बिहार के मोकामा विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें थमती नजर नहीं आ रही हैं. दुलारचंद यादव हत्याकांड में उन्हें मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. अब अनंत सिंह की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है.
अनंत सिंह की मुश्किलें इस समय बढ़ती ही जा रही हैं. एमएलसी चुनाव में जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार का विरोध करने के बाद उन्हें पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया. इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा गया. फिर उनकी पत्नी नीलम देवी को सरकारी आवास खाली करने का आदेश भी दिया गया है. इसी बीच अब दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह की जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने वाली है.
दुलारचंद यादव के पोते ने दायर की याचिका
दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट ने मार्च में जमानत दे दी थी. इसके बाद अनंत सिंह जेल से बाहर आ गए थे. लेकिन दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने अनंत सिंह की जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. अब इस मामले में 30 अक्टूबर को सुनवाई होनी है.
यह मामला साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान का है. उस समय मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी. इस मामले में अनंत सिंह पर आरोप लगे थे और बाद में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था. घटना के दिन दुलारचंद यादव जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में मोकामा टाल इलाके में प्रचार कर रहे थे. इसी दौरान उनका सामना अनंत सिंह के काफिले से हुआ था. दुलारचंद यादव इलाके के पुराने दबंग माने जाते थे.
यह भी पढ़ें: MLC Election Results 2026 Live: कहीं जश्न, कहीं आरोप... काउंटिंग के बीच मोकामा से गोरखपुर तक क्यों मचा बवाल?
दुलारचंद यादव हत्या मामले में अब 30 अक्टूबर को अनंत सिंह की जमानत को चुनौती देने वालाी याचिका पर सुनवाई होने वाली है. इस सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं.
किन मामलों में अनंत सिंह को जेल जाना पड़ा
अनंत सिंह का जेल जाने का सिलसिला 2015 से चर्चा में रहा है. जून 2015 में पुटुस यादव हत्याकांड के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था और जेल भेजा गया था. जेल में रहते हुए ही अनंत सिंह ने निर्दलीय चुनाव जीता था. इस मामले में बाद में उन्हें जमानत मिली.
अगस्त 2019 में उनके पैतृक आवास से AK-47, कारतूस और हैंड ग्रेनेड बरामद होने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की थी. इस मामले में अनंत सिंह ने दिल्ली की अदालत में सरेंडर किया था और उन्हें जेल भेज दिया गया. जून 2022 में इस मामले में उन्हें दस साल की सजा सुनाई गई. इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता भी समाप्त हो गई. हालांकि, अगस्त 2024 में पटना हाई कोर्ट ने हथियार बरामदगी से जुड़े मामलों में उनकी सजा रद्द कर दी और उन्हें बरी कर दिया. इसके बाद वह जेल से बाहर आए.
जनवरी 2025 में मोकामा के नौरंगा-जालालपुर इलाके में गोलीबारी के मामले में अनंत सिंह का नाम आया था जिसके बाद उन्होंने अदालत में सरेंडर कर दिया था. इस मामले में उन्हें न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया था. अगस्त 2025 में पटना हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आ गए थे.
अक्टूबर 2025 में हुई थी दुलारचंद यादव की हत्या
अक्टूबर 2025 में मोकामा में दुलारचंद यादव की मौत का मामला सामने आया. इस मामले में अनंत सिंह को 1 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया और न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेज दिया गया. जेल में रहते हुए अनंत सिंह ने जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर चुनाव जीता और फिर से विधायक बने.
यह भी पढ़ें: अनंत सिंह को तेजस्वी यादव ने बताया गद्दार, बोले- हमने नहीं दिया कोई ऑफर
करीब चार महीने जेल में रहने के बाद पटना हाई कोर्ट ने 19 मार्च 2026 को उन्हें जमानत दे दी. वह 23 मार्च को जेल से बाहर आ गए.
अब दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है. अगर सुप्रीम कोर्ट उनकी जमानत रद्द करने का आदेश देता है, तो उन्हें फिर जेल जाना पड़ सकता है.