150 साल का रिकॉर्ड तोड़ेगा अल-नीनो, पड़ेगी भयानक गर्मी, छूटेगा पसीना

दुनिया रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के एक नए दौर में जा रही है. वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार सुपर अल-नीनो पिछले 150 सालों का सबसे ताकतवर बनेगा, जिसका असर दुनिया के मौसम पर पड़ सकता है.

Advertisement
स्पेन के सेब्रेरोस के जंगलों में लगी आग बुझाता अग्निशमनकर्मी. (Photo: AP) स्पेन के सेब्रेरोस के जंगलों में लगी आग बुझाता अग्निशमनकर्मी. (Photo: AP)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 03 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 4:52 PM IST

दुनिया में एक बार फिर सुपर अल-नीनो को लेकर चिंता बढ़ गई है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस बार यह पिछले 150 सालों का सबसे ताकतवर सुपर अल-नीनो  बन सकता है. अगर ऐसा हुआ तो दुनिया का औसत तापमान नया रिकॉर्ड बना सकता है. कई देशों में भीषण गर्मी, सूखा और कुछ जगहों पर भारी बारिश जैसी मौसम की घटनाएं भी बढ़ सकती हैं. यह अनुमान कई जलवायु मॉडल्स के आंकड़ों के आधार पर लगाया गया है.

Advertisement

सुपर अल-नीनो कोई नई घटना नहीं है. यह तब बनता है, जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से काफी ज्यादा गर्म हो जाता है. इसका असर सिर्फ समुद्र तक नहीं रहता, बल्कि दुनिया के कई देशों के मौसम पर भी पड़ता है. इसलिए वैज्ञानिक लगातार नजर रख रहे हैं.

यह भी पढ़ें: देश में बारिश का उल्टा खेल! कहीं झमाझम तो कहीं सूखा, नए आंकड़ों ने चौंकाया

कैलिफोर्निया की संस्था बर्कले अर्थ के मुताबिक, 14 अलग जलवायु मॉडल्स से किए गए सैकड़ों अनुमान में करीब 90 फीसदी मॉडल्स बता रहे हैं कि इस बार ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर का तापमान पिछले 150 सालों में सबसे ज्यादा हो सकता है. समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 3.6 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर जा सकता है. इससे पहले सबसे मजबूत सुपर अल-नीनो 2015-16 में दर्ज किया गया था. उस समय यह बढ़त करीब 2.75 डिग्री सेल्सियस थी.

Advertisement

वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी पहले से ही ग्लोबल वार्मिंग की वजह से गर्म हो रही है. अगर इसी समय सुपर अल-नीनो भी बहुत मजबूत हो गया, तो दोनों का असर मिलकर दुनिया का तापमान और बढ़ा सकते हैं. इससे कई देशों में हीटवेव, सूखा और दूसरी अधिक मौसम की घटनाएं बढ़ सकती हैं.

यह भी पढ़ें: गर्मी का नया 'रिकॉर्ड', साउथ कोरिया में 42.5°C पहुंचा पारा, इमरजेंसी अलर्ट जारी

भारत में अल-नीनो का असर अक्सर मॉनसून पर देखा जाता है. कई बार इसकी वजह से सामान्य से कम बारिश होती है, लेकिन हर बार ऐसा हो, यह जरूरी नहीं है. मौसम एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारतीय मॉनसून कई दूसरी चीजों पर भी निर्भर करता है. इसलिए सिर्फ अल-नीनो के आधार पर मॉनसून का पूरा अनुमान नहीं लगाया जा सकता. फिर भी अगर सुपर अल-नीनो मजबूत हुआ, तो गर्मी बढ़ सकती है और मौसम का मिजाज भी बदल सकता है.

फिलहाल यह एक अनुमान है. आने वाले महीनों में समुद्र के तापमान और मौसम के नए आंकड़ों से तस्वीर और साफ होगी. लेकिन अभी तक ज्यादातर क्लाइमेट मॉडल्स यही बता रहे हैं कि अगर अनुमान सही साबित हुए, तो यह पिछले 150 सालों का सबसे ताकतवर सुपर अल-नीनो हो सकता है. इसका असर दुनिया के मौसम और तापमान, दोनों पर देखने को मिल सकता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »