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सप्लाई तेज पर खरीदार सुस्त! देश में बिना बिके घरों का स्टॉक 5.25 लाख के पार

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में एक बड़ा और विरोधाभासी बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां एक तरफ बिना बिके घरों का स्टॉक बढ़ने से बाजार की रफ्तार सुस्त पड़ने के संकेत मिल रहे हैं, तो दूसरी तरफ 1 करोड़ रुपये से महंगे प्रीमियम और लग्जरी फ्लैट्स की खरीदारी में बंपर उछाल दर्ज किया गया है.

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1 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले प्रीमियम घरों की हिस्सेदारी बढ़कर 54 फीसदी हुई (Photo-ITG)
1 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले प्रीमियम घरों की हिस्सेदारी बढ़कर 54 फीसदी हुई (Photo-ITG)

रियल एस्टेट कंसलटेंसी फर्म नाइट फ्रैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर की मजबूती और रफ्तार बरकरार है. रिपोर्ट में जारी किए गए 2026 की पहली छमाही के आंकड़े बताते हैं कि देश का हाउसिंग मार्केट अभी भी मजबूती से टिका हुआ है, लेकिन तस्वीर में कुछ नए और चौंकाने वाले संकेत भी उभर रहे हैं.

ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, इस साल के शुरुआती छह महीनों में देश के 8 बड़े शहरों में 1,71,471 घरों की बिक्री दर्ज की गई है. ये पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले महज 1 फीसदी ज्यादा है. हालांकि, चिंता और दिलचस्पी की बात ये है कि इसी दौरान 1,87,350 नए घर लॉन्च हो गए, जो कुल बिक्री से करीब 16 हजार यूनिट ज्यादा हैं. साफ है कि बाजार में खरीदार तो मौजूद हैं, लेकिन डेवलपर्स की तरफ से सप्लाई उससे भी तेज गति से आ रही है.

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बढ़ गया अनसोल्ड घरों का स्टॉक!

सप्लाई और डिमांड के इसी असंतुलन का असर अब अनसोल्ड इन्वेंट्री पर दिखने लगा है. नाइट फ्रैंक के मुताबिक देशभर में बिना बिके घरों की संख्या बढ़कर 5,25,695 यूनिट्स पर पहुंच गई है. ये आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 4 फीसदी ज्यादा है. इससे मौजूदा स्टॉक के खत्म होने का औसत समय बढ़कर अब 6 क्वार्टर हो गया है.

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लग्जरी की धूम, अफोर्डेबल पस्त!

बाजार में सबसे बड़ा बदलाव खरीदारों के मिजाज में देखा जा रहा है. पहले जहां लोग किफायती घरों की तलाश में रहते थे, वहीं अब प्रीमियम और लग्जरी सेगमेंट का दबदबा बढ़ गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, 1 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी कुल बिक्री में 54 फीसदी तक पहुंच गई है. पिछले साल ये आंकड़ा 49 फीसदी था. दूसरी तरफ, 50 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों का ग्राफ लगातार नीचे गिर रहा है.

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मुंबई नंबर वन, NCR में गिरावट

47,355 यूनिट्स की बिक्री के साथ मुंबई देश का सबसे बड़ा और सबसे हॉट हाउसिंग मार्केट बना हुआ है. वहीं बेंगलुरु में भी बिक्री में 5 फीसदी की शानदार ग्रोथ दर्ज की गई है जबकि पुणे के बाजार में 2 फीसदी की मामूली बढ़त रही है. दिल्ली-NCR के बाजार में थोड़ी सुस्ती देखी गई और बिक्री में 7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.

ऑफिस रियल एस्टेट को GCC का सहारा

कमर्शियल यानी ऑफिस रियल एस्टेट के दमदार प्रदर्शन की वजह ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) रहे हैं. वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत में देसी-विदेशी कंपनियां लगातार ऑफिस स्पेस किराए पर ले रही हैं. नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट के मुताबिक 2026 की पहली छमाही में 4.46 मिलियन वर्ग मीटर ऑफिस स्पेस की लीजिंग हुई, जो पिछले साल के रिकॉर्ड स्तर से महज 2 फीसदी कम है. इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा हाथ GCC (Global Capability Centers) का है.

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बड़ी विदेशी कंपनियां भारत में अपने टेक्नोलॉजी, रिसर्च और बिजनेस ऑपरेशन्स का विस्तार कर रही हैं. कुल ऑफिस लीजिंग में GCC की हिस्सेदारी 43 फीसदी रही. वहीं, फ्लेक्सिबल (Flex) ऑफिस स्पेस का शेयर बढ़कर 24 फीसदी हो गया है, जिससे ऑफिस मार्केट में वैकेंसी घटकर महज 14.6 फीसदी रह गई है.

क्या कहते हैं संकेत?

कुल मिलाकर देखें तो देश का रियल एस्टेट सेक्टर फिलहाल मजबूत स्थिति में खड़ा है. घरों की बिक्री ऊंचे स्तर पर है और ऑफिस मार्केट भी रिकॉर्ड्स के करीब है. हालांकि, बढ़ती अनसोल्ड इन्वेंट्री इस बात का साफ इशारा कर रही है कि आने वाले महीनों में डेवलपर्स के लिए डिमांड और सप्लाई के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ा इम्तिहान होगा.

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