अमेरिका और ईरान के बीच जंग एक बार फिर भड़क गई है. अमेरिका ने अब ईरान के दो सरकारी तेल टैंकरों पर मिसाइलें दाग दी हैं. अमेरिका ने अपनी 'टैंकर के बदले टैंकर' नीति के तहत ये हमले किए हैं, जिसमें 100 ईरानी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया.
AXIOS की रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों ईरानी तेल टैंकर ईरान के तट के पास अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी रेखा के उत्तर में लंगर डाले हुए थे. अमेरिकी ड्रोनों ने निशाना बनाते हुए सीधे उनके इंजन रूम पर मिसाइलें दागीं.
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान ने होर्मुज में अमेरिका के कमर्शियल जहाजों पर हमले किए थे. इसी के जवाब में अमेरिका ने भी मंगलवार ईरानी तेल टैंकरों पर अटैक कर दिया.
अमेरिकी हमलों IRGC के एयर डिफेंस सेंटर, रडार सिस्टम, बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताओं, संचार सुविधाओं, पोत-रोधी क्रूज मिसाइल लॉन्चरों और हमलावर ड्रोन लॉन्चरों को भी तबाह कर दिया गया.
ईरान ने भी दागीं 25 बैलिस्टिक मिसाइलें
व्हाइट हाउस और अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि ये कार्रवाई अमेरिकी ठिकानों और समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए जरूरी थी. इस कार्रवाई के जवाब में ईरान ने करीब 25 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से लगभग आधी ही जॉर्डन के एयरस्पेस तक पहुंच सकीं. जॉर्डन ने 10 मिसाइलों को हवा में ही ढेर कर दिया, जबकि तीन मिसाइलें बिना किसी जान-माल के नुकसान के गिर गईं.
इसके अलावा, ईरान ने बहरीन, कुवैत और इराक के एरबिल में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर दो दर्जन से ज्यादा ड्रोन और मिसाइलें दागीं, जिन्हें काफी हद तक हवा में ही नष्ट कर दिया गया.
अमेरिका का बड़ा दावा
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इस कार्रवाई से ईरान की हमलावर क्षमता कमजोर हुई है और कमर्शियल जहाजों के लिए खतरा कम से कम एक महीने के लिए टल गया है. तनाव के बावजूद मंगलवार को लगभग 40 जहाजों ने लाखों बैरल तेल के साथ होर्मुज को सुरक्षित पार किया, जिन्हें अमेरिकी बल एस्कॉर्ट कर रहे थे.
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दूसरी तरफ, ईरान ने कुहेस्तक में एक विवाह समारोह पर अमेरिकी हमले में आम नागरिकों के मारे जाने का आरोप लगाया है. CENTCOM के प्रवक्ता ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना नागरिकों को निशाना नहीं बनाती, जबकि IRGC ऐसा करता आया है.
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