200 की डिश, 50% OFF का ऑफर... फिर बिल इतना ज्यादा कैसे? फूड ऐप्स का खेल समझिए

फूड डिलीवरी ऐप पर बड़ा डिस्काउंट देखकर अक्सर लगता है कि खाना सस्ते में मिल रहा है. लेकिन कई बार ऑफर के बाद भी फाइनल बिल उम्मीद से ज्यादा हो सकता है. आखिर 50% ऑफ के बावजूद खाना महंगा कैसे पड़ जाता है? समझिए पूरा गणित.

Advertisement
असली खेल कीमत से ज्यादा बिल का है (Photo:AI Generated) असली खेल कीमत से ज्यादा बिल का है (Photo:AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 2:56 PM IST

फूड डिलीवरी ऐप खोलते ही सबसे पहले नजर जाती है डिस्काउंट पर. 30 फीसदी ऑफ, 40 फीसदी ऑफ और कई बार 50 फीसदी या उससे ज्यादा की छूट भी दिखाई देती है. लेकिन क्या ज्यादा प्रतिशत का डिस्काउंट हमेशा सस्ता खाना मिलने की गारंटी है? ऐसा जरूरी नहीं है.सोशल मीडिया पर यूजर कई बार ऐसे सवाल पूछे जाते हैं. आइये जानते हैं इसका जवाब.तो किसी फूड ऐप से कोई फूड ऑर्डर करने से पहले डिस्कॉउट को समझ लें.

Advertisement

50% ऑफ देखकर भी सस्ता सौदा क्यों नहीं?

इसे एक आसान हिसाब से समझिए.

मान लीजिए किसी डिश की रेस्टोरेंट कीमत 200 रुपये है. किसी फूड ऐप पर वही डिश 320 रुपये में दिखाई दे रही है. अब अगर 100 रुपये की छूट मिलती है, तो कीमत 220 रुपये रह जाएगी.

यानी 320 रुपये पर 100 रुपये की छूट देखने में बड़ी लग सकती है, लेकिन रेस्टोरेंट के 200 रुपये वाले मेन्यू से तुलना करें तो ग्राहक अभी भी 20 रुपये ज्यादा दे रहा है.यही वजह है कि सिर्फ डिस्काउंट प्रतिशत देखकर ऑर्डर करना सही तरीका नहीं है.

यह भी पढ़ें: डिलीवरी राइडर को मिला 5-Star होटल जाने का मौका, Video देख खुश हुए लोग

असली खेल कीमत से ज्यादा बिल का है

फूड ऐप पर किसी डिश की दिखाई गई कीमत ही आपका पूरा बिल नहीं होती.ऑर्डर करते समय इसके अलावा डिलीवरी फीस, पैकेजिंग या हैंडलिंग चार्ज, प्लेटफॉर्म फीस और दूसरे लागू शुल्क जुड़ सकते हैं.

Advertisement

जॉमेटो की मौजूदा शर्तों के मुताबिक, प्लेटफॉर्म पर दिखाई गई कीमत रेस्टोरेंट पार्टनर की ओर से दी जाती है. इसमें पैकेजिंग या हैंडलिंग चार्ज भी शामिल हो सकते हैं. कंपनी यह भी कहती है कि डिलीवरी चार्ज ऑर्डर के हिसाब से बदल सकता है और इसमें दूरी, ऑर्डर की रकम और दिन के समय जैसे फैक्टर शामिल हो सकते हैं.

स्विगी की शर्तों में भी डिलीवरी फीस के अलावा हैंडलिंग, सुविधा, प्लेटफॉर्म, पैकेजिंग, छोटे ऑर्डर और कुछ परिस्थितियों में सर्ज जैसे शुल्क का जिक्र है. लागू चार्ज चेकआउट के समय दिखाए जाते हैं.

मान लीजिए 320 रुपये की डिश है...

अब इसी उदाहरण को आगे बढ़ाते हैं.

ऐप पर डिश की कीमत: 320 रुपये
डिस्काउंट: 100 रुपये
डिस्काउंट के बाद: 220 रुपये

अब मान लीजिए इसमें डिलीवरी फीस और दूसरे लागू चार्ज भी जुड़ गए.

तब आपका अंतिम बिल 220 रुपये से ज्यादा हो सकता है.

यानी स्क्रीन पर दिख रहा डिस्काउंट और आपकी जेब से जाने वाली अंतिम रकम, दोनों अलग चीजें हैं.

इसीलिए किसी ऑफर को समझने का सबसे आसान तरीका है कि डिस्काउंट के बाद फाइनल पेयेबल अमाउंट कितना है, इसे देखें.

क्या रेस्टोरेंट ऐप पर अपनी कीमत बढ़ा सकते हैं?

यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है.जॉमेटो की ऑनलाइन ऑर्डरिंग से जुड़ी रेस्टोरेंट पार्टनर शर्तों में कहा गया है कि रेस्टोरेंट को अपने सीधे चैनल के मुकाबले प्लेटफॉर्म पर कीमत समान या कम रखनी चाहिए. इसमें खाने की कीमत और पैकेजिंग जैसे शुल्क भी शामिल किए गए हैं.

Advertisement

वहीं जॉमेटो की ग्राहक शर्तों में यह भी कहा गया है कि प्लेटफॉर्म पर दिखाई गई कीमत रेस्टोरेंट पार्टनर से मिली जानकारी के आधार पर होती है और पैकेजिंग या हैंडलिंग चार्ज इसमें शामिल हो सकते हैं.

इसलिए सिर्फ एक रेडिट पोस्ट के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि सभी रेस्टोरेंट ऐप पर कीमत बढ़ाकर फिर डिस्काउंट देते हैं.

अगर किसी डिश की कीमत अलग दिखाई दे रही है, तो रेस्टोरेंट के मौजूदा मेन्यू और ऐप पर दिखाई जा रही कीमत की तुलना करना बेहतर है.

डिस्काउंट का असली फायदा कैसे पता करें?

मान लीजिए किसी ऐप पर लिखा है -50% ऑफ.सबसे पहले यह देखें कि यह छूट किस रकम पर लग रही है.कई ऑफर में अधिकतम छूट की सीमा भी होती है. उदाहरण के लिए, अगर लिखा है 50% ऑफ, अधिकतम 100 रुपये, तो 500 रुपये के ऑर्डर पर भी आपको 100 रुपये से ज्यादा की छूट नहीं मिलेगी.इसके अलावा कुछ ऑफर के लिए न्यूनतम ऑर्डर रकम, खास भुगतान माध्यम या दूसरे नियम भी हो सकते हैं.इसलिए बड़ा प्रतिशत देखकर खुश होने से पहले ऑफर की पूरी शर्त पढ़ना जरूरी है.

टैक्स को लेकर भी होता है कन्फ्यूजन

रेडिट पोस्ट में यूजर ने टैक्स को लेकर भी एक दावा किया था, लेकिन उस दावे को सभी फूड ऑर्डर पर लागू सामान्य नियम मानना सही नहीं है.

Advertisement

सरकार के मुताबिक, ऑनलाइन फूड डिलीवरी के जरिए मिलने वाली रेस्टोरेंट सर्विस पर जीएसटी से जुड़े भुगतान की जिम्मेदारी ई-कॉमर्स ऑपरेटर पर होती है. बिल में लागू टैक्स और दूसरे शुल्क की जानकारी देखी जा सकती है.

इसलिए सिर्फ टैक्स इतना प्रतिशत लग रहा है कहकर हर ऑर्डर का हिसाब निकालना सही नहीं होगा. असली रकम आपके ऑर्डर और लागू नियमों पर निर्भर करती है.

खाना मंगाने से पहले ये तीन चीजें जरूर देखें

अगली बार किसी फूड ऐप पर 50 या 60 प्रतिशत का बड़ा डिस्काउंट दिखाई दे, तो सीधे ऑर्डर करने के बजाय तीन चीजें चेक कर लें.

पहला - डिश की कीमत:
रेस्टोरेंट के मेन्यू में इसकी कीमत कितनी है?

दूसरा - छूट के बाद कीमत:
डिस्काउंट वास्तव में कितने रुपये का मिल रहा है?

तीसरा - अंतिम बिल:
डिलीवरी, पैकेजिंग, प्लेटफॉर्म फीस और लागू टैक्स जोड़ने के बाद आपको कितने रुपये देने हैं?
यानी फूड ऐप पर असली सवाल यह नहीं है कि “कितना प्रतिशत ऑफ मिल रहा है?” इसलिए इसे सभी फूड डिलीवरी ऐप या सभी रेस्टोरेंट के लिए सामान्य नियम नहीं माना जा सकता.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »