चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए एक गर्ल ग्रुप की मेंबर के प्रेग्नेंट होने की खबर ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. इस वर्चुअल मेंबर ने ऐलान किया कि वह प्रेग्नेंट है और अब कुछ समय तक ग्रुप की एक्टिविटी में हिस्सा नहीं लेगी. लेकिन कहानी में ट्विस्ट यह है कि यह कोई असली लड़की नहीं, बल्कि एआई से बनाई गई एक डिजिटल कैरेक्टर है.
इस ग्रुप का नाम बेबी वन है. यह कोरियन पॉप यानी के-पॉप ग्रुप की तरह बनाया गया है. इसकी एक मेंबर मीटी के प्रेग्नेंट होने की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने कई सवाल उठाए. कुछ लोगों ने इसे मजाक बताया, तो कुछ ने कहा कि प्रेग्नेंसी जैसे गंभीर विषय का इस्तेमाल केवल लोगों का ध्यान खींचने के लिए नहीं करना चाहिए.
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट के मुताबिक, 13 अक्टूबर को ग्रुप की ओर से मीटी के नाम से एक पोस्ट शेयर की गई. इसमें बताया गया कि वह प्रेग्नेंट है और अपनी सेहत और आने वाले बच्चे की तैयारी के लिए कुछ समय तक सार्वजनिक गतिविधियों से दूर रहेगी. पोस्ट में लोगों से उसकी निजी जिंदगी का सम्मान करने की अपील भी की गई.यह पोस्ट चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर तेजी से फैल गई. SCMP की रिपोर्ट के अनुसार, इसे 7.8 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया. इसके बाद लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई कि जब कोई कैरेक्टर AI से बनाया गया है, तो उसकी प्रेग्नेंसी की घोषणा करने का क्या मतलब है.
एआई मेंबर की प्रेग्नेंसी पर लोगों ने क्यों जताई नाराजगी?
इस मामले में सबसे ज्यादा सवाल इस बात पर उठे कि प्रेग्नेंसी और बच्चे को जन्म देने जैसे असली जीवन के अनुभवों को ऑनलाइन मनोरंजन का हिस्सा क्यों बनाया गया. महिलाओं के लिए प्रेग्नेंसी एक बड़ा शारीरिक और भावनात्मक बदलाव हो सकता है. ऐसे में कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि इस विषय का इस्तेमाल केवल चर्चा और व्यूज पाने के लिए किया गया.
कुछ यूजर्स ने मजाक में यह भी पूछा कि अगर AI मेंबर प्रेग्नेंट हो सकती है, तो क्या उसे मैटरनिटी लीव यानी मातृत्व अवकाश भी मिलेगा? वहीं, कुछ लोगों ने इस पूरे मामले को लोगों का ध्यान खींचने का तरीका बताया.
बाद में सामने आया सच, प्रेग्नेंसी की कहानी थी फर्जी
जब इस घोषणा पर विवाद बढ़ा, तो ग्रुप बनाने वालों ने बताया कि मिटी की प्रेग्नेंसी की कहानी असली नहीं थी. उन्होंने यह कहानी इसलिए बनाई थी, ताकि मिटी को ग्रुप से अलग किया जा सके और उन्हें एक साथ कई AI कैरेक्टर संभालने का दबाव कम हो. ग्रुप बनाने वालों के मुताबिक, कई डिजिटल कैरेक्टर को मैनेज करना उनके लिए मुश्किल हो रहा था. लेकिन इस काम के लिए प्रेग्नेंसी जैसा संवेदनशील विषय चुनना गलत था. उन्होंने अपनी गलती मानी और इस मामले में माफी भी मांगी.
प्रेग्नेंसी की घोषणा के अगले दिन ही रिलीज किया गाना
जब प्रेग्नेंसी की घोषणा के अगले ही दिन ग्रुप ने दक्षिण कोरियाई गर्ल ग्रुप ऐस्पा के गाने ‘नेक्स्ट लेवल’ का कवर वीडियो जारी किया गया तो यह विवाद और बढ़ गया. इसके बाद कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या प्रेग्नेंसी की कहानी जानबूझकर बनाई गई थी, ताकि ग्रुप को ज्यादा चर्चा मिले और उसके नए वीडियो पर लोगों का ध्यान जाए. हालांकि, इसे लेकर लोगों ने शक जताया था. इसे किसी साबित हो चुकी मार्केटिंग योजना के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा.
AI कैरेक्टर को इंसानों जैसी जिंदगी दिखाना कितना सही?
इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. आज AI की मदद से ऐसे डिजिटल कैरेक्टर बनाए जा सकते हैं, जो देखने में असली इंसानों जैसे लगते हैं. उनके सोशल मीडिया अकाउंट होते हैं, वे गाने गाते हैं, वीडियो में नजर आते हैं और उनके नाम पर फैंस भी जुड़ जाते हैं. लेकिन जब ऐसे कैरेक्टर की निजी जिंदगी, रिश्तों, प्रेग्नेंसी या बीमारी जैसी बातें दिखाई जाती हैं, तो यह साफ होना जरूरी है कि कौन-सी बात काल्पनिक है और कौन-सी असली.
इस मामले में आलोचकों का कहना है कि महिलाओं की प्रेगनेंसी और बच्चे को जन्म देने जैसे अनुभवों को केवल मनोरंजन या लोकप्रियता पाने का जरिया नहीं बनाना चाहिए. वहीं, यह घटना यह भी दिखाती है कि AI से बने कैरेक्टर और असली इंसानों के बीच का अंतर सोशल मीडिया पर कई बार धुंधला हो सकता है. कुल मिलाकर, चीन के AI गर्ल ग्रुप बेबी क्वीन की यह घटना सिर्फ एक वर्चुअल मेंबर की फर्जी प्रेग्नेंसी की कहानी नहीं है. इसने यह बहस भी शुरू कर दी है कि डिजिटल दुनिया में इंसानों जैसी पहचान बनाने की कितनी आजादी होनी चाहिए और लोगों का ध्यान खींचने के लिए किन विषयों का इस्तेमाल करना सही है.
aajtak.in