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फ़िल्म कम, यूट्यूब ज्यादा! बॉलीवुड के Gen Z क्यों बन रहे इन्फ्लुएंसर?

बॉलीवुड के जेन जी स्टार्स अब सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं हैं. अनन्या पांडे, इशान खट्टर और जाह्नवी कपूर जैसे सितारे सोशल मीडिया पर रील्स, व्लॉग और गेट रेडी विद मी वीडियो के जरिए भी दर्शकों से जुड़ रहे हैं. फिल्मों की अनिश्चित कमाई, ब्रांड डील और अपनी इमेज पर कंट्रोल रखने की चाह उन्हें स्टार के साथ इन्फ्लुएंसर भी बना रही है.

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बॉलीवुड के कई स्टार्स अब फुल टाइम इन्फ्लुएंर्स हैं.
बॉलीवुड के कई स्टार्स अब फुल टाइम इन्फ्लुएंर्स हैं.

एक दौर था जब बॉलीवुड स्टार्स सिर्फ थियेटर के बड़े पर्दे पर या साल-दो साल में किसी बड़ी मैगजीन के कवर पर दिखते थे. उनकी जिंदगी रहस्य से भरी होती थी और इसी दूरी को 'स्टारडम' कहा जाता था. अब अनन्या पांडे, इशान खट्टर, जाह्नवी कपूर और सुहाना खान जैसे जेन ज़ी स्टार्स के दौर में यह नियम पूरी तरह बदल चुका है.

ये स्टार्स अब सिर्फ एक्टर नहीं हैं, बल्कि पूरे समय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की तरह भी काम कर रहे हैं. वे यूट्यूब चैनल खोल रहे हैं, हर हफ्ते ट्रेंडिंग रील्स और 'गेट रेडी विद मी' यानी GRWM वीडियो पोस्ट कर रहे हैं. इसके पीछे फिल्मों का अनिश्चित बॉक्स ऑफिस, नियमित कमाई की जरूरत, ऑडियंस से सीधा जुड़ाव, अपनी इमेज पर कंट्रोल और ब्रांड्स की मांग जैसे कारण हैं.

फिल्मों का अनिश्चित बॉक्स ऑफिस और नियमित कमाई

आज के दौर में 100 करोड़ के बजट वाली फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर ढेर हो रही हैं. ओटीटी आने के बाद दर्शकों को थियेटर तक खींचना बेहद मुश्किल हो चुका है. ऐसे में किसी नए स्टार के लिए सिर्फ फिल्मों की फीस के भरोसे रहना जोखिम भरा है.

इन्फ्लुएंसर मॉडल अपनाकर ये स्टार्स हर महीने इंस्टाग्राम पर ब्रांड का प्रचार, पैसे लेकर की गई साझेदारी और कार्यक्रमों में मौजूदगी से करोड़ों रुपये की तय कमाई कर रहे हैं. एक हिट इंस्टाग्राम रील या ब्रांड कैंपेन उन्हें फिल्म रिलीज हुए बिना भी लगातार आर्थिक मजबूती देता है.

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स्टारडम से ज्यादा जुड़ाव की मांग

जेन जी दर्शकों को दूर बैठकर चमकने वाले स्टार्स पसंद नहीं हैं. आज के युवा उन चेहरों से जुड़ते हैं जो उनकी तरह दिखते हैं, उनसे बात करते हैं और अपनी कमजोरियां खुलकर दिखाते हैं. अनन्या पांडे का अपनी स्किन की देखभाल का तरीका साझा करना या वेदांग रैना का कसरत और स्ट्रीट स्टाइल डांस वीडियो डालना उन्हें दर्शकों के सीधे करीब लाता है.

जब रीडर या दर्शक इन स्टार्स को अपने फोन की स्क्रीन पर रोज सामान्य अंदाज में देखते हैं, तो उनके साथ निजी जुड़ाव बनता है. ऐसा जुड़ाव केवल थियेटर में नहीं बन सकता.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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यह भी पढ़ें:  "हर मूड का अलग नाम, हर आदत की पहचान… क्या है Gen Z की माइक्रो-लेबलिंग?

अपनी इमेज पर सीधा कंट्रोल

पहले किसी एक्टर की इमेज कैसी होगी, यह उनकी पीआर टीम और गॉसिप मैगजीन तय करती थीं. कई बार विवादित खबरों से उनके करियर को नुकसान पहुंचता था. इन्फ्लुएंसर मॉडल ने इन स्टार्स को अपना खुद का मीडिया हाउस बना दिया है.

अब ये स्टार्स खुद तय करते हैं कि दुनिया को उनकी जिंदगी का कौन सा हिस्सा देखना चाहिए. जिम के बाहर ली गई पैपराजी तस्वीरों के मुकाबले अब उनका अपने इंस्टाग्राम खाते पर ज्यादा कंट्रोल है. यहां वे अपनी पसंद के प्रोडक्ट्स और अपनी बात खुद पब्लिश करते हैं.

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ब्रांड्स की पसंद बना एक्टर और इन्फ्लुएंसर का मेल

ब्रांड्स अब ऐसे चेहरों की तलाश करते हैं जिनकी पहुंच सिर्फ टीवी ऐड्स यानी टीवी तक लिनिटेड न हो. वे ऐसे चेहरों को चाहते हैं जिनके पास सोशल मीडिया पर एक्टिव और जुड़े हुए फॉलोअर्स भी हों.

जब अनन्या पांडे या इशान खट्टर किसी ब्रांड के साथ कोलैब करते हैं, तो उस ब्रांड को सिर्फ एक फिल्म स्टार नहीं मिलता. उसे ऐसा इन्फ्लुएंसर भी मिलता है, जो 15-सेकंड की रील में किसी प्रोडक् को तुरंत लाखों लोगों तक पहुंचा सकता है.

बॉलीवुड के जेन जी स्टार्स का ये इन्फ्लुएंसर मॉडल सिर्फ शौक नहीं है. फिल्मों की अनिश्चित कमाई के बीच यह उन्हें नियमित आमदनी देता है, दर्शकों के करीब लाता है और अपनी इमेज पर कंट्रोल रखने में मदद करता है. बदलते सिनेमा और सोशल मीडिया के दौर में यह खुद को प्रासंगिक बनाए रखने का बड़ा कारोबार बन चुका है.

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