'ताइवान को हथियार दिए तो रद्द होगी मुलाकात', चीन की अमेरिका को खुली चेतावनी

सूत्रों के मुताबिक, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा की तैयारियों के बीच चीन ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि ताइवान का मुद्दा दोनों देशों के बीच एक रेड लाइन है.

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रद्द होगी जिनपिंग-ट्रंप की मुलाकात? (File Photo: ITG) रद्द होगी जिनपिंग-ट्रंप की मुलाकात? (File Photo: ITG)

रोहित शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 12 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:47 PM IST

सूत्रों के मुताबिक चीन ने अमेरिका को चेतावनी दे दी है कि अगर वॉशिंगटन इस महीने के आखिर में होने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित बैठक से पहले ताइवान को हथियारों की किसी भी नई बिक्री की मंजूरी देता है तो चीन इस बैठक को रद्द कर सकता है. 

सूत्रों की मानें तो शी की अमेरिका यात्रा की तैयारियों के बीच चीन ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि ताइवान का मुद्दा दोनों देशों के बीच एक रेड लाइन है. दरअसल, चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और जरूरत पड़ने पर बल का इस्तेमाल करके भी उसे अपने साथ मिलाने की बात करता रहा है. 

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ट्रंप के लिए चीनी राष्ट्रपति के साथ बैठक बहुत ही अहम मानी जा रही है. क्योंकि नवंबर में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में ट्रंप प्रशासन कुछ कूटनीतिक उपलब्धियां दिखाना चाहता है. ट्रंप ने कहा है कि वे 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में चीनी राष्ट्रपति और उनकी पत्नी की मेजबानी करेंगे और उनके सम्मान में एक स्टेट डिनर भी रखेंगे. हालांकि, चीन ने अब तक राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. 

बीजिंग में मई में ट्रंप से मुलाकात के दौरान भी चीनी राष्ट्रपति शी ने ताइवान को दोनों देशों के रिश्तों का सबसे अहम मुद्दा बताया था. उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर इस मुद्दे को समय रहते सही तरीके से नहीं संभाला गया तो दोनों देशों के बीच टकराव हो सकता है. वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि ताइवान को हथियारों की बिक्री चीन के साथ बातचीत में "मोल-भाव के लिए एक बहुत अच्छा हथियार" हो सकती है. 

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ताइवान स्ट्रेट और उसके आसपास चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के चलते क्षेत्र में तनाव की स्थिति बढ़ी है. 1979 में अमेरिका ने बीजिंग के पक्ष में ताइपे के साथ राजनयिक संबंध तोड़ दिए थे. हालांकि, अमेरिकी कांग्रेस के ताइवान रिलेशन एक्ट के तहत अमेरिका ताइवान को अपनी रक्षा क्षमता बनाए रखने के लिए हथियार देता है.  पिछले साल ट्रंप प्रशासन की ओर से ताइवान के लिए लगभग 11 अरब डॉलर के हथियारों के पैकेज की घोषणा की गई थी. इसे अब तक का सबसे बड़ा पैकेज बताया गया था. जबकि चीन ने इसपर नाराजगी जताई थी. 

ट्रंप और शी की बैठक में ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका की जंग भी एक अहम मुद्दा हो सकती है. चीन तेहरान का मुख्य आर्थिक साझेदार है. फरवरी के अंत में ट्रंप द्वारा शुरू की गई जंग के लंबा खिंचने के बाद अमेरिका ने चीन पर ईरान के साथ व्यापार नहीं करने का दवाब बनाया है. हालांकि सूत्रों के मुताबिक, "चीन ने सहयोग का रवैया दिखाया है और वह अमेरिका के साथ बातचीत में कोई रुकावट नहीं डाल रहा है."

इसके अलावा AI की सुरक्षा को लेकर बातचीत का ढांचा भी दोनों नेताओं की बैठक के एजेंडे में अहम मुद्दा हो सकता है. 

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