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आंध्र प्रदेश के इस सरकारी स्कूल में पढ़ता है सिर्फ एक छात्र, शिक्षक फिर भी करा रहे पढ़ाई

आंध्र प्रदेश में एक ऐसा स्कूल है जहां केवल एक बच्चे के लिए स्कूल खुलाता है, मिड डे मील बनता है और साफ-सफाई की व्यव्सथा भी अच्छी होती है. हालांकि, पिछले साल स्कूल में दो छात्र थे लेकिन कक्षा 2 तक पढ़ाई होने की वजह से उसे दूसरे स्कूल में एडमिशन लेना पड़ा.

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स्कूल में पढ़ता है केवल एक छात्र.
स्कूल में पढ़ता है केवल एक छात्र.

आंध्र प्रदेश के पर्वतिपुरम मन्यम जिले के पेडाबोंडापल्ली गांव के एक सरकारी प्राथमिक स्कूल में इस समय केवल एक छात्र पढ़ रहा है. गांव की रेड्डी वीधी स्थित मंडल परिषद प्राथमिक विद्यालय में कक्षा 2 में केवल मेकला अरविंद का नामांकन है. इसके बावजूद स्कूल में शिक्षक गौरानायडू नियमित रूप से कक्षाएं संचालित कर रहे हैं. 

बताया जा रहा है कि पिछले साल इस स्कूल में दो छात्र पढ़ते थे. इनमें से एक छात्र के कक्षा 3 में पहुंचने के बाद दूसरे स्कूल में दाखिला लेने से यहां अब केवल अरविंद ही रह गया है. दरअसल, इस स्कूल में कक्षा 2 तक ही पढ़ाई होती है. ऐसे में कक्षा 3 में जाने वाले छात्र को आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे स्कूल का रुख करना पड़ा. 

एक छात्र फिर भी चल रही है क्लास

बता दें कि स्कूल में सिर्फ एक छात्र होने के बावजूद शिक्षक अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं और अरविंद की पढ़ाई जारी है. इसके अलावा एक अन्य कर्मचारी मिड-डे मील और साफ-सफाई से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालता है. 

पढ़ाई को लेकर बढ़ रही है चिंता 

गांव में स्कूल की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है. ग्रामीणों का कहना है कि एक समय इस स्कूल में कई बच्चे पढ़ने आते थे, लेकिन धीरे-धीरे छात्रों की संख्या कम होती चली गई. अब केवल एक ही छात्र स्कूल में पढ़ाई करने जाता है. ग्रामीणों को आशंका है कि अगर छात्रों की संख्या इसी तरह घटती रही तो भविष्य में स्कूल को बंद किया जा सकता है या फिर किसी दूसरे स्कूल के साथ उसका विलय किया जा सकता है. 

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क्यों स्कूल नहीं जाते हैं यहां के बच्चे 

पेडाबोंडापल्ली के इस स्कूल की स्थिति ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों के सामने मौजूद बड़ी चुनौती को भी दिखाती है. गांवों से परिवारों का पलायन और बच्चों का दूसरे स्कूलों में दाखिला लेने जैसे कारणों से कई जगह सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार घट रही है. ऐसे में कम नामांकन वाले स्कूलों को जारी रखना और बच्चों को उनके आसपास ही शिक्षा उपलब्ध कराना शिक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बनता जा रहा है.

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