199 रनों का लक्ष्य, 40 गेंद बाकी और जीत का ऐसा तूफानी अंदाज कि अंपायर भी ओवर में गेंदों की गिनती दोबारा जांचने लगे. अभिषेक शर्मा के बल्ले से निकले शतकीय तूफान और वैभव सूर्यवंशी की आतिशी बल्लेबाजी ने न्यूजीलैंड के गेंदबाजों को ऐसा धोया कि उनके पास बचाव का मौका तक नहीं था. भारत ने 13.2 ओवरों में लक्ष्य हासिल कर पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त बना ली. लेकिन वेलिंगटन की यह जीत सिर्फ स्कोरकार्ड की कहानी नहीं है. यह भारतीय टी20 क्रिकेट के उस नए मिजाज का ऐलान है, जिसमें विरोधी के बड़े स्कोर को भी बौना बनाने का दम है.
अंपायर गेंदें गिनना भूले, कीवी गेंदबाज रन रोकना!
क्रिकेट में बल्लेबाजों के बल्ले से चौके-छक्के बरसते आपने खूब देखे होंगे, लेकिन वेलिंगटन में जो हुआ, वह अलग ही कहानी है. मैदान पर ऐसा कहर टूटा कि ओवर की पांच गेंदें ही हुई थीं और अंपायर ओवर खत्म करने की ओर बढ़ने लगे. बाद में ऊपर से जांच की गई और पता चला कि छठी वैध गेंद अभी बाकी है. सोचिए, बल्लेबाजों का हमला कितना जबरदस्त रहा होगा कि गेंदों की गिनती तक दोबारा जांचनी पड़ी!
न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवरों में 198/3 रन बनाए थे. उसके लिए यह एक मजबूत स्कोर था. लेकिन भारतीय बल्लेबाजों के इरादे कुछ और ही थे. 199 रनों का लक्ष्य सामने था और अभिषेक शर्मा तथा वैभव सूर्यवंशी ने शुरुआत से ही ऐसी मारकाट मचाई कि न्यूजीलैंड के गेंदबाजों की सारी योजनाएं धरी रह गईं.
भारत ने महज 13.2 ओवरों में 199 रन बनाकर छह विकेट से जीत दर्ज कर ली. यानी 40 गेंदें बाकी रहते ही मुकाबला खत्म! टी20 में इससे ज्यादा विस्फोटक अंदाज की कल्पना करना भी मुश्किल है.
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35 गेंदों में शतक, अभिषेक ने गेंदबाजों की उधेड़ी बखिया
अभिषेक शर्मा ने 38 गेंदों में 113 रन ठोक दिए. उनका शतक सिर्फ 35 गेंदों में पूरा हुआ. यह ऐसी पारी थी, जिसमें न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के पास बचने का रास्ता नहीं दिखा. तेज गेंद हो या धीमी, आगे डाली जाए या छोटी, अभिषेक के बल्ले ने हर रणनीति का जवाब दिया.
अभिषेक की बल्लेबाजी का सबसे खतरनाक पहलू उनकी बेखौफ सोच रही. उन्होंने लक्ष्य को देखकर खेलने की बजाय गेंदबाजों को देखकर हमला किया. उन्हें रोकने के लिए फील्ड बदली गई होगी, लाइन-लेंथ में बदलाव की कोशिश हुई होगी, लेकिन रन बरसने बंद नहीं हुए.
टी20 क्रिकेट में 199 रनों का पीछा करते हुए आम तौर पर एक टीम को अच्छी शुरुआत के साथ बीच के ओवरों में भी रन गति बनाए रखने की जरूरत होती है. अभिषेक ने इस पूरी गणित को ही अप्रासंगिक बना दिया. जब एक बल्लेबाज 35 गेंदों में शतक ठोक दे, तो लक्ष्य का दबाव विपक्षी टीम पर नहीं, उसके गेंदबाजों पर आ जाता है.
यह सिर्फ एक बड़ी पारी नहीं थी. यह उन टीमों के लिए चेतावनी थी, जो भारत के खिलाफ बड़ा स्कोर बनाकर मैच पर पकड़ बनाने का सपना देखती हैं.
वैभव को ओपनिंग मिली, ‘बेबी बॉस’ ने भी दिखाया दम
अभिषेक के तूफान के बीच वैभव सूर्यवंशी की पारी को भी कम करके नहीं आंका जा सकता. वैभव ने महज 19 गेंदों में 45 रन ठोक दिए. उन्होंने अभिषेक के साथ मिलकर न्यूजीलैंड के गेंदबाजी आक्रमण की कमर तोड़ दी. दोनों के बीच पहले विकेट के लिए सिर्फ 7.1 ओवरों में 133 रनों की साझेदारी हुई.
यही वह शुरुआत थी, जिसने मुकाबले को लगभग एकतरफा बना दिया. न्यूजीलैंड को विकेट की तलाश थी, लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने उसे संभलने का मौका ही नहीं दिया. वैभव के बल्ले से निकले रन सिर्फ स्कोर में इजाफा नहीं कर रहे थे, बल्कि अभिषेक के साथ मिलकर विरोधी टीम का मनोबल भी तोड़ रहे थे.
वैभव के लिए यह पारी इसलिए भी अहम है, क्योंकि उनकी बल्लेबाजी की भूमिका को लेकर लगातार चर्चा होती रही है. उन्हें ओपनिंग में मौका मिला और उन्होंने दिखाया कि पारी की शुरुआत में उनका आक्रामक अंदाज कितना असरदार हो सकता है.
गंभीर का फैसला, टीम सर्वोपरि का संदेश
इस मुकाबले का एक अहम पहलू बल्लेबाजी क्रम में बदलाव भी रहा. अभिषेक शर्मा के साथ वैभव सूर्यवंशी ने पारी की शुरुआत की, जबकि संजू सैमसन तीसरे नंबर पर उतरे. एशियन गेम्स में भी अभिषेक और वैभव की जोड़ी ने ओपनिंग की थी. उस समय वीवीएस लक्ष्मण के मार्गदर्शन में अपनाए गए इस संयोजन की याद वेलिंगटन में ताजा हो गई.
गौतम गंभीर और टीम प्रबंधन के लिए यह फैसला खिलाड़ियों की भूमिका और टीम के संयोजन को लेकर सोच का संकेत है. संजू को तीसरे नंबर पर भेजना और वैभव को ओपनिंग देना बताता है कि टीम की जरूरत के मुताबिक बल्लेबाजी क्रम में बदलाव किया जा सकता है.
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क्रिकेट में किसी खिलाड़ी को एक तय स्थान पर बांध देना हमेशा सही नहीं होता. लेकिन जब किसी युवा बल्लेबाज को उसकी ताकत के मुताबिक भूमिका मिलती है, तो उसका असर मैदान पर दिखाई दे सकता है. वैभव की 19 गेंदों में 45 रन की पारी इसका उदाहरण है.
इसे गंभीर की दरियादिली कहें या टीम के हित को प्राथमिकता देने की सोच, सबसे अहम बात यही है कि फैसला काम करता दिखा. आखिरकार टीम सर्वोपरि है. किसी एक खिलाड़ी की भूमिका से ज्यादा जरूरी वह संयोजन है, जो भारत को जीत दिलाए.
रायपुर से वेलिंगटन तक, लक्ष्य का पीछा करने का नया अंदाज
इस साल 23 जनवरी को रायपुर में भारत ने न्यूजीलैंड के 208/6 के स्कोर का पीछा करते हुए 28 गेंदें बाकी रहते जीत दर्ज की थी. वेलिंगटन में भारत ने इससे भी तेज अंदाज दिखाया. इस बार लक्ष्य 199 रन का था और टीम ने 40 गेंदें शेष रहते ही इसे हासिल कर लिया.
यह बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की सबसे तेज जीतों में दर्ज होने वाला प्रदर्शन है. फर्क सिर्फ इतना नहीं कि भारत ने कम ओवर खेले. फर्क यह है कि टीम ने शुरुआत से ही मैच को अपने नियंत्रण में रखा और न्यूजीलैंड को वापसी का कोई मौका नहीं दिया.
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि हर मैच में इसी तरह की जीत तय है. क्रिकेट में परिस्थितियां बदलती हैं और हर दिन कोई बल्लेबाज 35 गेंदों में शतक नहीं बनाता. लेकिन भारत की बल्लेबाजी जिस अंदाज में लक्ष्य का पीछा कर रही है, वह विरोधियों के लिए चिंता का विषय जरूर है.
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भारत को सीरीज में हराना आसान नहीं, यह जीत उसका सबूत
पांच मैचों की सीरीज में भारत ने 3-0 की अजेय बढ़त बना ली है. न्यूजीलैंड के लिए अब सीरीज में वापसी की गुंजाइश नहीं बची, लेकिन भारत के लिए यह जीत आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है.
अभिषेक शर्मा का शतक, वैभव सूर्यवंशी की आतिशी पारी और टीम प्रबंधन का बल्लेबाजी क्रम में बदलाव- तीनों ने मिलकर इस मुकाबले को खास बना दिया. यह भारतीय टीम की उस ताकत का प्रदर्शन था, जिसमें एक बल्लेबाज के रुकने से दूसरा हमला नहीं रोकता.
वेलिंगटन में न्यूजीलैंड ने 198 रन बनाए, लेकिन भारत ने बता दिया कि टी20 में अब सिर्फ बड़ा स्कोर खड़ा करना काफी नहीं है. सामने ऐसी टीम हो, जिसके बल्लेबाज पहली गेंद से हमला करने का इरादा लेकर उतरें, तो 199 रन भी छोटे पड़ सकते हैं.
इस मैच पर जितना कहो, कम है. अभिषेक ने तूफान मचाया, वैभव ने उसमें अपनी चमक जोड़ी और भारत ने सीरीज पर कब्जा कर लिया. अंपायर गेंदें गिनने में उलझे, न्यूजीलैंड के गेंदबाज रन रोकने में नाकाम रहे. अब बाकी दो मुकाबलों में देखना होगा कि भारतीय बल्लेबाजी का यह तूफान कहां जाकर थमता है.
विश्व मोहन मिश्र