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Turbo Engine Explained: छोटे इंजन को बना देता है महाबली, कैसे काम करता है टर्बो

कार खरीदते समय आपने टर्बो इंजन का नाम सुना होगा. कंपनियां दावा करती हैं कि टर्बो छोटे इंजन से ज्यादा पावर और बेहतर परफॉर्मेंस निकालता है. लेकिन आखिर ये टर्बो इंजन होता क्या है? कैसे ये इंजन छोटे साइज में भी ज्यादा पावर और टॉर्क देता है. अगर आपके मन में भी ऐसे सवाल हैं, तो आइए आसान भाषा में समझते हैं टर्बोचार्ज्ड इंजन कैसे काम करता है.

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टर्बोचार्ज्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल पेट्रोल और डीजल दोनों ही इंजन में होता है. (Photo: ITG)
टर्बोचार्ज्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल पेट्रोल और डीजल दोनों ही इंजन में होता है. (Photo: ITG)

कार का इंजन उसकी जान होती है, उसके बिना कार सिर्फ मेटल का डिब्बा मात्र है. ये इंजन ही है, जो उस कार को चलने की ताकत देता है. हर कार का इंजन अलग होता है. कई बार तो एक ही कार में अलग-अलग इंजन मिलते हैं. मसलन पेट्रोल, डीजल और टर्बो इंजन. पेट्रोल और डीजल का मतलब तो साफ है. 

जो इंजन पेट्रोल फ्यूल पर चलता है वो पेट्रोल है और डीजल पर चलता है वो डीजल इंजन. मगर ये टर्बो इंजन क्या होता है? कई बार आपने टर्बो इंजन के बारे में सुना होगा. ये नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन से ज्यादा पावर जनरेट करते हैं. आइए समझते हैं टर्बो इंजन क्या होते हैं. 

टर्बोचार्ज्ड एक टेक्नोलॉजी है, जो पेट्रोल या डीजल किसी भी इंजन के साथ जोड़ी जा सकती है. अगर किसी इंजन के साथ इस टेक्नोलॉजी को जोड़ दिया जाए, तो वो इंजन टर्बो इंजन कहलाता है. अमूमन पेट्रोल इंजन के साथ इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे छोटे इंजन से ज्यादा पावर जनरेट की जा सके. 

एक टर्बो का काम किसी इंजन में ज्यादा ऑक्सीजन को पहुंचाना होता है, जिससे उसमें बेहतर कंबशन हो सके. ये टेक्नोलॉजी इंजन के साइज को बड़ा किए बिना उसे एक पावरफुल इंजन बनाने में मदद करती है. ज्यादातर छोटी गाड़ियों में इन दिनों टर्बो इंजन मिल रहा है. 

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कैसे काम करता है? 

एक सामान्य इंजन हवा को नैचुरल तरीके से खींचता है और फिर इंजन में कंबशन होता है. लेकिन एक टर्बो इंजन में लगा टर्बोचार्जर बाहर से हवा को खींचकर बहुत ज्यादा दबाव के साथ उसे सिलेंडर में भेजता है. ज्यादा हवा का मतलब है कि बेहतर कंबशन का होना और इससे ज्यादा पावर का जनरेट होना. 

सामान्य भाषा में कहें, तो एक इंजन को आप किसी इंसान की तरह समझिए. सामान्य इंजन उस इंसान की तरह होता है, जो अपनी स्पीड से दौड़ता है. मगर टर्बोचार्ज्ड इंजन एक पावरफुल एयरपंप की तरह होता है, जो उस शख्स को एक्स्ट्रा ऑक्सीजन देता है, जिससे वो ज्यादा पावर के साथ दौड़ सके. 

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एक टर्बोचार्ज्ड इंजन में टर्बाइन, कंप्रेसर, शाफ्ट और इंटरकूलर होते हैं. जैसे ही इंजन में कंबशन होता है, एग्जॉस्ट से गैस बाहर निकलती है. ये गैस टर्बाइन ब्लेड पर टकराती है और उसे तेजी से घुमाती है. टर्बाइन से जुड़ी शाफ्ट की वजह से दूसरी ओर लगा कंप्रेसर भी घूमने लगता है. 

कंप्रेसर बाहर की हवा को खींचकर उसे हाई प्रेशर से इंजन में भेजता है. गर्म हवा इंटरकूलर से होकर गुजरती है, जहां उसका टेम्परेचर कम होता है. इससे इंजन में अधिक ऑक्सीजन पहुंचती है. इसलिए ईसीयू अधिक फ्यूल इंजेक्ट कर सकता है. ज्यादा फ्यूल और ऑक्सीजन का मतलब है कि अधिक पावर और टॉर्क का पैदा होना. 

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क्या हैं फायदे और नुकसान? 

टर्बोचार्ज्ड टेक्नोलॉजी का फायदा ये है कि छोटे इंजन से ज्यादा पावर जनरेट की जा सकती है. ये इंजन ज्यादा बेहतर फ्यूल एफिशिएंसी ऑफर कर सकते हैं. हालांकि, इन इंजनों के साथ कुछ चुनौती भी होती है. इनका मेंटेनेंस महंगा होता है. हाई स्पीड पर लंबे समय तक चलने के बाद तुरंत इंजन को बंद कर देने से टर्बो पर असर पड़ सकता है. इसकी रिपेयर कॉस्ट ज्यादा होती है.

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