फ्रांस में हिंसा के बाद सरकार का एक्शन, पेरिस समेत कई शहरों में कर्फ्यू, प्रदर्शन पर प्रतिबंध

फ्रांस में वीकेंड पर हिंसा, आगजनी और लूटपाट की घटनाएं हुईं. इसके बाद सरकार ने पेरिस, लिली, नीस समेत कई शहरों में पाबंदियां लगा दीं. कुछ इलाकों में कर्फ्यू लगाया गया है. सार्वजनिक सभाओं पर भी रोक लगाई गई है. हिंसा के दौरान करीब 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया.

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फ्रांस सरकार ने पेरिस, लिली, नीस समेत कई शहरों में कुछ इलाकों में कर्फ्यू लगाया और सार्वजनिक सभाओं पर पाबंदियां लगा दीं. (Photo-Reuters) फ्रांस सरकार ने पेरिस, लिली, नीस समेत कई शहरों में कुछ इलाकों में कर्फ्यू लगाया और सार्वजनिक सभाओं पर पाबंदियां लगा दीं. (Photo-Reuters)

aajtak.in

  • पेरिस,
  • 20 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:44 AM IST

फ्रांस में महंगाई, खराब पब्लिक सर्विसेज और आर्थिक परेशानियों के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और लूटपाट के बाद सरकार ने कई शहरों में पाबंदियां लगा दी हैं. सोमवार को पेरिस, लिली, नीस और दूसरे शहरों में स्थानीय स्तर पर कर्फ्यू और सार्वजनिक सभाओं पर रोक के कदम उठाए गए. वीकएंड के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुई थीं. कई दुकानों और सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचा था.

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प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने कहा कि फिलहाल पूरे पेरिस में कर्फ्यू लगाने के बजाय चुनिंदा इलाकों में पाबंदियां लगाना ज्यादा सही है. उन्होंने इमरजेंसी घोषित करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया. लेकोर्नू ने कहा कि कानून-व्यवस्था बहाल करने का मेरा संकल्प पूरी तरह पक्का है.

पेरिस में रात 11 बजे से सुबह 6 बजे तक पाबंदी

पेरिस पुलिस ने सोमवार रात 8 बजे से राजधानी के कुछ इलाकों में प्रदर्शनों पर रोक लगा दी. इसके अलावा प्लास दे ला रिपब्लिक और ले आल इलाके में रात 11 बजे से मंगलवार सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लगाया गया. पुलिस ने पाबंदियों का पालन कराने के लिए अतिरिक्त जवान भी तैनात किए.

प्रधानमंत्री कार्यालय के एक सूत्र के मुताबिक, लिली, डूए, वाटिन्यी और देनैन में नाबालिगों के लिए अगले दो दिनों तक रात 8 बजे से सुबह 6 बजे तक बाहर निकलने पर रोक रहेगी. यह फैसला स्थानीय मेयरों की सहमति से लिया गया.  नीस के मेयर एरिक चियोत्ती ने शहर के केंद्र में नाबालिगों के लिए रात का कर्फ्यू घोषित किया. वहीं, मार्सिले में सभाओं और प्रदर्शनों पर रोक लगाई गई. ये पाबंदियां कई हफ्तों से चल रहे छात्र आंदोलन और वीकेंड में फैली हिंसा के बाद लगाई गई हैं. प्रदर्शनकारियों ने दुकानों में लूटपाट की, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और पुलिस से झड़पें कीं.

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फ्रांस के गृह मंत्रालय ने बताया कि, हिंसा के बाद करीब 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया और लगभग 1,000 पुलिसकर्मी और जेंडरमेरी के जवान घायल हुए. शनिवार को एक प्रदर्शनकारी की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी.

दरअसल, प्रदर्शन महंगाई, जीवन-यापन की बढ़ती लागत, स्कूलों की खराब स्थिति और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर नाराजगी के बीच शुरू हुए थे. शनिवार को देश के कई शहरों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे. ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ जगहों पर हिंसा और तोड़फोड़ हुई.

करीब 3,000 दुकानें हुई प्रभावित

फ्रांस के व्यापार और खुदरा कारोबार से जुड़े संगठन फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड रिटेल के मुताबिक, वीकेंड की हिंसा से करीब 3,000 दुकानें प्रभावित हुई हैं. संगठन ने सरकार से प्रभावित कारोबारियों को टैक्स और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी राहत देने की मांग की है. संगठन ने कहा कि हर लूटी गई दुकान के पीछे कारोबारी, कर्मचारी और परिवार हैं, जिनकी सालों की मेहनत कुछ घंटों में बर्बाद हो गई.

प्रधानमंत्री लेकोर्नू ने कहा कि हिंसा से प्रभावित कारोबारियों की मदद के लिए मंगलवार से कर्मचारियों को अस्थायी रूप से काम से हटाने यानी फर्लो से जुड़ी व्यवस्था लागू की जाएगी. इसका उद्देश्य प्रभावित कंपनियों को आर्थिक संकट से उबरने में मदद देना है.

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पेरिस के मध्य हिस्से में कई लग्जरी दुकानों को नुकसान पहुंचा. प्लास वेंदोम इलाके में Dior स्टोर का एंट्री गेट तोड़ा गया. Rolex, Louis Vuitton, Ralph Lauren और Gucci के स्टोरों की खिड़कियों को भी नुकसान पहुंचा.

मार्सिले के फुटबॉल क्लब ओलंपिक डी मार्सिले ने बताया कि शहर की ऐतिहासिक मुख्य सड़क पर स्थित उसका आधिकारिक स्टोर लूट लिया गया. मध्य फ्रांस के एक शहर में टाउन हॉल में भी आग लगा दी गई थी. मार्सिले में कपड़ों की दो दुकानों का प्रबंधन करने वाले जेरार्ड नूशी ने कहा कि पुलिस लूटपाट रोकने में नाकाम रही. उन्होंने बताया कि दुकानों में तोड़फोड़ की गई और सामान बर्बाद कर दिया गया.

सरकार ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को लूटे गए सामान की बिक्री से जुड़े विज्ञापन हटाने और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने का निर्देश दिया है. डिजिटल मामलों की कनिष्ठ मंत्री ऐन ले हेनान्फ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह जानकारी दी.

लेकोर्नू ने अति-वामपंथी समूहों पर लगाए आरोप

प्रधानमंत्री लेकोर्नू ने आरोप लगाया कि अति-वामपंथी समूह फ्रांस में हुई हिंसा के कुछ सबसे गंभीर मामलों में शामिल थे. उन्होंने कहा कि कुछ आंदोलन राष्ट्रपति चुनाव से पहले देश में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं. लेकोर्नू ने कहा कि देश में एक ऐसा अति-वामपंथी आंदोलन है, जो राष्ट्रपति चुनाव से पहले गहरी अशांति पैदा करना चाहता है.

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वामपंथी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जीन-ल्यूक मेलेंशों ने प्रधानमंत्री से अपने आरोपों के समर्थन में सबूत देने को कहा. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर लेकोर्नू ऐसा नहीं कर सकते, तो उन्हें माफी मांगनी चाहिए और अशांति बढ़ाने वाले बयान देने से बचना चाहिए. इस बीच, फ्रांस की ट्रेड यूनियनों ने 5 नवंबर को एक और हड़ताल और रैली करने का आह्वान किया है. इससे आगे भी जनजीवन प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है.

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मैक्रों ने गृह मंत्री का इस्तीफा ठुकराया

हिंसा से निपटने के तरीके को लेकर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार पर सवाल उठ रहे हैं. सरकार बजट विधेयक पारित कराने की कोशिश भी कर रही है, जिसका मकसद देश के सार्वजनिक वित्त को नियंत्रित करना है.

मैक्रों के कार्यालय के मुताबिक, राष्ट्रपति ने गृह मंत्री लॉरां नुनेज का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया. इसके बजाय उन्होंने गृह मंत्री को बैरिकेड हटाने, लूटपाट रोकने और खुफिया जानकारी जुटाने तथा पहले से तैयारी करने में हुई चूकों के बारे में पारदर्शिता बरतने का निर्देश दिया. वहीं नुनेज ने कहा कि मंगलवार शाम पेरिस सेंट-जर्मेन और बार्सिलोना के बीच प्रस्तावित चैंपियंस लीग मैच तय कार्यक्रम के मुताबिक होगा.

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पेरिस, मार्सिले और लियोन के मेयरों ने अखबार लिबरेशन में साझा लेख लिखकर कहा कि वे प्रदर्शनों के आदी हैं, लेकिन हालिया हिंसा का स्तर चिंताजनक था. उन्होंने कहा कि शनिवार को पहली बार ऐसा लगा कि शहरों के कुछ हिस्से सुरक्षा के बिना छोड़ दिए गए हैं. नुनेज ने फ्रांस इंटर रेडियो को बताया कि शनिवार को देशभर में 60,000 पुलिसकर्मी और अन्य सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए थे. हालांकि, उन्होंने माना कि हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए यह संख्या पर्याप्त नहीं रही.

स्कूलों की छुट्टियों से तनाव घटने की उम्मीद

सोमवार से स्कूलों की छुट्टियां शुरू होने के कारण तनाव कम होने की उम्मीद जताई गई है. हालांकि, छात्रों ने पेरिस के लौवर संग्रहालय और साइंस पो विश्वविद्यालय समेत कई जगहों पर जमावड़े और रास्ते रोकने की योजना जारी रखी. इसी बीच, मैक्रों खाड़ी देशों की यात्रा के तहत कुवैत पहुंचे. इस दौरे का उद्देश्य पेट्रोल और डीजल की अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करना है, जिससे ईंधन की कीमतें कम करने में मदद मिल सकती है.

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यूरोप के दूसरे देशों में भी जीवन-यापन की बढ़ती लागत को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं. इटली, बेल्जियम और अल्बानिया में भी लोगों ने अपनी नाराजगी जताई है. कई यूरोपीय सरकारों ने फ्रांस जाने वाले अपने नागरिकों को बड़ी भीड़ से दूर रहने और सावधानी बरतने की सलाह दी है.

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