ममता-ऋतब्रत और हुमायूं कबीर... टीएमसी के 'तीनों गुट' पर शुभेंदु सरकार की टेढ़ी नजर

पश्चिम बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी की टेंशन खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. पार्टी टूट चुकी है और दोबारा से उभरने की कवायद में जुटी ममता बनर्जी को शहीद दिवस पर कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिली. इसी तरह बागी गुट के अरमानों पर भी पानी फिर गया तो हुमायूं कबीर पर सरकार का शिकंजा कसा जा रहा है.

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शुभेंदु अधिकारी के चक्रव्यूह में ममता से लेकर हुमायूं तक (Photo-ITG) शुभेंदु अधिकारी के चक्रव्यूह में ममता से लेकर हुमायूं तक (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:52 PM IST

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य की कमान अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के हाथों में है, सरकार बदलने के बाद तृणमूल कांग्रेस इतिहास के अपने सबसे बड़े संगठनात्मक और राजनीतिक संकट से गुजर रही है. महज दो महीनों के भीतर 28 साल पुरानी टीएमसी न सिर्फ सत्ता से बाहर हुई, बल्कि तीन अलग-अलग धड़ों में बंट गई है. अब तीनों ही गुट शुभेंदु सरकार के निशाने पर है.  

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टीएमसी में टूट का आगाज चुनाव से पहले ही हो गया था. हुमांयू कबीर टीएमसी से अलग होकर अपनी पार्टी बना लगी थी और दो सीटों से चुनाव जीतने में सफल रहे थे. चुनाव नतीजे के बाद ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी के 80 में से 60 विधायकों और काकोली घोष की अगुवाई में 20 लोकसभा सांसद ने ममता बनर्जी से अलग राह चुन ली. एक धड़ा ममता बनर्जी के वफादार का भी है. 

बंगाल की सत्ता पर काबिज बीजेपी और उसकी अगुवाई कर रहे सीएम शुभेंदु अधिकारी की सरकार के निशाने पर इन दिनों टीएमसी के तीनों धड़े हैं. ममता बनर्जी का वफादार खेमा हो या फिर बागी गुट. इसके अलावा हुमायूं कबीर पर भी शिकंजा कसा जा रहा है.
 
ममता बनर्जी गुट पर सरकार की टेंढी नजर

विधानसभा चुनाव की शिकस्त और पार्टी में हुई ऐतिहासिक टूट (80 में से करीब 60 विधायकों का साथ छोड़ना) के बाद ममता बनर्जी अपने बचे-खुचे वफादार नेताओं के साथ सड़क पर संघर्ष कर रही हैं. हालांकि, शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा के पटल से साफ एलान कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस अब एक बंद अध्याय है और ममता कभी सत्ता में नहीं लौटेंगी.

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शुभेंदु सरकार अब पूरी तरह ममता बनर्जी गुट को सियासी रूप से पूरी तरह पंगु बनाने के लिए 2011 से 2026 के शासनकाल के दौरान हुए 'संस्थागत भ्रष्टाचार', भाई-भतीजावाद और राशन-भर्ती घोटालों की जांच को तेज कर रही है, शाहजहां शेख, शौकत मोल्ला और जहांगीर खान जैसे ममता के करीबी और बाहुबली नेताओं पर कानूनी शिकंजा कसना सीधे तौर पर ममता गुट की रीढ़ तोड़ने की रणनीति का हिस्सा है. 

कोलकाता की राजनीति में21 जुलाई का 'शहीद दिवस' की अपनी सियासी अहमियत है. टीएमसी के लिए यह केवल एक तारीख नहीं, बल्कि पार्टी की आत्मा है. ममता बनर्जी का आधिकारिक खेमा इस दिन रैली करने की तैयारी की है, लेकिनप्रशासन ने पूरे इलाके में धारा 163 लागू कर कार्यक्रम के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया है. इसके चलते ममता खेमे के शक्ति प्रदर्शन की तैयारी पर पुलिस की सख्ती ने पानी फेर दिया.

ऋतब्रत बनर्जी की खिलाफ सरकार गुई सख्त
मई 2026 में दिल्ली के बंगा भवन में सीएम शुभेंदु अधिकारी से एक 'आकस्मिक मुलाकात' के बाद टीएमसी विधायक ऋतब्रत बनर्जी  ने पार्टी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया था. अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव से नाराज ऋतब्रत बनर्जी ने 60 विधायकों को अपने साथ मिला लिया और विधानसभा में खुद को 'असली टीएमसी' बताते हुए विपक्ष के नेता बन गए.

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हालांकि, शुरुआत में ऋतब्रत बनर्जी की बगावत से शुभेंदु को फायदा हुआ, लेकिन अब ऋतब्रत गुट सरकार के निशाने पर है. हाल ही में जब शुभेंदु सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता(UCC) विधेयक की समीक्षा के लिए कमेटी गठित करने का प्रस्ताव रखा, तो ऋतब्रत बनर्जी  के नेतृत्व वाले इस बागी गुट ने इसका कड़ा विरोध किया और सदन से वॉकआउट कर दिया. 

सीएम शुभेंदु ने साफ कर दिया है कि सरकार के एजेंडे में बाधा डालने वाले किसी भी गुट को बख्शा नहीं जाएगा. ममता बनर्जी की तरह ऋतब्रत बनर्जी के अगुवाई वाले बागी गुट ने शहीद दिवस पर रैली करने की योजना बनाई थी. इसे बागी गुट एक नई शुरुआत के तौर पर पेश करना चाहता है, लेकिन शुभेंदु सरकार ने शहीद दिवस पर होने वाले कार्यक्रम के लिए इजाजत नहीं दिया. इस तरह ऋतब्रत बनर्जी के गुट के सियासी अरमानों पर पानी फिर गया है.

हुमायूं कबीर के खिलाफ कसता कानूनी शिकंजा
टीएमसी से निलंबित होने के बाद 'आम जनता उन्नयन पार्टी' (AJUP) बनाने वाले नौदा के विधायक हुमायूं कबीर इस समय शुभेंदु सरकार के सबसे तीखे निशाने पर हैं. मुर्शिदाबाद में एक जनसभा के दौरान हुमायूं कबीर ने भाजपा नेतृत्व को धमकी देते हुए कहा था कि जिस दिन मैंने हजारों मुस्लिमों को एकजुट कर सड़कों पर उतार दिया, उस दिन इतना कड़ा प्रहार करूंगा कि भाजपा का झंडा उठाने वाला कोई नहीं बचेगा. 

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हुमांयू कबीर के भड़काऊ और सांप्रदायिक बयान पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अब बहुत हुआ, ऐसे तत्वों को स्थायी सबक सिखाने का समय आ गया है. शुभेंदु सरकार ने कबीर के खिलाफ रेजिनगर और शक्तिपुर थानों में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज कराए हैं. शुभेंदु ने चेतावनी देते हुए कि यह हुमायूं कबीर का आखिरी ऐसा बयान होगा और राज्य में कानून का राज स्थापित करने के लिए गुंडागर्दी को पूरी तरह कुचल दिया जाएगा.
 
बंगाल में हुमायूं कबीर जैसे नेताओं पर भड़काऊ बयानों के लिए कानूनी चाबुक चलाकर,शुभेंदु सरकार ने यह साफ संदेश दे दिया है कि टीएमसी का कोई भी धड़ा यदि उनके एजेंडे के आड़े आया, तो सियासी अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहे.

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