथ ही घटनास्थल से जब्त दो जिंदा कारतूस और दो खोखों का भी मिलान कराया जाएगा. एफएसएल विशेषज्ञ यह देखेंगे कि बरामद खोखे किस पिस्टल से फायर हुए और उपलब्ध साक्ष्य घटनास्थल की परिस्थितियों से मेल खाते हैं या नहीं.
रिपोर्ट बताएगी किसकी गोली लगी
पूरे मामले का सबसे अहम सवाल यही है कि भरत भूषण तिवारी को लगी गोली आखिर किस हथियार से चली थी. यदि जांच रिपोर्ट स्पष्ट निष्कर्ष देती है तो इससे एनकाउंटर के दौरान हुई फायरिंग की पूरी तस्वीर सामने आने में मदद मिल सकती है. जांच एजेंसियां भी इसी रिपोर्ट का इंतजार कर रही हैं, क्योंकि आगे की जांच में इसका महत्वपूर्ण महत्व माना जा रहा है. पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर के अनुसार, एनकाउंटर के दौरान पुलिस ने कुल पांच राउंड फायरिंग की थी.
एफआईआर में कहा गया है कि शाहपुर थानाध्यक्ष ने अपनी सर्विस पिस्टल से एक राउंड फायर किया, जबकि एसटीएफ जवान अक्षय कुमार ने चार राउंड गोलियां चलाईं. दूसरी ओर पुलिस का दावा है कि भरत भूषण तिवारी की ओर से 10 से 12 राउंड फायरिंग की गई थी. अब इन दावों का भी परीक्षण के जरिए मिलान किया जाएगा.
खोखों और कारतूस से जुड़ेगी पूरी कहानी
फॉरेंसिक जांच केवल हथियारों तक सीमित नहीं रहेगी. घटनास्थल से बरामद दो जिंदा कारतूस और दो खोखों की भी विस्तार से जांच होगी. बैलिस्टिक विशेषज्ञ प्रत्येक खोखे पर मौजूद सूक्ष्म निशानों का मिलान संबंधित पिस्टलों से करेंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि हर हथियार फायरिंग के बाद खोखे पर अपनी अलग पहचान छोड़ता है. इसी आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि कौन-सा खोखा किस पिस्टल से निकला था. चूंकि तीनों हथियार जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, इसलिए उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने से पहले अदालत की अनुमति ली गई. अनुमति मिलने के बाद सभी हथियारों को सुरक्षित तरीके से सील कर पटना स्थित एफएसएल भेजा गया. अब वैज्ञानिक जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट संबंधित जांच एजेंसी को सौंपी जाएगी.
17 जून की सुबह क्या हुआ था?
17 जून की सुबह भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस और भरत भूषण तिवारी के बीच मुठभेड़ हुई थी. पुलिस का कहना है कि इस दौरान जवाबी कार्रवाई में भरत तिवारी की मौत हुई. दूसरी ओर परिजन शुरू से ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. मामले के सामने आने के बाद यह एनकाउंटर पूरे बिहार में चर्चा का विषय बन गया.
दशकर्म में उमड़ा गांव
एनकाउंटर के दसवें दिन रविवार को बिलौटी गांव में भरत तिवारी का दशकर्म हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार संपन्न कराया गया. गांव के पारंपरिक दशकर्म स्थल पर सुबह से ही लोगों का जुटना शुरू हो गया था. धार्मिक अनुष्ठानों के बीच परिवार के सदस्यों ने विधि-विधान से सभी संस्कार पूरे किए. भरत के पिता काशीनाथ तिवारी, चाचा, रिश्तेदार और बड़ी संख्या में ग्रामीण इस कार्यक्रम में मौजूद रहे. दशकर्म के दौरान धार्मिक परंपराओं के अनुसार मुंडन संस्कार कराया गया. इसके बाद ब्राह्मणों की उपस्थिति में पूजा-पाठ और अन्य वैदिक अनुष्ठान संपन्न हुए. परिवार ने भरत की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की. पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा. कई परिजनों की आंखें नम दिखाई दीं.
पिता ने फिर उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
दशकर्म के बाद भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह संस्कार हिंदू परंपरा के अनुसार उनके बेटे की आत्मा की शांति के लिए किया गया है. उन्होंने एक बार फिर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग दोहराई. काशीनाथ तिवारी ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो सरकार और संबंधित अधिकारी भी देख रहे होंगे. उन्हें उम्मीद है कि जांच में पूरी सच्चाई सामने आएगी और न्याय मिलेगा. दशकर्म में शामिल कई ग्रामीणों ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की. ग्रामीणों का कहना था कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता से होनी चाहिए, ताकि जो भी तथ्य हैं, वे सामने आ सकें. हालांकि जांच एजेंसियां लगातार साक्ष्य जुटाने में लगी हैं और अब फॉरेंसिक रिपोर्ट को सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है.