राजधानी दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने और लोगों को पर्यावरण के अनुकूल वाहनों की ओर आकर्षित करने के लिए रेखा गुप्ता सरकार बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है. दिल्ली सरकार अब इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के साथ-साथ हाइब्रिड कारों को भी बढ़ावा देने पर विचार कर रही है. प्रस्ताव है कि हाइब्रिड वाहनों की खरीद पर लगने वाले टैक्स और शुल्क में करीब 50 प्रतिशत तक की छूट दी जा सकती है.
दिल्ली सरकार की प्रस्तावित EV पॉलिसी 2026-2030 का सबसे बड़ा पेच फिलहाल 30 लाख रुपये तक की स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों को 50 प्रतिशत रोड टैक्स रिबेट देने के प्रस्ताव पर अटका हुआ है. इस मुद्दे पर 15 जुलाई तक अंतिम फैसला होने की संभावना है.
सरकार के भीतर एक पक्ष पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 'फुल EV मॉडल' का समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष राजधानी में अभी सीमित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का हवाला देते हुए हाइब्रिड वाहनों को EV की ओर बढ़ने का व्यावहारिक और संक्रमणकालीन विकल्प मान रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, हाइब्रिड वाहनों को शुरुआती दो वर्षों तक सीमित राहत देने और बाद में इस छूट को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के विकल्प पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. करीब 3,954 करोड़ रुपये के बजट वाली प्रस्तावित नीति में इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर आकर्षक सब्सिडी, पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग पर अतिरिक्त प्रोत्साहन और प्रदूषण कम करने के लिए कई सख्त प्रावधान शामिल हैं.
प्रस्ताव के तहत जनवरी 2027 से नए पेट्रोल और डीजल थ्री-व्हीलर के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने तथा अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल से चलने वाले टू-व्हीलर के पंजीकरण पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की तैयारी है. ऐसे में दिल्ली की नई EV पॉलिसी राजधानी के परिवहन तंत्र में बड़े बदलाव की दिशा तय कर सकती है.
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सूत्रों के मुताबिक, परिवहन विभाग नई ईवी पॉलिसी के तहत हाइब्रिड टेक्नोलॉजी वाले वाहनों को भी प्रोत्साहन देने का मसौदा तैयार कर रहा है. इसका उद्देश्य उन लोगों को राहत देना है जो पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने को लेकर अभी भी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और लंबी दूरी की यात्रा जैसी चुनौतियों के कारण असमंजस में हैं.
हाइब्रिड कारों में पेट्रोल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल होता है, जिससे ईंधन की खपत कम होती है और प्रदूषण भी पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में काफी कम होता है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार का यह कदम मध्यम वर्ग के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है.
हालंकि अलग-अलग एक्सपर्ट्स का मानना है कि पर्यावरण को बचाने के लिए EV एक बेहतर विकल्प है. लेकिन EV पॉलिसी के साथ हमें चार्जिंग स्टेशन की संख्या को भी बढ़ना होगा. जब तक EV की चार्जिंग को लेकर बेहतर विकल्प नहीं बन जाते हैं तब तक हाइब्रिड कार खरीद में 50% छूट देना सरकार का अच्छा फैसला हो सकता है.
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रेखा गुप्ता सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि मौजूदा समय में दिल्ली में हाइब्रिड कार की खरीद पर रोड टैक्स पर कोई छूट नहीं है. पहले पड़ोसी राज्यों में हाइब्रिड कर पर 2 साल तक रोड टैक्स में छूट दी गई थी तो लोगों ने हाइब्रिड कारों को काफी हद तक खरीदा था उस दौरान दिल्ली के राजस्व पर भी असर पड़ा था.
अगर प्रस्तावित छूट को मंजूरी मिलती है तो दिल्ली में हाइब्रिड कार खरीदना पहले के मुकाबले काफी सस्ता हो जाएगा. इससे वाहन खरीदारों को हजारों से लेकर लाखों रुपये तक की बचत हो सकती है. ऑटोमोबाइल उद्योग भी लंबे समय से हाइब्रिड वाहनों को प्रोत्साहन देने की मांग करता रहा है.
हालांकि, सरकार की ओर से अभी अंतिम अधिसूचना जारी नहीं की गई है. नई नीति के मसौदे पर विचार-विमर्श जारी है और संबंधित विभागों से सुझाव लिए जा रहे हैं. अंतिम निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि छूट किन श्रेणियों की हाइब्रिड कारों पर लागू होगी और इसका लाभ लेने की शर्तें क्या होंगी.
यदि यह फैसला लागू होता है तो दिल्ली देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो सकती है, जहां इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ हाइब्रिड तकनीक को भी बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जाएगा. ऐसे में अगर आप नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो थोड़ा इंतजार आपके लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है.