इन दिनों दुर्गा पूजा और रामलीला के मौके पर जगह- जगह मेला लगा हुआ है. हम जब भी ऐसे किसी मेले में पहुंचते हैं तो हमें निशाना लगाने वाले के स्टॉल जरूर दिख जाते है. यह एक ऐसी दुकान होती है, जहां बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी पहुंचते हैं और अपनी निशानेबाजी की आजमाइश करते दिख जाते हैं.
नोएडा स्टेडियम में भी रामलीला मेला लगा हुआ है. यहां घूमते हुए हमें कई ऐसे स्टॉल दिख गए. जहां दीवार पर ढेर सारे छोटे- छोटे गुब्बारे टंगे हुए थे और लोग एयरगन से उन पर निशाना लगा रहे थे. इनमें से कईयों के निशाने लग रहे थे तो कई ऐसे भी थे जो बार- बार चूक जा रहे थे. चूकने वाले लोग फिर से पैसा देकर एयरगन में छर्रा भरवाकर सफल होने की उम्मीद में फिर से निशाना लगा रहे थे.
कैसे होती है इनकी कमाई
बस, लोगों की यही सटीक निशाना लगाने की जिद इन दुकानदारों की कमाई का मुख्य जरिया होता है. क्योंकि, जब तक लोग एयरगन से गुब्बारा फोड़ने की अपनी फैंटसी पूरी करते रहते हैं, इन निशाना वाले दुकानदारों की जेबें भरती रहती है. ऐसे ख्याल आया कि ये पूछा जाए कि आखिर ऐसे मेले में एक दिन में इन निशाने वालों की कितनी कमाई हो जाती है.
ऐसे ही एक निशाने वाले की दुकान पर मैं पहुंचा. उसने बताया कि वह शामली से आया हुआ है. उसका नाम संदीप है. यहां 1 अक्टूबर से दुकान लगा रखी है. 25 अक्टूबर तक मेला रहेगा और उसकी दुकान भी लगी रहेगी. मैंने पूछा गुब्बारे पर निशाना लगाने के कितने पैसे लेते हो. उसने बताया - 100 रुपये में 20 बार आप निशाना लगा सकते हैं.
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फिर मेरा अगला सवाल था कि कितने लोग रोज निशाना लगाने आते होंगे. इस पर संदीप ने बताया कि शाम होते ही स्टॉल पर भीड़ लग जाती है. कुछ लोग तो ऐसे होते हैं, जो 1000- 1000 रुपये का निशाना लगाते हैं. क्योंकि, जब तक मन भर के गुब्बारा नहीं फोड़ लेते तब तक निशाना लगाते रहते हैं. एक दिन की कमाई के बारे में संदीप ने बताया कि अगर मेले में भीड़ ठीक- ठाक है तो बस समझ लो 10 से 15 हजार रुपये की कमाई एक दिन में हो जाती है.
मेरे सवाल यहीं खत्म नहीं हुए. मैंने पूछा मेला में दुकान लगाने के लिए हर दिन कितना देना पड़ता है. इस पर उसने बताया कि ये सारी डील ठेकेदार करते हैं. हमें यहां ठेकेदार दुकान दिलवाते हैं. हर दिन की कमाई का आधा वो ले लेता है. बाकी दुकान का भाड़ा मेला प्रशासन को क्या देता है क्या नहीं ये सब ठेकेदार की टेंशन है. हम तो बस कमाई का आधा रख लेते है और आधा उसे दे देते हैं. इसका मतलब यह हुआ कि अगर 10 हजार कमाई हुई तो उसमें से 5000 ठेकेदार ले लेता है.
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फिर भी हर दिन 5000 से 7000 रुपये की कमाई सिर्फ गुब्बारा पर निशाना लगवाकर कमा लेना कम नहीं है. इसमें खर्च सिर्फ गुब्बारे का और एयरगन में लगने वाले छर्रे का होता है. क्योंकि एयरगन तो एक बार ही खरीदनी पड़ती है. कुल मिलाकर 500 रुपये के गुब्बारे और छर्रे पर खर्च होता है. आजकल गुब्बारे की जगह कुछ सामान भी रख दिया जाता है और उसे गिराने पर वह इनाम में दिया जाता है. ऐसे में निशाना कम लगता है और गुब्बारे की जगह वो सामान इनाम में दिया जाता है.
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