संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मौजूदगी को लेकर ईरान ने कड़ा रुख अपनाया. ईरान के UN प्रतिनिधि अमीर सईद इरावानी ने सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति के खिलाफ वॉर क्राइम यानी युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार से जुड़े आरोपों को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानूनी कार्रवाई का मुद्दा उठा है, उसे UN महासभा के मंच पर बोलने की इजाजत कैसे दी जा सकती है.
ईरानी प्रतिनिधि ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना शांति और न्याय कायम करने के लिए हुई थी, न कि ऐसे लोगों को मंच देने के लिए जिन पर गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के आरोप हैं. उन्होंने निशाना साधते हुए कहा कि नेतन्याहू यहां अपने कदमों को सही ठहराने के लिए आए हैं या फिर उन्हें अदालत में जवाब देना चाहिए.
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बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले ही कहा था कि वह UN में इजरायल की सैन्य कार्रवाई का बचाव करेंगे. उन्होंने कहा था कि वह इजरायली सैनिकों और गाजा को लेकर दुनिया के सामने अपना पक्ष रखेंगे. UNGA का यह सत्र ऐसे समय हो रहा है, जब गाजा युद्ध, ईरान-अमेरिका तनाव और पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं.
जानकारी के मुताबिक, इस साल की महासभा में करीब 130 देशों के शीर्ष नेता शामिल हो रहे हैं, जिसमें मध्य पूर्व का संकट चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है.
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आरोपों पर इजरायल का क्या कहना है?
गाजा में इजरायल की कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. वहीं, इजरायल इन आरोपों को खारिज करता रहा है और अपनी सैन्य कार्रवाई को हमास के खिलाफ सुरक्षा और आत्मरक्षा से जोड़ता रहा है.
ईरान का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब UN में गाजा युद्ध को लेकर अलग-अलग देशों के बीच तीखी बहस जारी है. अब नजर नेतन्याहू के भाषण पर है कि वह ईरान और गाजा से जुड़े सवालों का किस तरह जवाब देते हैं.
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