कर्जे पर पलने वाला PAK, अब लोन बांटने वाले IMF का चेयरमैन बना!

जिस देश को अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए IMF से अगली किस्त का इंतजार रहता है, वही पाकिस्तान अब इस बैंक के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्षता करेगा. सुनने में ये भेल अजीब लगेगा. लेकिन 1953 के बाद पहली बार पाकिस्तान IMF का चेयरमैन बनन गया है.

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पाकिस्तान IMF का चेयरमैन बना है. (Photo: ITG) पाकिस्तान IMF का चेयरमैन बना है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:32 PM IST

विदेशी कर्जे, सऊदी मदद और अमेरिकी डॉलर पर पलने वाला पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मंच पर एक अहम जिम्मेदारी मिलने जा रही है. पाकिस्तान को साल 2027 के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक समूह (WBG) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का अगला अध्यक्ष नॉमिनेट किया गया है. पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी. इस पद पर पाकिस्तान की वापसी 1953 के बाद पहली बार हो रही है. 

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दिलचस्प बात यह है कि जिस IMF से पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए अरबों डॉलर का कर्ज ले रहा है, अब उसी संस्था के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्षता करने का मौका भी उसे मिलेगा. पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी.

पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्री अहद खान चीमा को बैंकॉक में आयोजित 2026 की IMF-वर्ल्ड बैंक सालाना बैठक के पूर्ण सत्र के दौरान औपचारिक रूप से अगला अध्यक्ष घोषित किया गया. चीमा विश्व बैंक में पाकिस्तान के गवर्नर की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं. पाकिस्तान सरकार ने इस घटनाक्रम को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है. 

आर्थिक मामलों के मंत्रालय के मुताबिक इस अध्यक्षता से पाकिस्तान को वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकास से जुड़े मुद्दों पर होने वाली चर्चाओं में योगदान देने का अवसर मिलेगा. साथ ही उसे सदस्य देशों के बीच रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने का मौका भी मिलेगा. हालांकि यह जिम्मेदारी ऐसे समय में मिली है, जब पाकिस्तान खुद अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए IMF के कर्जे पर निर्भर है.

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MF से 7 अरब डॉलर का कर्ज, 1.2 अरब डॉलर और मिलने की उम्मीद

पाकिस्तान की आर्थिक तस्वीर देखें तो यह घटनाक्रम और दिलचस्प हो जाता है. देश IMF के 7 अरब डॉलर के एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) कार्यक्रम के तहत कर्ज ले रहा है. इसका मकसद पाकिस्तान की भुगतान संतुलन संबंधी जरूरतों को पूरा करना और आर्थिक सुधारों को समर्थन देना है. आसान शब्दों में कहें तो विदेशी भुगतान और विदेशी मुद्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान को IMF की मदद की जरूरत है.

इसके अलावा, पाकिस्तान 1.4 अरब डॉलर की रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) के तहत भी वित्तीय सहायता ले रहा है. यह कार्यक्रम जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों से निपटने और अर्थव्यवस्था को लंबे समय में मजबूत बनाने के लिए है.

इतना ही नहीं, IMF के कर्मचारियों और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच दोनों ऋण कार्यक्रमों की ताजा समीक्षा पर सहमति बनने के बाद पाकिस्तान को करीब 1.2 अरब डॉलर और मिलने की उम्मीद है. हालांकि, इसके लिए IMF के कार्यकारी बोर्ड की मंजूरी जरूरी है.

कर्ज लेने वाले से वैश्विक आर्थिक चर्चा की अध्यक्षता तक

12 से 18 अक्टूबर तक चल रही IMF-वर्ल्ड बैंक की सालाना बैठक में 191 देशों के 15,000 से ज्यादा प्रतिभागी शामिल हुए हैं. इन बैठकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकास और वित्तीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है.

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हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है. बोर्ड की अध्यक्षता मिलने का मतलब IMF या विश्व बैंक के खजाने की चाबी मिल जाना नहीं है. इस पद से पाकिस्तान को वैश्विक आर्थिक चर्चाओं में अहम भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा, लेकिन कर्ज, भुगतान संतुलन और आर्थिक सुधारों की चुनौतियां अपनी जगह बनी रहेंगी.
 

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